मजदूरी से UPPSC अधिकारी तक, वीरेंद्र तिवारी की संघर्षभरी Success Story बनी मिसाल

आजमगढ़ के वीरेंद्र तिवारी ने मजदूरी और हादसे के बावजूद हार नहीं मानी। एक हाथ खोने के बाद भी UPPSC ARO/RO परीक्षा पास कर अधिकारी बने।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी वीरेंद्र तिवारी ने मजदूरी, आर्थिक तंगी और हादसे के बावजूद हार नहीं मानी। एक हाथ कटने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार UPPSC ARO/RO परीक्षा पास कर समीक्षा अधिकारी बने।

 उत्तर प्रदेश: UPPSC ARO RO Officer Success Story में वीरेंद्र कुमार तिवारी की कहानी संघर्ष, मेहनत और धैर्य की मिसाल बनकर सामने आई है। मजदूरी से परिवार चलाने वाले वीरेंद्र ने एक हादसे में हाथ खोने के बाद भी हार नहीं मानी। कई सालों तक संघर्ष करने और लगातार असफलताओं का सामना करने के बाद उन्होंने UPPSC परीक्षा पास कर समीक्षा अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

बचपन से उठाई जिम्मेदारियों की बोझ

वीरेंद्र कुमार तिवारी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक साधारण परिवार से आते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। स्कूल की छुट्टियों में खेतों में काम करना, ट्रैक्टर चलाना और मजदूरी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था।

12वीं में पढ़ाई के दौरान वे काम की तलाश में कोलकाता चले गए। वहां उन्होंने बोरा सीलने और बोरे उठाने जैसे कठिन काम किए। बाद में परिवार के कहने पर वापस लौटकर इंटरमीडिएट की परीक्षा दी, जिसमें वे थर्ड डिवीजन से पास हुए।

मजदूरी के बीच हुआ बड़ा हादसा

12वीं के बाद वीरेंद्र ने मुंबई समेत कई शहरों में मजदूरी की। उन्होंने गारा ढोने, चूना पैकिंग और फैक्ट्री में लेबर का काम किया। नौकरी की तलाश के दौरान उन्हें अलग-अलग कंपनियों में छोटे पदों पर काम मिला।

साल 2006 में रामपुर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते समय तकनीकी खराबी के कारण उनका बायां हाथ कंधे से कट गया। यह हादसा उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। हालांकि इस घटना के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक हाथ से काम करते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभाते रहे।

16 साल बाद फिर शुरू की पढ़ाई

हादसे के बाद वीरेंद्र ने सरकारी नौकरी पाने का लक्ष्य तय किया। कई परीक्षाओं में असफल होने के बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी। साल 2014 में रेलवे में मल्टीपर्पज हेल्पर की नौकरी मिली, जिससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला।

इसके बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया और 2017 में ग्रेजुएशन पूरा किया। बीए करने के बाद उन्होंने UPPSC ARO/RO परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में ही मेन्स तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका।

लगातार मेहनत के बाद बने समीक्षा अधिकारी

वीरेंद्र तिवारी ने कई बार असफलता का सामना किया, लेकिन उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। आखिरकार अप्रैल 2026 में जारी UPPSC ARO/RO 2023 परीक्षा के अंतिम परिणाम में उन्होंने 315वीं रैंक हासिल की और समीक्षा अधिकारी के पद पर चयनित हुए।

वीरेंद्र का कहना है कि उन्हें हमेशा अपने संघर्ष और परिस्थितियां याद रहती थीं, लेकिन परिवार का भरोसा और खुद की मेहनत उन्हें आगे बढ़ाती रही। उनकी कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

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