वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा हमला, कांग्रेस पर रक्षा नीतियों की लापरवाही का लगाया आरोप

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने रक्षा तैयारियों की अनदेखी की। नए सेस से स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए संसाधन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि कांग्रेस शासन में सेना की सुरक्षा जरूरतों की अनदेखी हुई, सैनिकों के पास स्नो बूट नहीं थे। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद रक्षा को प्राथमिकता और विनिर्माण को बढ़ावा मिला।

New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने देश की रक्षा जरूरतों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान सैनिकों के पास ऊंचाई वाले इलाकों में पहनने के लिए स्नो बूट तक नहीं थे और युद्ध की स्थिति में आवश्यक गोला-बारूद भी पर्याप्त नहीं था। सीतारमण ने कहा कि यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय थी।

पूर्व सरकार की रक्षा नीतियों पर सवाल

वित्त मंत्री ने बताया कि पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में स्वीकार किया था कि बजट की कमी के कारण वे जरूरी रक्षा उपकरण नहीं खरीद पा रहे थे। उन्होंने 2013 की कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारतीय सेना के पास 17 दिन की तीव्र युद्ध क्षमता के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं था और कुछ श्रेणियों में यह भंडार घटकर केवल 10 दिन तक रह गया था। यह स्थिति देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अस्वीकार्य थी।

पीएम मोदी के शासन में रक्षा क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता

निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद रक्षा क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि सरकार ने अधिक गोला-बारूद खरीदा, एक्सपायर स्टॉक्स को बदलकर सैनिकों के लिए बुलेट-प्रूफ जैकेट्स की खरीद सुनिश्चित की। इसके साथ ही रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता को कम किया गया। आज भारत लगभग 25,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण का निर्यात कर रहा है, जबकि पहले देश भारी आयातक था।

स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025

वित्त मंत्री ने राज्यसभा में ‘‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’’ पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह उपकर नागरिकों के स्वास्थ्य और देश की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के लिए एक व्यवहार्य तंत्र प्रदान करता है। इसके तहत पान मसाला निर्माण इकाइयों पर अतिरिक्त सेस लगाया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संसाधन बढ़ेंगे।

पान मसाला इकाइयों पर नया सेस

संसद ने सोमवार को ‘‘स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’’ को मंजूरी दे दी। यह सेस पान मसाला निर्माण इकाइयों की मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा। वर्तमान में पान मसाला, तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ मुआवजा सेस भी लगता है। मुआवजा सेस समाप्त होने पर जीएसटी दर बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगी। इसके अलावा तंबाकू पर उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर नया सेस भी लगेगा।

क्या है विधेयक की प्रक्रिया

राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद लोकसभा को भेज दिया, जहां इसे पांच दिसंबर को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह कदम स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी है और इससे सरकार को अतिरिक्त संसाधन प्राप्त होंगे, जो नागरिकों की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों के लिए उपयोग किए जाएंगे।

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