बंगाल में SIR ट्रिब्यूनल जज ने दिया इस्तीफा खराब सड़कें और रोजाना 4 घंटे का सफर बताया कारण

बंगाल SIR ट्रिब्यूनल के जज इंद्रजीत चटर्जी ने खराब सड़कों और रोजाना चार घंटे की यात्रा का हवाला देकर 2 नवंबर से इस्तीफा देने की जानकारी दी।
बंगाल में SIR ट्रिब्यूनल जज ने दिया इस्तीफा खराब सड़कें और रोजाना 4 घंटे का सफर बताया कारण
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे इंद्रजीत चटर्जी ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को पत्र भेजकर 2 नवंबर 2026 से सेवा छोड़ने की जानकारी दी है। उन्होंने इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से खराब सड़कें, लंबी दूरी की रोजाना यात्रा और काम के भारी दबाव का उल्लेख किया है।

न्यायमूर्ति चटर्जी के मुताबिक, उनका घर साल्ट लेक में है, जबकि SIR ट्रिब्यूनल का कार्यालय जोका स्थित SPM Niwas में है। दोनों स्थानों के बीच रोजाना आने-जाने में उन्हें करीब 70 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। सड़क और ट्रैफिक की स्थिति के कारण एक तरफ का सफर करीब दो घंटे में पूरा होता है। यानी रोज लगभग चार घंटे केवल आने-जाने में ही खर्च हो रहे हैं।

उन्होंने अपने पत्र में बताया कि वह सुबह करीब 9:30 बजे घर से निकलते हैं और ट्रिब्यूनल पहुंचने में लगभग दो घंटे लगते हैं। शाम करीब 5 बजे काम खत्म करने के बाद घर पहुंचने में भी लगभग दो घंटे का समय लग जाता है। इस तरह रोजाना की लंबी यात्रा उनके कामकाजी समय और व्यक्तिगत समय दोनों को प्रभावित कर रही है।

इंद्रजीत चटर्जी ने अप्रैल 2026 में मुर्शिदाबाद से संबंधित SIR अपीलों की सुनवाई करने वाले अपीलीय ट्रिब्यूनल-11 के न्यायाधीश का पद संभाला था। उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वेच्छा से स्वीकार की थी, लेकिन उनका कहना है कि उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि ट्रिब्यूनल का काम इतने लंबे समय तक चलेगा। इसके अलावा पद स्वीकार करने से पहले ट्रिब्यूनल के स्थान की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई थी।

SIR ट्रिब्यूनल पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। इन ट्रिब्यूनलों के सामने उन लोगों की अपीलें आती हैं जिनके नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं या जिनके नाम को लेकर आपत्ति अथवा समावेशन से संबंधित विवाद है। मुर्शिदाबाद से जुड़े मामलों का भार न्यायमूर्ति चटर्जी के ट्रिब्यूनल पर काफी अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, उनके ट्रिब्यूनल के सामने मुर्शिदाबाद से संबंधित करीब 7,47,621 अपीलें लंबित थीं। इतनी बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई के कारण काम का दबाव भी काफी अधिक है। न्यायमूर्ति चटर्जी ने बताया कि वह इस जिम्मेदारी के लिए रोज करीब 10 घंटे काम कर रहे हैं।

इस्तीफे के पत्र में उन्होंने अपने पारिश्रमिक का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 36 प्रतिशत टैक्स कटौती के बाद उन्हें प्रतिदिन करीब 2,133 रुपये मिलते हैं। उन्होंने लंबी यात्रा, काम के घंटों और जिम्मेदारी के मुकाबले इस भुगतान का भी जिक्र किया है।

न्यायमूर्ति चटर्जी ने यह भी संकेत दिया है कि वह पूरी तरह इस तरह की जिम्मेदारी से अलग होना नहीं चाहते। उन्होंने अपने पत्र में विकल्प खुला रखा है कि यदि ट्रिब्यूनल का स्थान साल्ट लेक स्थित उनके घर से करीब 12 किलोमीटर के दायरे में हो तो वह अपनी सेवाएं जारी रखने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने घर से काम करने की संभावना का भी उल्लेख किया है।

उनके इस्तीफे की प्रति पश्चिम बंगाल की मुख्य निर्वाचन अधिकारी नीलम मीणा को भी भेजी गई है। इससे यह मामला सीधे SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रशासनिक ढांचे से जुड़ गया है। हालांकि न्यायमूर्ति चटर्जी के इस्तीफे का मुख्य कारण उनके पत्र में व्यक्तिगत कार्य-परिस्थितियां, यात्रा और काम के दबाव से संबंधित बताया गया है।

न्यायमूर्ति चटर्जी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस्तीफे का पत्र भेजने से पहले अपने कुछ साथी ट्रिब्यूनल न्यायाधीशों से चर्चा की थी। उनके अनुसार, कुछ अन्य न्यायाधीशों ने भी इसी तरह की परेशानियों का उल्लेख किया है। हालांकि इससे संबंधित सभी न्यायाधीशों की ओर से कोई सामूहिक इस्तीफा सामने नहीं आया है।

इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। उन्होंने 2 नवंबर 2026 से सेवा समाप्त करने की बात कही है। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि यदि 21 दिनों के भीतर निर्वाचन आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो 25 सितंबर को भेजे गए उनके पत्र को इस्तीफे के रूप में माना जाए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर चुनावी सूची से संबंधित कानूनी गतिविधियां जारी हैं। SIR से जुड़े मामलों में मतदाताओं के नाम को लेकर अपील और आपत्तियों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश का पद छोड़ने का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

हालांकि न्यायमूर्ति चटर्जी के इस्तीफे को किसी राजनीतिक पक्ष या SIR प्रक्रिया के पक्ष-विपक्ष के बयान के रूप में नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने निजी कार्य-परिस्थितियों और यात्रा की कठिनाइयों को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया है। उनके पत्र में खराब सड़कें और भारी ट्रैफिक के कारण रोजाना होने वाली लंबी यात्रा पर विशेष जोर दिया गया है।

अब आगे यह देखना होगा कि 2 नवंबर के बाद अपीलीय ट्रिब्यूनल-11 में मुर्शिदाबाद से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई की व्यवस्था किस तरह की जाती है। इतनी बड़ी संख्या में लंबित अपीलों को देखते हुए नए न्यायाधीश की नियुक्ति या कार्यभार के पुनर्वितरण की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल न्यायमूर्ति चटर्जी के पत्र के बाद उनका पद छोड़ने का निर्णय 2 नवंबर से प्रभावी होने की जानकारी सामने आई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक अलग मुद्दे को भी सामने रखा है कि न्यायिक अथवा अर्ध-न्यायिक जिम्मेदारियों के लिए नियुक्त अधिकारियों के काम करने की जगह और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था उनके कार्य पर किस तरह असर डाल सकती है। न्यायमूर्ति चटर्जी ने अपने पत्र में इसी व्यावहारिक समस्या को प्रमुखता से उठाया है। उनके मुताबिक, रोजाना लंबी और कठिन यात्रा के बीच भारी संख्या में मामलों की सुनवाई करना उनके लिए जारी रखना संभव नहीं है।

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