20 दिन पहले घर आया नया नौकर भाजपा पार्षद के परिवार को किया बेहोश, देहरादून में लाखों के गहने लेकर फरार

देहरादून में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के परिवार को बेहोश कर लाखों के गहने ले जाने का आरोप है। 20 दिन पहले रखा घरेलू सहायक फरार है, पुलिस तलाश में जुटी।
20 दिन पहले घर आया नया नौकर भाजपा पार्षद के परिवार को किया बेहोश, देहरादून में लाखों के गहने लेकर फरार
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देहरादून में भाजपा पार्षद के घर हुई लूट की घटना ने घरेलू सहायकों के सत्यापन और घर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बसंत विहार क्षेत्र में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर काम करने वाले एक घरेलू सहायक पर आरोप है कि उसने परिवार के सदस्यों के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाने के बाद परिवार के लोग बेहोशी की हालत में पहुंच गए। इसी दौरान घर से लाखों रुपये के सोने के आभूषण लेकर घरेलू सहायक अपने कथित साथियों के साथ फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, घटना देहरादून के बल्लीवाला चौक के पास नाथ वाटिका क्षेत्र में हुई। भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर घरेलू कामकाज के लिए करीब 20 दिन पहले नेपाल मूल के एक व्यक्ति को रखा गया था। उसे पार्षद की बेटी मेघा ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दिल्ली से काम पर बुलाया था। इतने कम समय में घरेलू सहायक परिवार के बीच रहने लगा और घर के रोजमर्रा के कामकाज से परिचित हो गया। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसे काम पर रखने से पहले उसकी पहचान और पते का किस स्तर तक सत्यापन किया गया था।

मंगलवार रात परिवार के लोग घर में मौजूद थे। आरोप है कि घरेलू सहायक ने भोजन में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाने के बाद पार्षद अमिता सिंह, उनके पति महिपाल सिंह और बेटे शुभम की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोशी की हालत में पहुंच गए। परिवार के सदस्यों के होश में आने के बाद घर में सामान की स्थिति देखकर उन्हें घटना का पता चला और पुलिस को सूचना दी गई। घटना के बाद अमिता सिंह को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि उनके पति और बेटे की हालत ठीक बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक, परिवार के सदस्यों के बेहोश होने के बाद आरोपी घर से सोने के आभूषण लेकर फरार हो गया। शुरुआती जानकारी में घरेलू सहायक के साथ अन्य लोगों के शामिल होने की बात भी सामने आई है। बाद की पुलिस जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, घरेलू सहायक ने कथित तौर पर चार अन्य लोगों को बुलाया था। इस तरह कुल पांच लोगों के वारदात में शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के बाद संदिग्धों की गतिविधियां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई हैं। पुलिस इन फुटेज को खंगालकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किस रास्ते से घर पहुंचे और वारदात के बाद किस दिशा में गए। फुटेज के आधार पर संदिग्धों की संख्या और उनकी पहचान से जुड़े सुराग जुटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस घरेलू सहायक के मोबाइल फोन, उसके संपर्कों और संभावित ठिकानों की जानकारी भी जुटा रही है।

पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि वारदात अचानक हुई या पहले से इसकी योजना बनाई गई थी। घरेलू सहायक को घर में काम करते हुए करीब 20 दिन ही हुए थे। इतने कम समय में उसने परिवार की दिनचर्या, घर में आने-जाने की व्यवस्था और कीमती सामान के बारे में कितनी जानकारी हासिल की, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से उसके साथियों ने पहले घर की रेकी की थी या घटना के दौरान ही उन्हें बुलाया गया था।

घटना में चोरी गए सामान की सही कीमत और पूरी सूची भी पुलिस जांच का हिस्सा है। शुरुआती रिपोर्टों में लाखों रुपये के सोने के आभूषण चोरी होने की बात सामने आई है। परिवार से चोरी हुए सामान का विवरण लिया जा रहा है, ताकि उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी के बाद आभूषणों को कहां ले जाया गया और आरोपित किन लोगों के संपर्क में था।

घटना के बाद पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। घरेलू सहायक के बारे में उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी, मोबाइल नंबर और उसके संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि उसने जिस नाम और पते के आधार पर नौकरी हासिल की थी, वह जानकारी वास्तविक है या नहीं। ऑनलाइन माध्यम से घरेलू सहायक को काम पर रखने की प्रक्रिया में दिए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

इस वारदात ने घरों में घरेलू सहायकों के पुलिस सत्यापन की जरूरत को भी फिर सामने ला दिया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी व्यक्ति को काम पर रखने के बाद केवल उसके द्वारा दी गई जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय पहचान, स्थायी पता, पूर्व रोजगार और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि इस मामले में सत्यापन की प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ था, यह पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

परिवार के लिए घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि घर में काम करने वाला व्यक्ति रोजाना परिवार के बीच मौजूद था और उसे घरेलू गतिविधियों की जानकारी थी। पुलिस अब इस पहलू की जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले परिवार का विश्वास हासिल किया और उसके बाद वारदात को अंजाम दिया। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू सहायक के करीब 20 दिन तक घर में रहने के बाद यह घटना सामने आई।

पुलिस ने फिलहाल मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जुटाई जा रही है और आरोपितों की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर फरार हुए लोगों ने वारदात के बाद किस माध्यम से इलाके से बाहर निकलने की कोशिश की।

घटना के बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत को लेकर भी पुलिस और परिजन नजर बनाए हुए हैं। पार्षद अमिता सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि उनके पति और बेटे की हालत ठीक बताई गई है। परिवार के सदस्यों के चिकित्सकीय परीक्षण से भी यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि उन्हें किस प्रकार का पदार्थ दिया गया था और उसका उनके स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ा।

अब पुलिस की जांच मुख्य रूप से फरार घरेलू सहायक और उसके संभावित साथियों तक पहुंचने, चोरी किए गए आभूषणों की बरामदगी और घटना की पूरी साजिश का पता लगाने पर केंद्रित है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल संपर्क और आरोपित की पहचान संबंधी दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी और वारदात से पहले या बाद में उनके बीच किस तरह संपर्क हुआ था।

फिलहाल पुलिस की ओर से आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना से जुड़े सभी आरोपों को जांच के निष्कर्ष तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की जांच और संभावित गिरफ्तारियों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वारदात में कितने लोग शामिल थे, चोरी किए गए आभूषण कहां हैं और घटना की पूरी योजना किस तरह तैयार की गई थी।

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