नैनीताल के कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित डीएसबी परिसर छात्रसंघ चुनाव में इस बार एक मां और बेटे की जोड़ी खास चर्चा में रही। छात्रसंघ अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान मैदान में थे तो उनकी मां बीना चौहान ने बेटे के प्रचार की कमान संभालने के लिए खुद कॉलेज में एमए राजनीति विज्ञान में दाखिला ले लिया। बेटे के लिए चुनाव प्रचार करते-करते वह खुद परिसर की छात्रा बन गईं और चुनाव के दौरान छात्र-छात्राओं से संपर्क कर बेटे के पक्ष में समर्थन जुटाती रहीं। चुनाव परिणाम आने के बाद भानु प्रताप सिंह चौहान अध्यक्ष निर्वाचित हुए तो मां बीना चौहान भावुक हो गईं और बेटे को गले लगा लिया।
बीना चौहान हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र की पार्षद हैं। बेटे भानु के छात्रसंघ चुनाव में उतरने के बाद उन्होंने केवल बाहर से प्रचार करने के बजाय डीएसबी परिसर में ही प्रवेश लेने का फैसला किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए में दाखिला लिया और इसके बाद कैंपस में लगातार सक्रिय रहीं। उनके लिए यह केवल बेटे के चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि दोबारा पढ़ाई शुरू करने का भी अवसर था। इससे पहले वह एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एमए एजुकेशन कर चुकी हैं और वर्ष 2025 में एलएलबी भी पूरी कर चुकी हैं।
चुनाव के दौरान बीना चौहान ने सोशल मीडिया से लेकर व्यक्तिगत संपर्क तक प्रचार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने छात्र-छात्राओं से मुलाकात की और भानु के लिए समर्थन मांगा। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, छात्राओं के बीच संपर्क बनाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। बेटे की उम्मीदवारी के साथ वह लगातार परिसर में मौजूद रहीं और चुनावी गतिविधियों में भाग लेती रहीं।
डीएसबी परिसर में अध्यक्ष पद के लिए इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान के सामने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद समर्थित शुभम कुमार और निर्दलीय प्रत्याशी हिमांशु आर्य मैदान में थे। मतदान के बाद हुई मतगणना में भानु प्रताप सिंह चौहान को 1355 वोट मिले। शुभम कुमार को 873 और हिमांशु आर्य को 283 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भानु प्रताप सिंह चौहान अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए।
डीएसबी परिसर में मंगलवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 5410 छात्रों में से 2535 ने मतदान किया। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू हुई और अध्यक्ष पद सहित अन्य चुनावी परिणाम घोषित किए गए।
अध्यक्ष पद के अलावा संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों पर भी मुकाबला हुआ। संयुक्त सचिव पद पर अनुष्का पुरी को 1614 वोट और गौरी को 619 वोट मिले, जबकि कोषाध्यक्ष पद पर सृष्टि रावत ने 1165 वोट हासिल किए और विदुषी वर्मा को 1147 वोट मिले। अन्य कई पदों पर एक ही प्रत्याशी होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन हुआ।
भानु प्रताप की जीत के बाद उनकी मां बीना चौहान की प्रतिक्रिया भी चर्चा में रही। जागरण के मुताबिक, परिणाम सामने आने के बाद वह भावुक हो गईं और उन्होंने बेटे को गले लगा लिया। उन्होंने बेटे की जीत को अपने लिए बेहद भावुक क्षण बताया। मां के लिए यह परिणाम इसलिए भी खास था क्योंकि पिछले कई दिनों से वह बेटे के चुनाव अभियान में लगातार उसके साथ थीं।
बीना चौहान के कॉलेज में दोबारा दाखिला लेने की कहानी भी अपने आप में अलग है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने विवाह के करीब 13 वर्ष बाद वर्ष 2014 में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एजुकेशन विषय में एमए किया था। इसके बाद उन्होंने 2025 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। अब 12 साल बाद उन्होंने डीएसबी परिसर में राजनीति विज्ञान से एमए के लिए प्रवेश लिया है। उनका कहना है कि पढ़ाई के प्रति उनका लगाव अभी भी बना हुआ है और वह चुनाव के बाद अपनी पढ़ाई पूरी करने की योजना रखती हैं।
भानु प्रताप सिंह चौहान की उम्मीदवारी भी चुनाव से पहले चर्चा में थी। रिपोर्टों के अनुसार, वह विद्यार्थी परिषद से टिकट के दावेदार थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उनके अभियान में काले झंडे को चुनावी पहचान के रूप में इस्तेमाल किया गया। अंततः मतगणना में उन्हें सबसे अधिक वोट मिले और वह डीएसबी परिसर के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।
डीएसबी परिसर का चुनाव उत्तराखंड के व्यापक छात्रसंघ चुनावों का हिस्सा था। 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए राज्य के विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में चुनाव कराए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, राज्य में 119 सरकारी कॉलेजों और कई विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रसंघ चुनाव हुए। अलग-अलग परिसरों में अलग-अलग संगठनों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने विभिन्न पदों पर जीत दर्ज की।
कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस शैक्षणिक सत्र से छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के प्रतिनिधित्व से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव किया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने 2026-27 के चुनावों में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए गए, जबकि अध्यक्ष सहित कुछ अन्य पद अनारक्षित रखे गए।
डीएसबी परिसर में चुनाव से पहले अध्यक्ष पद के लिए तीन प्रत्याशियों का नामांकन वैध पाया गया था। इनमें भानु प्रताप सिंह चौहान, शुभम कुमार और हिमांशु आर्य शामिल थे। संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर भी दो-दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला तय हुआ था, जबकि कई अन्य पदों पर एकल नामांकन के कारण निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनी थी।
चुनाव परिणाम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मां बीना चौहान की भूमिका की हो रही है। एक ओर वह खुद छात्रा के रूप में डीएसबी परिसर में दाखिल हुईं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने बेटे के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। बेटे की जीत के बाद उनका भावुक होना इस पूरे चुनावी घटनाक्रम की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल रहा।
भानु प्रताप सिंह चौहान के लिए अब छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में काम करने की जिम्मेदारी शुरू होगी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया था। वहीं उनकी मां बीना चौहान के लिए भी डीएसबी परिसर में पढ़ाई का नया दौर शुरू हुआ है। चुनाव खत्म होने के बाद उनका कहना है कि वह अपनी एमए की पढ़ाई जारी रखेंगी। इस तरह बेटे के छात्रसंघ चुनाव में उतरने से शुरू हुआ यह सफर मां के लिए दोबारा उच्च शिक्षा से जुड़ने का अवसर भी बन गया है।










