हरिद्वार में अर्धकुंभ से पहले शहर के कई प्रचलित इलाकों को नई पहचान देने की तैयारी है। नगर निगम की बोर्ड बैठक के एजेंडे में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के नाम बदलने से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक चमगादड़ टापू का नाम बदलकर गंगाद्वीप, रोड़ी बेलवाला को हरि वन, गड्ढा पार्किंग को अलकनंदा पार्किंग, उत्तम बस्ती को उत्तम नगर और कबाड़ी बस्ती को सुंदर बस्ती किए जाने की योजना है। हालांकि इन नामों को बदलने की प्रक्रिया बोर्ड की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।
नगर निगम हरिद्वार की बोर्ड बैठक में केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे गए हैं। एजेंडे में पार्किंग व्यवस्था, विज्ञापन अधिकार, अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था के साथ-साथ नगर निगम की संपत्तियों के इस्तेमाल से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल हैं। ऐसे में यह बैठक हरिद्वार के आगामी विकास और शहरी प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रस्तावित नामों में सबसे अधिक चर्चा चमगादड़ टापू और रोड़ी बेलवाला को लेकर है। नगर निगम के एजेंडे में चमगादड़ टापू का नया नाम गंगा द्वीप और रोड़ी बेलवाला का नाम हरि वन रखने का प्रस्ताव है। इसी तरह गड्ढा पार्किंग को अलकनंदा पार्किंग नाम देने की बात कही गई है। शहर की दो बस्तियों के नाम भी बदलने का प्रस्ताव है, जिसमें उत्तम बस्ती को उत्तम नगर और कबाड़ी बस्ती को सुंदर बस्ती करने की बात कही गई है।
नगर निगम के मुताबिक इन क्षेत्रों को नए और उचित नाम देने के उद्देश्य से नाम परिवर्तन के प्रस्ताव एजेंडे में शामिल किए गए हैं। फिलहाल इन नामों को अंतिम रूप से बदला हुआ नहीं माना जा सकता। बोर्ड में प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी के बाद ही प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
रोड़ी बेलवाला क्षेत्र पहले से ही हरिद्वार के बड़े धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए जुलाई 2026 में करीब 58.84 करोड़ रुपये की परियोजना का शिलान्यास किया गया था। इस परियोजना में जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सिविल कार्य, निगरानी प्रणाली और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाओं के विकास जैसे काम शामिल हैं।
हरिद्वार में आने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए शहर की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। जुलाई में शुरू की गई गंगा कॉरिडोर से जुड़ी परियोजनाओं में हरकी पैड़ी, सुभाष घाट और रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास को शामिल किया गया था। इन परियोजनाओं का लक्ष्य अर्धकुंभ से पहले काम पूरा करना बताया गया था।
नाम परिवर्तन के साथ नगर निगम की बैठक में पार्किंग व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए हैं। एजेंडे के अनुसार नगर निगम क्षेत्र की सभी पार्किंग की निविदा का अधिकार नगर निगम हरिद्वार में निहित करने पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य पार्किंग व्यवस्था को निगम के स्तर पर व्यवस्थित करने से जुड़ा है।
गड्ढा पार्किंग का नाम अलकनंदा पार्किंग किए जाने का प्रस्ताव भी इसी एजेंडे का हिस्सा है। हरिद्वार में धार्मिक पर्वों और बड़े आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में पार्किंग स्थलों की पहचान और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर नगर निगम की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आगामी बड़े आयोजनों को देखते हुए पार्किंग और यातायात व्यवस्था को लेकर भी कई प्रस्ताव बैठक में रखे गए हैं।
नगर निगम की संपत्तियों के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में महत्वपूर्ण हैं। महापौर कार्यालय परिसर में अतिथिगृह, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और गंगा म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा पुरानी कचहरी में अतिथिगृह अथवा व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित करने के विकल्प पर भी बोर्ड विचार करेगा।
गंगा म्यूजियम का प्रस्ताव हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। नगर निगम परिसर में इस तरह की सुविधा विकसित करने का प्रस्ताव शहर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक नए आकर्षण के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि इसका अंतिम स्वरूप, निर्माण की लागत और कार्यान्वयन की समयसीमा बोर्ड के फैसले और आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
शहर में लगने वाले यूनिपोल विज्ञापनों को लेकर भी नगर निगम अपने अधिकारों को स्पष्ट करने की दिशा में प्रस्ताव ला रहा है। एजेंडे में क्षेत्र में लगाए जाने वाले यूनिपोल विज्ञापनों का अधिकार नगर निगम के अधीन करने की बात कही गई है। इसके अलावा शहर में डिवाइडर पोल और विभिन्न कंपनियों के लटके हुए तारों को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा गया है।
नगर निगम की सीमाओं पर स्वागत द्वार बनाने का प्रस्ताव भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। इसके साथ ही पन्नालाल भल्ला म्यूनिसिपल कॉलेज परिसर में विधि महाविद्यालय या किसी उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना पर भी विचार किया जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो आगे इसके लिए विस्तृत योजना और प्रक्रिया तय की जा सकती है।
नगर निगम से जुड़े लंबित न्यायिक मामलों को तेजी से निपटाने के लिए विधि प्रकोष्ठ यानी लीगल सेल के गठन का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसका उद्देश्य निगम से जुड़े विभिन्न लंबित वादों की निगरानी और उनके त्वरित निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था तैयार करना बताया गया है।
इसके अलावा किन्नर बधाई शुल्क निर्धारित करने के लिए उपविधि बनाने का प्रस्ताव भी बोर्ड के सामने रखा जाएगा। इस संबंध में नियमों को व्यवस्थित करने और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया तय करने पर चर्चा की जानी है।
नगर निगम की संपत्ति से जुड़ा एक अन्य प्रस्ताव ग्राम सराय में खरीदी गई भूमि से संबंधित है। एजेंडे में इस भूमि की सेल डीड निरस्त करने और खरीद के लिए भुगतान की गई धनराशि नगर निगम के खाते में वापस प्राप्त करने के संबंध में विचार किया जाना है। इस प्रस्ताव पर बोर्ड का निर्णय आगे की प्रक्रिया को तय करेगा।
मां मनसा देवी रोपवे के संचालन और अनुरक्षण की अवधि बढ़ाने का विषय भी बोर्ड के सामने रखा गया है। आगामी निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक रोपवे के संचालन की अवधि बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा होनी है। इससे जुड़े मामले में निगम को संचालन व्यवस्था और भविष्य की निविदा प्रक्रिया के बीच अंतरिम व्यवस्था तय करनी होगी।
हरिद्वार में इन दिनों शहर की नागरिक सुविधाओं को लेकर भी नगर निगम सक्रिय है। हाल ही में रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के सार्वजनिक शौचालयों के निरीक्षण के दौरान एक शौचालय में निर्धारित व्यवस्था से अलग शुल्क वसूली का मामला सामने आया था। नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए उस शौचालय को सील किया और यात्रियों से वसूला गया शुल्क वापस कराया था।
ऐसे में नाम परिवर्तन के साथ-साथ नगर निगम के सामने शहर की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की भी चुनौती है। पार्किंग, सफाई, यातायात, पैदल यात्रियों की सुविधा, सार्वजनिक शौचालय, जल निकासी और अतिक्रमण जैसे मुद्दे सीधे तौर पर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से जुड़े हैं। अर्धकुंभ से पहले इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं।
हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की परियोजनाओं में भी इसी तरह शहर के प्रमुख धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है। करीब 235 करोड़ रुपये की चार प्रमुख परियोजनाओं में हरकी पैड़ी और सुभाष घाट के पुनरुद्धार के साथ हरकी पैड़ी के उत्तर क्षेत्र और रोड़ी बेलवाला के विकास कार्य शामिल हैं।
अब नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित नए नामों को कब से आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, संकेतक बोर्ड, नक्शों तथा अन्य दस्तावेजों में इन्हें किस तरह शामिल किया जाएगा। फिलहाल एजेंडे में शामिल प्रस्तावों के अनुसार हरिद्वार के पांच प्रमुख क्षेत्रों और पार्किंग स्थल को नई पहचान देने की तैयारी है।
अगर प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो आने वाले समय में हरिद्वार पहुंचने वाले लोगों को चमगादड़ टापू की जगह गंगाद्वीप, रोड़ी बेलवाला की जगह हरि वन और गड्ढा पार्किंग की जगह अलकनंदा पार्किंग जैसे नए नाम सुनने को मिल सकते हैं। हालांकि इन बदलावों को लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया बोर्ड के निर्णय के बाद ही आगे बढ़ेगी।











