जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने मंगलवार को दूसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए शपथ ली। चुनाव में उन्हें 60% वोट मिले थे, लेकिन विपक्ष ने नतीजों पर सवाल उठाए। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ब्रायन मुंडुबिले देशद्रोह के आरोपों में हिरासत में हैं।
लुसाका: जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनका दूसरा कार्यकाल ऐसे समय शुरू हुआ है, जब हालिया चुनाव के नतीजों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ब्रायन मुंडुबिले देशद्रोह के आरोपों में हिरासत में हैं। राजधानी लुसाका के नेशनल हीरोज स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में हजारों समर्थक मौजूद रहे। समारोह में केन्या, बोत्सवाना, जिम्बाब्वे, नामीबिया और तंजानिया समेत कई अफ्रीकी देशों के राष्ट्रपति और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। हिचिलेमा के साथ उनकी उपराष्ट्रपति पद की सहयोगी मुताले नालुमांगो ने भी शपथ ली।
चुनाव में हिचिलेमा को मिली बड़ी जीत
आधिकारिक चुनाव परिणामों के मुताबिक 13 अगस्त को हुए राष्ट्रपति चुनाव में हिचिलेमा को करीब 60 प्रतिशत वोट मिले। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी ब्रायन मुंडुबिले को लगभग 38 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
हालांकि, मुंडुबिले ने चुनाव परिणामों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वोटों की गणना और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया के कुछ हिस्सों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।
चुनाव पर्यवेक्षकों ने मतदान के दिन की स्थिति को बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण बताया, लेकिन मतगणना प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंताएं दर्ज कीं। यूरोपीय संघ के चुनाव पर्यवेक्षकों ने विशेष रूप से परिणाम दर्ज करने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया में कमियों का उल्लेख किया।
मतगणना प्रक्रिया पर उठे सवाल
यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के अनुसार कई मतगणना केंद्रों पर अधिकारियों ने परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद उन्हें कागजी रिकॉर्ड पर दर्ज नहीं किया। डिजिटल रिकॉर्ड और कागजी दस्तावेजों के बीच सत्यापन की प्रक्रिया भी कई स्थानों पर कमजोर बताई गई।
पर्यवेक्षकों ने यह भी कहा कि कई रिटर्निंग अधिकारियों ने मुख्यालय से निर्देश मिलने तक प्रक्रिया को बीच में रोक दिया। इन टिप्पणियों ने चुनाव के अंतिम परिणामों की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष और अन्य पक्षों की चिंताओं को और बढ़ाया।
मुंडुबिले चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देना चाहते थे, लेकिन उनके पास कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए निर्धारित समय बहुत कम था। रिपोर्ट के अनुसार, जिस दिन चुनाव परिणाम के खिलाफ मामला दायर करने की अंतिम समयसीमा थी, उस दौरान अदालतों को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था।
विपक्षी नेता पर देशद्रोह का आरोप
चुनाव के बाद जाम्बिया में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। मतदान के अगले दिन राजधानी लुसाका में एक ऐसी संपत्ति पर सुरक्षा बलों ने छापा मारा, जिसका संबंध मुंडुबिले से बताया गया।
इस कार्रवाई में पूर्व कैबिनेट मंत्री की मौत हो गई और कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया। सरकारी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि विपक्षी समूह सशस्त्र विद्रोह की योजना बना रहे थे। विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया।
इसके बाद मुंडुबिले और उनके उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मेकेबी जुलु कुछ समय के लिए सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए। दोनों को पिछले सप्ताह पुलिस ने हिरासत में लिया और सप्ताहांत में उन पर देशद्रोह से जुड़े आरोप लगाए गए।
मुंडुबिले की हिरासत ऐसे समय हुई है, जब चुनाव परिणाम को लेकर उनकी पार्टी और समर्थक पहले ही सरकार पर सवाल उठा रहे थे। इससे जाम्बिया की चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बढ़ी है।
2021 में भारी जीत से सत्ता में आए थे हिचिलेमा
64 वर्षीय हिचिलेमा पहली बार 2021 में सत्ता में आए थे। उस समय उन्होंने भारी बहुमत से चुनाव जीतकर लंबे समय से सत्ता में रही राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव किया था।
उनके सत्ता संभालने के समय जाम्बिया गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। देश हाल ही में अपने अंतरराष्ट्रीय कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट कर चुका था और वार्षिक महंगाई दर 24 प्रतिशत से अधिक थी।
हिचिलेमा ने चुनाव से पहले बीबीसी से बातचीत में कहा था कि उनकी सरकार को कमजोर अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी और देश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी।
कर्ज पुनर्गठन को बड़ी उपलब्धि मानती है सरकार
राष्ट्रपति हिचिलेमा के पहले कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में अंतरराष्ट्रीय कर्ज का पुनर्गठन शामिल रहा। उनकी सरकार ने विदेशी कर्जदाताओं के साथ बातचीत कर जाम्बिया की ऋण संबंधी स्थिति को स्थिर करने की कोशिश की।
सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों तथा विदेशी कर्जदाताओं के साथ संबंध बेहतर हुए।
महंगाई में भी पहले की तुलना में कमी आई है। हालांकि, आम नागरिकों के लिए आर्थिक चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है और बड़ी संख्या में लोग जीवन-यापन की बढ़ती लागत से परेशान हैं।
दूसरे कार्यकाल में आर्थिक सुधारों पर जोर
हिचिलेमा अब अपने दूसरे कार्यकाल में पिछले पांच वर्षों के दौरान शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और देश में रोजगार के अवसर पैदा करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
हालांकि, सरकार के सामने आर्थिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक विश्वास बहाल करने की चुनौती भी होगी। चुनाव प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्तियों और प्रमुख विपक्षी नेता की गिरफ्तारी ने देश के लोकतांत्रिक संस्थानों और राजनीतिक माहौल को लेकर बहस तेज कर दी है।
शपथ ग्रहण में दिखा समर्थन
मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राजधानी में हिचिलेमा के समर्थकों की बड़ी भीड़ जुटी। नेशनल हीरोज स्टेडियम में मौजूद लोगों ने राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल का स्वागत किया।
अफ्रीकी देशों के कई राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी ने भी समारोह को क्षेत्रीय महत्व दिया। केन्या, बोत्सवाना, जिम्बाब्वे, नामीबिया और तंजानिया के नेताओं सहित कई विदेशी प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
हिचिलेमा ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत ऐसे समय की है, जब उन्हें एक ओर आर्थिक उपलब्धियों को मजबूत करना है और दूसरी ओर चुनाव के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवादों से निपटना है।










