₹30 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट का झांसा देकर बैंक मैनेजर ने ऐंठे ₹2.66 करोड़: बैंक मैनेजर समेत 3 गिरफ्तार

बेंगलुरु में एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक समेत तीन लोग 2.66 करोड़ की ठगी मामले मे गिरफ्तार। कारोबारी को ₹30 करोड़ के फर्जी कॉन्ट्रैक्ट का झांसा देकर रकम ऐंठी गई।

बेंगलुरु में एक्सिस बैंक के एक शाखा प्रबंधक समेत तीन आरोपियों को कारोबारी से ₹2.66 करोड़ की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने ₹30 करोड़ का फर्जी बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का झांसा देकर RTGS के जरिए रकम हड़प ली।

बेंगलुरु: भारत के प्रमुख तकनीकी और व्यावसायिक केंद्र बेंगलुरु में एक चौंकाने वाला वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में एक्सिस बैंक के एक शाखा प्रबंधक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने एक सफल कारोबारी को बड़े व्यावसायिक अनुबंध का झांसा देकर ₹2.66 करोड़ (लगभग 3 लाख अमेरिकी डॉलर) की ठगी की।

यह मामला न केवल बैंकिंग क्षेत्र में भरोसे और नैतिकता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि साइबर और वित्तीय अपराध किस तरह नई रणनीतियों के साथ विकसित हो रहे हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या आरोपी पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी में शामिल रहे हैं।

सम्मानजनक पद पर रहते हुए रची गई कथित साजिश

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार मुख्य आरोपी विनोद कुमार बेंगलुरु के बागलागुंटे क्षेत्र स्थित एक्सिस बैंक शाखा में प्रबंधक के पद पर कार्यरत था। उसके साथ अरुण कुमार और किरण नामक दो अन्य व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया है।

जांच में सामने आया है कि विनोद कुमार ने अपने बैंकिंग पद का फायदा उठाते हुए एक ऐसे ग्राहक को निशाना बनाया, जिसके खाते में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन होते थे। पीड़ित कारोबारी सुब्रमणि परिवहन और मैनपावर सप्लाई का व्यवसाय संचालित करते हैं तथा उनके खातों में हर महीने करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। पुलिस का मानना है कि आरोपी ने ग्राहक की वित्तीय क्षमता और कारोबारी गतिविधियों का अध्ययन करने के बाद सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की योजना तैयार की।

₹30 करोड़ के कथित अनुबंध का लालच

जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने कारोबारी से संपर्क कर दावा किया कि उसके पास प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क है जो उसे लगभग ₹30 करोड़ मूल्य का एक बड़ा व्यावसायिक अनुबंध दिला सकता है।

विश्वास पैदा करने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह अपने संपर्कों के माध्यम से अनुबंध सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे 10 प्रतिशत कमीशन देना होगा। यह प्रस्ताव कारोबारी के लिए आकर्षक था क्योंकि इससे उसके व्यवसाय का विस्तार संभव दिखाई दे रहा था। धीरे-धीरे आरोपी ने पीड़ित का विश्वास जीत लिया और उसे अग्रिम भुगतान करने के लिए राजी कर लिया।

₹30 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट का झांसा देकर बैंक मैनेजर ने ऐंठे ₹2.66 करोड़: बैंक मैनेजर समेत 3 गिरफ्तार

फर्जी दस्तावेजों से खोले गए खाते

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का उपयोग कर मोबाइल सिम कार्ड हासिल किए। इसके अलावा उसने दो दैनिक मजदूरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, जिन्हें इस कथित धोखाधड़ी की जानकारी तक नहीं थी।

इन खातों का इस्तेमाल कथित रूप से धन प्राप्त करने और उसकी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क पहले से तैयार किया गया था ताकि किसी भी लेन-देन का सीधा संबंध मुख्य आरोपी से न जुड़ सके।

आरटीजीएस के जरिए भेजे गए ₹2.66 करोड़

आरोप है कि कारोबारी ने आरोपी के झांसे में आकर विभिन्न आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) ट्रांजैक्शनों के माध्यम से कुल ₹2.66 करोड़ संबंधित खातों में स्थानांतरित कर दिए।

धन प्राप्त होने के कुछ समय बाद आरोपी का व्यवहार अचानक बदल गया। कथित तौर पर उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया और कारोबारी के संपर्क से बाहर हो गया। जब कई दिनों तक कोई जवाब नहीं मिला, तब कारोबारी को संदेह हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।

बैंक से जवाब नहीं मिला तो पुलिस तक पहुंचा मामला

संदेह बढ़ने पर पीड़ित कारोबारी ने बैंक से संपर्क कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। हालांकि उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसने बागलागुंटे पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया।

दो दिनों के भीतर गिरफ्तारी

पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते जांच टीम ने महज दो दिनों के भीतर तीनों आरोपियों का पता लगा लिया। इसके बाद विनोद कुमार, अरुण कुमार और किरण को गिरफ्तार कर लिया गया।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि किरण पेशे से एक पिग्मी कलेक्टर था और कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को नकद में बदलने तथा निकालने में मदद कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है।

मनी ट्रेल की जांच जारी

जांच एजेंसियां अब धन के पूरे प्रवाह यानी "मनी ट्रेल" की जांच कर रही हैं। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि धन किन खातों में गया, किसने निकाला और क्या इसे अन्य निवेशों या संपत्तियों में लगाया गया।

पुलिस यह भी जांच रही है कि इस कथित धोखाधड़ी में और लोग शामिल थे या नहीं। यदि अतिरिक्त संदिग्धों की भूमिका सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

क्या पहले भी हुई थीं ऐसी धोखाधड़ियां?

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या आरोपी पहले भी इसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे चुके हैं। अधिकारियों को संदेह है कि बैंकिंग प्रणाली की जानकारी रखने वाला व्यक्ति लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल हो सकता है। यदि जांच में ऐसे अन्य मामलों के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला एक बड़े वित्तीय अपराध नेटवर्क का रूप ले सकता है।

बैंकिंग ग्राहकों के लिए चेतावनी

यह घटना उन ग्राहकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जो बड़े निवेश या व्यावसायिक अवसरों के नाम पर अनौपचारिक प्रस्तावों पर भरोसा कर लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े वित्तीय सौदे से पहले स्वतंत्र सत्यापन और कानूनी जांच अनिवार्य होनी चाहिए।

बैंक अधिकारी या कर्मचारी होने मात्र से किसी व्यक्ति की निजी व्यावसायिक पेशकश पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। सभी लेन-देन आधिकारिक और दस्तावेजी प्रक्रिया के माध्यम से ही किए जाने चाहिए।

Leave a comment