आगरा की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद पर लगा कलश आंधी के बाद टेढ़ा हो गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसे संरक्षण कार्य के लिए उतार लिया है और क्षतिग्रस्त रॉड को बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।
आगरा: आगरा की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में संरक्षण कार्य के तहत मुख्य गुंबद पर लगे कलश को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सावधानीपूर्वक उतार लिया है। हाल ही में आई तेज आंधी के कारण यह कलश एक ओर झुक गया था। प्रारंभिक जांच में इसके अंदर लगी लोहे की रॉड क्षतिग्रस्त पाई गई है, जिसके बाद मरम्मत और संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में जुटा एएसआई
आगरा किला क्षेत्र के निकट स्थित जामा मस्जिद मुगलकालीन वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। इस संरक्षित स्मारक के मुख्य गुंबद पर लगा कलश हाल की आंधी के दौरान टेढ़ा हो गया था, जिसके बाद एएसआई ने तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया।
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विशेषज्ञों की जांच में पता चला कि कलश को सहारा देने वाली आंतरिक रॉड क्षतिग्रस्त हो गई है। सुरक्षा और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कलश को उतारने का निर्णय लिया गया।
16 फीट ऊंचे कलश को उतारने में लगा समय
मुख्य गुंबद पर स्थापित यह कलश लगभग 16 फीट ऊंचा है और कई हिस्सों को जोड़कर बनाया गया है। इसे सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने करीब दस दिनों तक काम किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कलश के बाहरी हिस्से सुरक्षित हैं, लेकिन भीतर की लोहे की रॉड टूट चुकी है। अब इसकी जगह अधिक टिकाऊ स्टील रॉड लगाने की योजना बनाई जा रही है।
जहांआरा बेगम ने कराया था निर्माण
आगरा की जामा मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट जहांआरा बेगम ने वर्ष 1648 में कराया था। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह मस्जिद अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
ऊंचे चबूतरे पर बनी इस मस्जिद में विशाल प्रांगण, वजू टैंक और आकर्षक गुंबद इसकी विशेष पहचान हैं। यह स्मारक आगरा आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।
पहले भी क्षतिग्रस्त हो चुका है कलश
यह पहली बार नहीं है जब जामा मस्जिद का कलश क्षतिग्रस्त हुआ हो। वर्ष 2018 में आए तेज तूफान के दौरान भी कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। उस समय भी एएसआई ने संरक्षण कार्य कर कलश को दोबारा स्थापित किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक मौसम के प्रभाव और धातु में जंग लगने के कारण संरचनात्मक हिस्सों पर असर पड़ता है, इसलिए समय-समय पर संरक्षण कार्य आवश्यक हो जाता है।
तकनीकी निरीक्षण के बाद होगा अंतिम निर्णय
एएसआई अधिकारियों के अनुसार विभागीय इंजीनियर अब यह तय करेंगे कि पुरानी रॉड को पूरी तरह बदला जाए या आवश्यक हिस्सों की मरम्मत कर नई स्टील रॉड जोड़ी जाए।
संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद कलश को फिर से उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पूरे कार्य में ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखने और संरचना की मजबूती सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।








