जर्मनी सरकार पेंशन व्यवस्था में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत रिटायरमेंट की उम्र 67 से बढ़ाकर 70 साल की जा सकती है, जबकि 45 वर्ष योगदान देने वालों को मिलने वाली अर्ली रिटायरमेंट सुविधा भी समाप्त हो सकती है।
बर्लिन: जर्मनी की सरकार देश की पेंशन व्यवस्था में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत रिटायरमेंट की उम्र मौजूदा 67 साल से बढ़ाकर 70 साल तक की जा सकती है। इसके अलावा 45 साल तक पेंशन फंड में योगदान देने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली अर्ली रिटायरमेंट सुविधा को भी समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है।
जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और श्रम मंत्री बार्बेल बास द्वारा गठित एक विशेष आयोग मंगलवार को अपनी सिफारिशें पेश करेगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि रिटायरमेंट की उम्र को जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जाए, ताकि लोगों की औसत आयु बढ़ने के साथ सेवानिवृत्ति की आयु भी बढ़ाई जा सके।
‘पेंशन एट 63’ योजना समाप्त हो सकती है
आयोग ने उस लोकप्रिय योजना को समाप्त करने की भी सिफारिश की है, जिसे ‘पेंशन एट 63’ के नाम से जाना जाता है। इस योजना के तहत 45 वर्षों तक पेंशन फंड में योगदान देने वाले कर्मचारी बिना किसी कटौती के जल्दी रिटायर हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि मौजूदा आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों में इस योजना को जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।
पेंशन व्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव
जर्मनी इस समय तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी की चुनौती का सामना कर रहा है। देश में जन्म दर लगातार कम हो रही है, जबकि लोगों की औसत आयु बढ़ रही है। इसके कारण काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है और पेंशन पाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में लोग रिटायर होंगे, जिससे पेंशन फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। यदि सुधार नहीं किए गए तो सरकार को या तो कर बढ़ाने पड़ सकते हैं या पेंशन खर्च के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं।
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जुलाई से पहले संसद में आ सकता है प्रस्ताव
रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मन सरकार संसद के जुलाई अवकाश से पहले इस सुधार पैकेज को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रही है। यदि प्रस्ताव को राजनीतिक समर्थन मिल जाता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रिटायरमेंट की उम्र 70 साल तक बढ़ाने की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी। सरकार इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों और विशेषज्ञों से भी चर्चा कर रही है।
प्रस्ताव पर शुरू हुई बहस
रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव ने जर्मनी में नई बहस छेड़ दी है। समर्थकों का कहना है कि पेंशन व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। वहीं आलोचकों का मानना है कि सभी लोगों के लिए 70 वर्ष की आयु तक काम करना संभव नहीं होगा, खासकर शारीरिक श्रम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए।
यूरोप के अन्य देशों पर भी नजर
जर्मनी का यह कदम पूरे यूरोप में चर्चा का विषय बन गया है। कई यूरोपीय देश भी बढ़ती वृद्ध आबादी और पेंशन संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में जर्मनी के फैसले का असर भविष्य में अन्य देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।
जर्मन सरकार का यह प्रस्ताव आने वाले समय में देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की नजर आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।










