अलीगढ़ में थाना प्रभारी निलंबित: एसएसपी के निरीक्षण में कई स्टाफ ड्यूटी से गायब मिले, लापरवाही पर एक्शन

अलीगढ़ में एसएसपी के निरीक्षण के दौरान कई पुलिसकर्मी ड्यूटी से गायब मिले। लापरवाही पर थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
अलीगढ़ में थाना प्रभारी निलंबित: एसएसपी के निरीक्षण में कई स्टाफ ड्यूटी से गायब मिले, लापरवाही पर एक्शन
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अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस महकमे में लापरवाही और ड्यूटी के प्रति उदासीनता को लेकर एसएसपी ने सख्त कार्रवाई की है। थाना स्तर पर ड्यूटी व्यवस्था में खामियां मिलने के बाद थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी के निरीक्षण के दौरान कई पुलिसकर्मी अपनी निर्धारित ड्यूटी से गायब मिले थे। इसके बाद जिम्मेदारी तय करते हुए थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है और अधिकारियों ने अधीनस्थ कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने का संदेश दिया है।

अलीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन लगातार पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली और थानों की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। जिले में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के साथ-साथ थानों में आने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। हाल के दिनों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और कर्तव्यपालन में शिथिलता के मामलों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

एसएसपी के निरीक्षण के दौरान जब थाना परिसर में ड्यूटी व्यवस्था की जांच की गई तो कई कर्मचारी अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों की ड्यूटी, थाने की व्यवस्थाओं और कामकाज की स्थिति को देखा गया। इस दौरान कर्मचारियों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। थाना प्रभारी की जिम्मेदारी होती है कि थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी व्यवस्थित तरीके से लगाई जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कर्मचारी अपनी निर्धारित ड्यूटी का पालन कर रहे हैं। ऐसे में स्टाफ के ड्यूटी से गायब मिलने पर थाना प्रभारी की जवाबदेही तय की गई।

पुलिस विभाग में थाना प्रभारी को थाने की कार्यप्रणाली का प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी माना जाता है। थाने में आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था से संबंधित सूचनाओं पर प्रतिक्रिया, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी व्यवस्था और फरियादियों की सुनवाई जैसी जिम्मेदारियां थाना प्रभारी के स्तर पर होती हैं। इसलिए यदि निरीक्षण के दौरान ड्यूटी व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी थाना प्रभारी तक पहुंचना स्वाभाविक है। इसी आधार पर एसएसपी ने निलंबन की कार्रवाई की।

अलीगढ़ पुलिस में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एसएसपी नीरज कुमार जादौन की ओर से पुलिसकर्मियों को लगातार अनुशासन और जनहित में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी नीरज कुमार जादौन को अलीगढ़ का पुलिस अधीक्षक दर्ज किया गया है।

पुलिस विभाग में अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की गैरमौजूदगी केवल अनुशासन का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली पुलिस सेवा पर पड़ सकता है। थाने में शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों को यदि संबंधित पुलिसकर्मी समय पर नहीं मिलता है तो उनकी समस्या के समाधान में देरी हो सकती है। इसी वजह से थाना स्तर पर ड्यूटी की नियमित निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

अलीगढ़ पुलिस में पिछले कुछ दिनों में भी लापरवाही के मामलों में कार्रवाई हुई है। खैर थाना प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार को एक मामले में शिकायत दर्ज करने में कथित देरी और महिला संबंधी अपराध की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न करने के आरोपों की जांच के बाद निलंबित किया गया था। जांच क्षेत्राधिकारी खैर को सौंपी गई थी और कार्रवाई के साथ विभागीय जांच भी शुरू की गई।

इसी कार्रवाई में डायल-112 में तैनात मुख्य आरक्षी रामपुत्र और आरक्षी उमेश कुमार को भी ड्यूटी के दौरान लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों के चलते निलंबित किया गया था। इससे साफ है कि अलीगढ़ पुलिस नेतृत्व ड्यूटी में लापरवाही के मामलों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

एसएसपी की ओर से की जा रही ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य पुलिसकर्मियों में जवाबदेही बढ़ाना है। थानों पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और सक्रियता कानून-व्यवस्था की पहली कड़ी होती है। किसी घटना की सूचना मिलने पर पुलिस कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है, फरियादी की शिकायत कितनी गंभीरता से सुनी जाती है और अपराध से जुड़ी सूचना पर किस तेजी से कार्रवाई होती है, यह सब थाने के स्तर की कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए अधिकारियों की ओर से समय-समय पर थानों का निरीक्षण किया जाता है।

निरीक्षण के दौरान केवल पुलिसकर्मियों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि अभिलेख, लंबित विवेचनाएं, शिकायतों के निस्तारण की स्थिति, अपराध नियंत्रण और थाने की अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाती है। अलीगढ़ में एसएसपी ने हाल में पुलिसकर्मियों के क्षेत्रों में भी फेरबदल किया है। इसके तहत उपनिरीक्षकों, मुख्य आरक्षियों और आरक्षियों को अलग-अलग स्थानों पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य थानों और कार्यालयों की कार्यप्रणाली में तेजी लाना और जनता की शिकायतों का बेहतर तरीके से निस्तारण करना है।

पुलिस प्रशासन के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि थानों में तैनात कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट रहें। किसी थाना क्षेत्र में अपराध होने या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर सबसे पहले स्थानीय पुलिस की भूमिका सामने आती है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मी ड्यूटी से गायब रहते हैं तो तत्काल पुलिस प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि वरिष्ठ अधिकारी ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेते हैं।

अलीगढ़ में पुलिस की कार्यप्रणाली पर निगरानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू अपराधियों का सत्यापन भी है। हाल ही में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करीब 200 हिस्ट्रीशीटरों के मौजूदा पते और गतिविधियों का सत्यापन नहीं होने का मामला सामने आया था। एसएसपी ने बीट कांस्टेबलों को इनकी तलाश और भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए हैं। अच्छे प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मी को इनाम देने की घोषणा भी की गई है।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अलीगढ़ पुलिस में एक तरफ लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने की कोशिश भी हो रही है। पुलिसिंग में बीट स्तर पर सक्रियता, थाने में कर्मचारियों की उपलब्धता और अधिकारियों की निगरानी को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जाता है। किसी भी स्तर पर कमी मिलने पर उसका असर पूरे थाना क्षेत्र की पुलिसिंग पर पड़ सकता है।

थाना प्रभारी के निलंबन की कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया भी चलेगी। निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जाता, बल्कि यह विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया का हिस्सा होता है। संबंधित अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और निरीक्षण में सामने आई कमियों की विभागीय स्तर पर जांच की जा सकती है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

पुलिस विभाग में निलंबन जैसी कार्रवाई का एक उद्देश्य यह भी होता है कि दूसरे कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश मिले कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। खासकर थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी निर्धारित ड्यूटी के दौरान उपलब्ध रहें और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। जनता से सीधे जुड़े विभाग होने के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली का असर लोगों के भरोसे पर भी पड़ता है।

अलीगढ़ में एसएसपी की ओर से लगातार की जा रही कार्रवाई के बीच पुलिसकर्मियों के लिए अब चुनौती यह है कि वे अपनी ड्यूटी व्यवस्था को और बेहतर करें। थानों में फरियादियों की सुनवाई, लंबित मामलों का निस्तारण, अपराधियों पर निगरानी और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई को प्राथमिकता देना जरूरी है। वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण से थानों की वास्तविक स्थिति सामने आती है और उसी के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाती है।

कुल मिलाकर अलीगढ़ में थाना प्रभारी के निलंबन की कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। एसएसपी के निरीक्षण में कई स्टाफ के ड्यूटी से गायब मिलने के बाद जिम्मेदारी थाना प्रभारी पर तय की गई। इससे जिले के अन्य थानों में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी यह संदेश गया है कि ड्यूटी में किसी तरह की लापरवाही मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले दिनों में निरीक्षण और विभागीय समीक्षा के दौरान यदि इसी तरह की कमियां सामने आती हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।

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