घरेलू चीनी के दाम गिरने से 10 लाख टन आयात पर संकट, महंगी इंपोर्टेड चीनी की बिक्री मुश्किल

घरेलू चीनी की कीमतों में गिरावट से 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात प्रभावित हुआ है। महंगी आयातित चीनी की घरेलू बाजार में बिक्री मुश्किल हो गई है।

घरेलू चीनी की कीमतों में तेज गिरावट से सरकार द्वारा मंजूर 10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात प्रभावित हुआ है। आयातित चीनी की लागत ज्यादा होने से रिफाइनरियों के लिए घरेलू बाजार में बिक्री चुनौती बन गई है।

Business: घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की योजना को मुश्किल में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत कीमतों के कारण आयातित चीनी की लागत घरेलू चीनी से अधिक हो रही है। सरकार ने स्थिति को देखते हुए आयातकों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था के तहत आयात बढ़ाने की कोशिश शुरू की है।

घरेलू कीमतों में गिरावट से आयात का गणित बिगड़ा

सरकार ने देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर किसी भी संभावित कमी से इनकार करते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी थी। हालांकि, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक आई गिरावट ने इस फैसले के बाद आयातकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

घरेलू चीनी के दाम गिरने से 10 लाख टन आयात पर संकट, महंगी इंपोर्टेड चीनी की बिक्री मुश्किल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम मजबूत बने हुए हैं, जबकि भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में एक्स-मिल कीमतें काफी नीचे आ गई हैं। ऐसे में विदेश से खरीदी गई कच्ची चीनी को प्रोसेस करने के बाद घरेलू बाजार में बेचने पर आयातकों और रिफाइनरियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का सामना करना पड़ रहा है।

हाल के हफ्तों में प्रमुख राज्यों में चीनी की एक्स-मिल कीमतें करीब ₹65 प्रति किलोग्राम से घटकर ₹44-₹50 प्रति किलोग्राम के दायरे में आ गई हैं। कीमतों में इस अंतर ने आयातित चीनी के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल कर दिया है।

अब तक सीमित मात्रा में ही पहुंची आयातित चीनी

इंडस्ट्री से जुड़े मीडिया सूत्रों के अनुसार, बंदरगाह आधारित रिफाइनरियों ने करीब 2.6 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, अब तक केवल कुछ हजार टन चीनी ही घरेलू बाजार तक पहुंच पाई है।

एक बड़े चीनी आयातक के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने और घरेलू बाजार में भाव घटने से आयातित चीनी को स्थानीय बाजार की प्रतिस्पर्धी दरों पर बेचना मुश्किल हो गया है।

ऐसे में शुरुआती चरण में आयात की गई और बंदरगाहों तक पहुंच चुकी चीनी के ही बाजार में आने की संभावना है। आयातकों के लिए आगे की खरीद और बिक्री का फैसला घरेलू कीमतों में होने वाले बदलाव पर निर्भर कर सकता है।

सरकार ने बदली आयात की रणनीति

स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोमवार को चीनी आयातकों के साथ बैठक की। सरकार ने आयातकों से आयात बढ़ाने का आग्रह किया है ताकि उपलब्धता से जुड़े लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

सरकार ने पिछले सप्ताह एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत चीनी आयात के आवेदन की समयसीमा बढ़ाने के साथ व्यवस्था में बदलाव किया था। इसे एकमुश्त टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ योजना में बदला गया है।

नई व्यवस्था के तहत बंदरगाह आधारित रिफाइनरियां निर्धारित कोटे के भीतर आयातित कच्ची चीनी को प्रोसेस करने के बाद घरेलू बाजार में भी बेच सकती हैं। पहले ऐसी रिफाइनरियां मुख्य रूप से आयातित कच्ची चीनी को प्रोसेस करके तैयार उत्पाद को एक्सपोर्ट करती थीं।

आयातित चीनी की लागत घरेलू भाव से ज्यादा

इंडस्ट्री से जुड़े एक अन्य आयातक के अनुसार, आयातित कच्ची चीनी को प्रोसेस करने के बाद तैयार सफेद चीनी की लागत ₹55 प्रति किलोग्राम से अधिक बैठ रही है। इसमें लॉजिस्टिक्स लागत शामिल नहीं है।

इसके मुकाबले महाराष्ट्र में एक्स-मिल चीनी की कीमतें करीब ₹45-₹46 प्रति किलोग्राम और उत्तर प्रदेश में ₹48-₹50 प्रति किलोग्राम तक आ गई थीं। इस अंतर के कारण आयातित चीनी को घरेलू बाजार में बेचना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है।

आयातकों का कहना है कि बाहर से आने वाली चीनी की बिक्री तभी आसान होगी, जब घरेलू कीमतें आयात की कुल लागत के आसपास पहुंचेंगी। इसलिए रिफाइनरियां फिलहाल बाजार में कीमतों में सुधार का इंतजार कर सकती हैं।

फैक्ट्री स्तर पर कीमतों में हल्की तेजी

इस बीच सोमवार से फैक्ट्री स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 2-3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत संभावित सरकारी कार्रवाई और दुकानों पर छापेमारी की आशंका ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।

इसका असर बाजार में चीनी की उपलब्धता पर भी दिखाई दिया और कीमतों में मामूली तेजी दर्ज हुई। हालांकि, यह तेजी आयातित चीनी और घरेलू चीनी के बीच लागत के अंतर को खत्म करने के लिए अभी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

10 लाख टन आयात का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि घरेलू चीनी की कीमतें आयातित चीनी की लागत के करीब नहीं पहुंचती हैं, तो सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में आयातक और रिफाइनरियां नई खरीद को लेकर सतर्क रुख अपना सकती हैं। बाजार में कीमतों के अगले रुझान पर नजर रहेगी, क्योंकि घरेलू भाव में सुधार होने पर ही आयातित चीनी की बिक्री और आगे की खरीद में तेजी आने की संभावना है।

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