AMU में 8 साल बाद छात्रसंघ चुनाव के लिए वोटिंग, 20 हजार से अधिक छात्र चुनेंगे अपना प्रतिनिधि; इंतखाब बोले- हर यूनिवर्सिटी में हो चुनाव

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 8 साल बाद छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी इंतखाब ने कहा कि हर यूनिवर्सिटी में चुनाव होना चाहिए।
AMU में 8 साल बाद छात्रसंघ चुनाव के लिए वोटिंग, 20 हजार से अधिक छात्र चुनेंगे अपना प्रतिनिधि; इंतखाब बोले- हर यूनिवर्सिटी में हो चुनाव
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में आठ साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह नौ बजे से छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह दिन खास है। वर्ष 2018 के बाद पहली बार हो रहे इस चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव सहित विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान को लेकर कैंपस में उत्साह का माहौल है और अलग-अलग संकायों में बनाए गए मतदान केंद्रों पर विद्यार्थी पहुंचकर वोट डाल रहे हैं।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मोहम्मद इंतखाब ने छात्रसंघ चुनाव को विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया है। उनका कहना है कि देश के सभी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना जरूरी है, क्योंकि छात्रसंघ के माध्यम से वे अपनी समस्याओं और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। उनके मुताबिक छात्र राजनीति का उद्देश्य केवल पद हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों की आवाज उठाना और कैंपस की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना होना चाहिए।

इस बार AMU छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नौ प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें मोहम्मद जुहैर अहमद, आमिना इरशाद, मोहम्मद इंतखाब, अब्दुल वहीद, मोहम्मद नोमान अशरफ, शरजील इकबाल, साहिल खान, शरजील मोहम्मद खान और असमर फरीदी शामिल हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए सात और सचिव पद के लिए तीन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा कैबिनेट सदस्य और एएमयू कोर्ट सदस्य के पदों के लिए भी उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस चुनाव में 20,742 विद्यार्थी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। मतदान के लिए विश्वविद्यालय की 13 फैकल्टी में केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर अलग-अलग पदों के लिए मतपेटियों की व्यवस्था की गई है। छात्र अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कैबिनेट और एएमयू कोर्ट सदस्य के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं। मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

AMU के साथ वीमेंस कॉलेज छात्रसंघ के लिए भी गुरुवार को मतदान कराया जा रहा है। वीमेंस कॉलेज में 4,080 छात्राएं अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगी। यहां अध्यक्ष पद के लिए छह, उपाध्यक्ष पद के लिए चार और सचिव पद के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। इसके अलावा कैबिनेट सदस्य के पदों पर भी मुकाबला है। दोनों संस्थानों में मतदान के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। इस तरह AMU और वीमेंस कॉलेज को मिलाकर 24,822 छात्र-छात्राएं चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।

मतदान सुबह नौ बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चलने का कार्यक्रम है। इसके बाद शाम सात बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव अधिकारियों की ओर से मतों की गिनती के बाद अलग-अलग पदों के परिणाम घोषित किए जाएंगे। देर रात तक नए छात्रसंघ पदाधिकारियों के नाम सामने आने की उम्मीद है। चुनाव में अध्यक्ष पद पर सबसे अधिक चर्चा है, क्योंकि इस पद के लिए नौ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है।

आठ साल बाद चुनाव होने की वजह से इस बार बड़ी संख्या में मौजूदा विद्यार्थी पहली बार छात्रसंघ चुनाव में वोट डाल रहे हैं। वर्ष 2018 में हुए पिछले चुनाव के समय विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी अब अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। ऐसे में वर्तमान छात्रों के लिए यह पहला अवसर है जब वे सीधे मतदान के जरिए अपनी छात्र यूनियन का गठन करेंगे। नई पीढ़ी के विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं और कैंपस से जुड़ी अपेक्षाएं भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए विद्यार्थियों ने करीब 20 दिनों तक आंदोलन किया था। छात्रों की मांग थी कि विश्वविद्यालय में नियमित रूप से छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और अधिकारों के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि मिल सकें। इस आंदोलन के दौरान एमए के छात्र यासिर फहाद ने 19 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के बीच बातचीत हुई और 5 नवंबर को चुनाव कराने पर सहमति बनी। चुनाव की घोषणा के बाद छात्रों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था।

चुनाव से पहले उम्मीदवारों ने परिसर में प्रचार अभियान चलाया। प्रत्याशियों ने विद्यार्थियों से व्यक्तिगत संपर्क किया और अलग-अलग समूहों में बैठक कर अपने मुद्दे रखे। तीन नवंबर को हुई अंतिम भाषण प्रतियोगिता में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद के उम्मीदवारों ने विद्यार्थियों के सामने अपनी बातें रखीं। भाषणों में छात्रावास की सुविधाओं, पढ़ाई, रिसर्च, कैंपस की समस्याओं, छात्र अधिकारों और प्रशासन से संवाद जैसे मुद्दे शामिल रहे। कुछ उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी अपनी राय रखी।

इस बार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आठ साल के अंतराल के बाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की नई टीम चुनी जाएगी। पिछले चुनाव में वर्ष 2018-19 सत्र के लिए एम सलमान इम्तियाज अध्यक्ष, हमजा सुफियान उपाध्यक्ष और हुजैफा आमिर रशादी मानद सचिव चुने गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय में नियमित चुनाव नहीं हो सके। कोरोना महामारी और परिसर से जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों के बीच छात्रसंघ चुनाव की मांग लगातार उठती रही।

अब मतदान के बाद नई यूनियन के सामने विद्यार्थियों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। छात्रावासों की व्यवस्था, शैक्षणिक सुविधाएं, रिसर्च के अवसर, कैंपस में बेहतर माहौल और विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे मुद्दे नए पदाधिकारियों के लिए अहम रहेंगे। आठ साल बाद हो रहे इस चुनाव के परिणाम से यह भी सामने आएगा कि वर्तमान विद्यार्थी किस तरह के नेतृत्व को अपनी आवाज बनाना चाहते हैं।

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