GST डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज ने छोड़ी सरकारी नौकरी, सियासत में उतरने की तैयारी; सीतापुर की सिधौली सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा

यूपी की GST डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज का VRS मंजूर हो गया है। उनके सपा से जुड़ने और सीतापुर की सिधौली सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हैं।
GST डिप्टी कमिश्नर अनुपमा सरोज ने छोड़ी सरकारी नौकरी, सियासत में उतरने की तैयारी; सीतापुर की सिधौली सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर (GST) के पद पर तैनात रहीं पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। उनका आवेदन शासन की ओर से मंजूर कर लिया गया है। इसके बाद उनके सक्रिय राजनीति में उतरने और समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि वह सीतापुर जिले की आरक्षित सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अनुपमा सरोज को 31 अक्टूबर 2026 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है। उन्होंने 11 जून 2026 को VRS के लिए आवेदन किया था। इसके बाद राज्य कर मुख्यालय ने 17 जुलाई को उनका आवेदन शासन को भेजा। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 28 अक्टूबर को जारी आदेश के जरिए उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी दे दी गई।

अनुपमा सरोज ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने इसे नई शुरुआत और नए संकल्प के साथ शुरू होने वाला सफर बताया। उनके मुताबिक, प्रशासनिक सेवा से सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़ना केवल भूमिका बदलना नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को नए तरीके से निभाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि बदलाव की अपेक्षा करने के बजाय अब उसमें भागीदार बनने का समय है।

अनुपमा ने अपने संदेश में यह भी बताया कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्हें लोगों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करने का अवसर मिला। हालांकि, कई ऐसे मुद्दे होते हैं जिनमें व्यापक बदलाव के लिए नीतिगत स्तर पर फैसले लेने की जरूरत पड़ती है। उन्हें महसूस हुआ कि व्यवस्था के भीतर रहते हुए कुछ मामलों में काम करने की सीमाएं हैं। इसी अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में नई भूमिका तलाशने के लिए प्रेरित किया।

एक मीडिया बातचीत में अनुपमा ने बताया कि सरकारी नौकरी छोड़ने का विचार उनके मन में करीब दस वर्षों से था। उन्होंने कहा कि कई परिस्थितियां एक साथ बनीं, जिसके बाद उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने का निर्णय लिया। उन्होंने महिलाओं, वंचित समुदायों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करने की इच्छा भी जाहिर की है। हालांकि, आगे की राजनीतिक रणनीति और किसी पार्टी से जुड़ने को लेकर उन्होंने अभी अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है।

अनुपमा सरोज का परिवार पहले से ही राजनीति और प्रशासनिक सेवा से जुड़ा रहा है। उनकी मां सुशीला सरोज समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता रही हैं और वर्ष 2004 में लखनऊ की मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। वह मुलायम सिंह यादव सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। उनके पिता राम प्रकाश सरोज पूर्व आईपीएस अधिकारी थे। परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके नौकरी छोड़ने के फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

उनके पति अनुराग भदौरिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। वह पार्टी की ओर से विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर मीडिया में अपनी बात रखते रहे हैं। इसी वजह से अनुपमा के समाजवादी पार्टी से जुड़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चा हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकल है कि उन्हें सीतापुर की सिधौली विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। हालांकि, सपा की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

अनुपमा सरोज केवल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि संगीत की दुनिया में भी अपनी पहचान रखती हैं। वह अनुपमा राग के नाम से भी जानी जाती हैं और गायन के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। संगीत और कला से जुड़े उनके अनुभव का उल्लेख भी उनके सार्वजनिक जीवन में आने के फैसले के साथ किया जा रहा है। उनका मानना है कि संगीत ने उन्हें आम लोगों की भावनाओं, उम्मीदों और संघर्षों को समझने का एक अलग नजरिया दिया है।

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले कुछ अधिकारियों के सरकारी सेवा छोड़कर सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में आने की घटनाओं ने चर्चा बढ़ाई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल भी प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव में उतरने की घोषणा कर चुकी हैं। ऐसे में अनुपमा सरोज का VRS लेना भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

फिलहाल अनुपमा सरोज के सामने सार्वजनिक जीवन में आगे की भूमिका तय करने का विकल्प है। उन्होंने समाज के लिए काम करने की इच्छा जताई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह समाजवादी पार्टी में शामिल होंगी या किसी अन्य तरीके से अपनी नई पारी शुरू करेंगी। सिधौली से चुनाव लड़ने की चर्चा भी अभी अटकलों तक सीमित है। आने वाले दिनों में उनके अगले कदम और राजनीतिक घोषणा पर सबकी नजर रहेगी।

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