अयोध्या में शनिवार को दीपोत्सव के अवसर पर आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। रामनगरी में आयोजित शोभायात्रा में रामायण के सातों कांड पर आधारित 22 आकर्षक झांकियां निकाली गईं। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पूरे शहर में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। कहीं महिलाएं ढोल बजाकर उत्सव की रौनक बढ़ाती नजर आईं तो कहीं राम के स्वरूप में पहुंचे भक्त लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। इस आयोजन को देखने के लिए करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
दीपोत्सव के मुख्य आयोजन से पहले साकेत महाविद्यालय से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद झांकियां रामपथ से होते हुए रामकथा पार्क की ओर बढ़ीं। करीब तीन किलोमीटर लंबे मार्ग पर दोनों तरफ श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। लोगों ने फूल बरसाकर झांकियों का स्वागत किया और अपने मोबाइल फोन में इस भव्य आयोजन के यादगार पलों को कैद किया।
शोभायात्रा में शामिल झांकियों के माध्यम से रामायण के सातों कांड के प्रमुख प्रसंगों को दर्शाया गया। भगवान राम के जन्म से लेकर वनवास, सीता हरण, हनुमान जी की लंका यात्रा, रावण वध और अयोध्या वापसी तक की घटनाओं को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। राम दरबार, राम रथ और पुष्पक विमान की झांकियों ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में रामायण के पात्रों का रूप धारण किया था, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेतायुग के प्रसंग आंखों के सामने जीवंत हो उठे हों।
इस बार की शोभायात्रा में धार्मिक प्रसंगों के साथ अलग-अलग राज्यों की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। करीब 14 राज्यों से आए 500 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। कहीं पारंपरिक लोकनृत्य हुए तो कहीं ढोल-नगाड़ों और अन्य वाद्य यंत्रों की धुन पर कलाकारों ने लोगों को आकर्षित किया। महिलाओं की टोली भी ढोल बजाती और उत्सव में शामिल होती दिखाई दी। उनके साथ मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा में भगवान राम के स्वरूप में पहुंचे एक भक्त को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ जुटी। रामायण के पात्रों की वेशभूषा में सजे कलाकारों ने बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान आकर्षित किया। सड़क किनारे खड़े श्रद्धालु झांकियों को देखकर उत्साहित नजर आए। कई स्थानों पर छतों और घरों से भी लोगों ने पुष्पवर्षा की। पूरी यात्रा के दौरान धार्मिक संगीत और जयकारों से रामनगरी का वातावरण गूंजता रहा।
इस बार दीपोत्सव का आयोजन अपने दसवें संस्करण में पहुंचा है। वर्ष 2017 में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह आयोजन धीरे-धीरे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप में विकसित हुआ है। इस बार अयोध्या के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपक जलाने की तैयारी की गई है। राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के किनारे स्थित घाटों को विशेष रूप से सजाया गया है। शाम को दीप प्रज्ज्वलन के साथ सरयू आरती, लेजर शो और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी मुख्य आकर्षण बनने वाले हैं।
इस बार के दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। रात में 2100 स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से आसमान में रामायण के प्रसंगों को प्रदर्शित करने की योजना है। इसके अलावा 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो के जरिए भगवान राम के जीवन से जुड़े दृश्यों को दिखाया जाएगा। रामकथा पार्क में भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। इन आयोजनों के जरिए श्रद्धालुओं को रामायण की कथा और अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अयोध्या को इस अवसर पर आकर्षक रोशनी और सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया है। प्रमुख चौराहों, मंदिरों और रास्तों पर विशेष लाइटिंग की गई है। जगह-जगह स्वागत द्वार और रामायण से जुड़े प्रसंगों पर आधारित सजावटी संरचनाएं बनाई गई हैं। शहर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से यातायात, पार्किंग और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है।
दीपोत्सव में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं। बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ इस आयोजन को देखने आए हैं। राम मंदिर और सरयू घाटों पर दर्शन-पूजन के लिए भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों और छोटे कारोबारियों को भी इस भीड़ से फायदा मिलने की उम्मीद है।
रामायण की झांकियों से लेकर लोकनृत्य और दीपों की रोशनी तक, अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति की विविधता को भी सामने ला रहा है। पांच लाख के करीब श्रद्धालुओं की मौजूदगी और भव्य शोभायात्रा ने रामनगरी में उत्सव का माहौल बना दिया है। शाम को सरयू तट पर दीप प्रज्ज्वलन और अन्य विशेष कार्यक्रमों के साथ इस आयोजन का मुख्य आकर्षण देखने को मिलेगा।











