इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का हाल ही में पोस्ट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे एआई चैटबॉट ग्रोक ने डीपफेक बताया। इस वीडियो को लेकर अफवाहें फैलीं कि नेतन्याहू ईरानी हमले में मारे जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रधानमंत्री ने खुद एक नया वीडियो पोस्ट कर इन अफवाहों को खारिज किया।
Benjamin Netanyahu Viral Video: इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का एक वीडियो 15 मार्च को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया, जिसमें वे एक कैफे में कॉफी पीते नजर आए। इस वीडियो को ग्रोक चैटबॉट ने डीपफेक बताया, जिससे अफवाहें फैलीं कि नेतन्याहू ईरानी हमले में मारे जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने तुरंत अपने आधिकारिक अकाउंट से नया वीडियो पोस्ट कर इन अफवाहों को खारिज किया, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति का पता चल सके। वीडियो में उनके हाथ और आसपास के लोग भी दिखाई दिए, और यह डिजिटल डबल और एआई तकनीक के इस्तेमाल की चुनौती को उजागर करता है।
नेतन्याहू का डीपफेक वीडियो विवाद
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu हाल ही में एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं, जिसे एआई चैटबॉट ग्रोक ने डीपफेक बताया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और अफवाहें उड़ने लगीं कि नेतन्याहू ईरानी हमले में मारे जा चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेतन्याहू ने अपने आधिकारिक अकाउंट से एक नया वीडियो पोस्ट किया, जिससे वे इस अफवाह को खारिज करना चाहते थे।
ग्रोक चैटबॉट के अनुसार यह वीडियो एआई जनरेटेड है। विश्लेषण में पाया गया कि वीडियो में कॉफी का लेवल समान और लिप-सिंक में मिसमैच जैसी गलतियां हैं, जो इसे असली वीडियो नहीं होने का संकेत देती हैं।
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कैफे वाले वीडियो की असली कहानी
15 मार्च को पोस्ट किए गए वीडियो में नेतन्याहू एक कैफे में खड़े होकर कॉफी पीते नजर आए। वीडियो में उनके हाथ और आसपास मौजूद अन्य लोग भी दिखाई दिए। इस वीडियो को उनके कैफे ने भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था।
ग्रोक चैटबॉट के रिप्लाई में बताया गया कि वीडियो सटायर के तौर पर बनाया गया था और इसे डीपफेक के रूप में पहचानना संभव है। इस तरह के पोस्ट कभी-कभी डिजिटल डबल और एआई तकनीक के कारण वास्तविक और नकली में अंतर करना मुश्किल बना देते हैं।
डीपफेक और सोशल मीडिया की चुनौती
इस घटना ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर डीपफेक कंटेंट की पहचान और सावधानी की आवश्यकता को उजागर किया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कभी-कभी गलत धारणाओं को जन्म दे सकते हैं और नेताओं के बारे में अफवाहें फैल सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल मजाक, सटायर और प्रचार दोनों के लिए किया जा सकता है, लेकिन आम लोगों के लिए सच और फेक में अंतर करना जरूरी है। नेतन्याहू का यह मामला इसी चुनौती को दर्शाता है।








