आरा-बलिया रेल परियोजना के प्रस्तावित रूट को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बड़हरा विधायक ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर मूल एलाइनमेंट के अनुसार परियोजना का निर्माण शुरू करने की मांग की है।
Ara: बिहार की बहुप्रतीक्षित आरा-बलिया रेल परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। परियोजना के संभावित रूट और एलाइनमेंट को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से अलग-अलग मांगें सामने आ रही हैं। इस बीच बड़हरा विधायक ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र भेजकर मूल प्रस्तावित एलाइनमेंट पर ही परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि रूट में बदलाव से लागत बढ़ने के साथ-साथ परियोजना में और देरी हो सकती है।
मूल प्रस्ताव के अनुसार निर्माण की मांग
आरा-बलिया रेल परियोजना को लेकर बड़हरा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी चिंता जताई है। उन्होंने रेल मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि परियोजना का निर्माण उसी एलाइनमेंट पर किया जाना चाहिए, जिसे प्रारंभिक स्वीकृति और सर्वेक्षण के दौरान तय किया गया था।
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विधायक का कहना है कि इस परियोजना की मांग कई दशकों से की जा रही है और लंबे संघर्ष के बाद इसे रेल बजट में शामिल किया गया था। ऐसे में यदि अब इसके रूट में बदलाव किया जाता है तो इससे स्थानीय लोगों की उम्मीदों को झटका लगेगा और परियोजना की प्रगति भी प्रभावित हो सकती है।
रूट को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों की मांग
रेल परियोजना के रूट को लेकर भोजपुर और बक्सर जिलों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। बक्सर क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधि रेल लाइन को रघुनाथपुर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। वहीं भोजपुर क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि परियोजना को जगजीवन हॉल्ट के रास्ते आगे बढ़ाया जाए।
इसी कारण परियोजना के अंतिम एलाइनमेंट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने क्षेत्र के विकास और बेहतर रेल संपर्क का हवाला देते हुए अपनी मांगों को उचित बता रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय रेलवे प्रशासन और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
सर्वे और डीपीआर पर पहले ही हो चुका है खर्च
परियोजना के लिए रेलवे पहले ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), ट्रैफिक सर्वे और अन्य प्रारंभिक तकनीकी अध्ययन करा चुका है। इन प्रक्रियाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। विधायक ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पहले से तैयार रिपोर्ट और सर्वेक्षण को नजरअंदाज कर नया एलाइनमेंट तय करने से समय और संसाधनों दोनों की अतिरिक्त जरूरत पड़ेगी।
सूत्रों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में वैकल्पिक रूट का सर्वे भी किया गया था, लेकिन वहां तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियां सामने आईं। इनमें मिट्टी की गुणवत्ता और निर्माण संबंधी अन्य पहलू भी शामिल बताए जा रहे हैं।
रेलवे के फैसले पर टिकी निगाहें
आरा-बलिया रेल परियोजना को क्षेत्र के विकास और बेहतर यातायात सुविधा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पूरा होने से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस परियोजना के धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल परियोजना के रूट को लेकर बहस जारी है और विभिन्न जनप्रतिनिधि अपनी-अपनी मांगें रेलवे तक पहुंचा रहे हैं। अब सभी की नजर रेलवे मंत्रालय के अगले कदम और अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना किस एलाइनमेंट पर आगे बढ़ेगी और निर्माण कार्य कब शुरू होगा।









