बाड़मेर में करैत सांप के डसने से पति-पत्नी की मौत, बेटे की हालत गंभीर; गांव में दहशत

बाड़मेर में करैत सांप के काटने से पति-पत्नी की मौत हो गई जबकि बेटा अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों के अनुसार 4 घंटे में इलाज न मिलने पर जान बचना मुश्किल है।

बाड़मेर के फागलिया गांव में करैत सांप के काटने से सो रहे पति-पत्नी की मौत हो गई जबकि उनका बेटा गंभीर हालत में भर्ती है। डॉक्टरों ने बताया कि करैत का जहर तेजी से असर करता है और समय पर इलाज जरूरी है।

बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले के सेड़वा थाना क्षेत्र के फागलिया गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां घर के बाहर खाट पर सो रहे एक ही परिवार पर जहरीले करैत सांप ने हमला कर दिया। इस हमले में पति-पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उनका 5 साल का बेटा गंभीर हालत में जोधपुर एम्स में भर्ती है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया है और लोग सांपों को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं।

पति-पत्नी ने अस्पताल में तोड़ा दम, बेटे का इलाज जारी

पीड़ित परिवार में 28 वर्षीय श्रवणराम, उनकी 23 वर्षीय पत्नी लाछी और 5 वर्षीय बेटा विकास शामिल थे। तीनों को सांप ने उस समय काटा जब वे रात में घर के बाहर खाट पर सो रहे थे। परिजनों ने तुरंत उन्हें सेड़वा अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान लाछी की मौत हो गई। बाद में श्रवणराम को सांचौर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी भी मौत हो गई। वहीं मासूम विकास को गंभीर हालत में जोधपुर एम्स रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

करैत सांप का दोबारा उसी स्थान पर लौटना बना चर्चा का विषय

घटना के अगले दिन गांव में एक और चौंकाने वाली स्थिति सामने आई, जब वही करैत सांप दोबारा उसी खाट के पास देखा गया, जहां उसने पहले परिवार को डसा था। ग्रामीणों ने जैसे ही सांप को देखा, उन्होंने उसे घेर लिया और लाठी-डंडों से मार डाला। इस घटना ने गांव में भय और गुस्से दोनों का माहौल पैदा कर दिया।

बाड़मेर में करैत सांप के डसने से पति-पत्नी की मौत, बेटे की हालत गंभीर; गांव में दहशत

ग्रामीणों में आक्रोश और भय का माहौल

सांप के हमले और बाद में उसके दोबारा लौटने की घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोग इस बात से सहमे हुए हैं कि एक ही स्थान पर बार-बार जहरीले सांप का आना बेहद खतरनाक संकेत है। कई ग्रामीणों ने कहा कि इलाके में ऐसे जहरीले सांपों की मौजूदगी बढ़ रही है और इससे ग्रामीण जीवन खतरे में पड़ रहा है।

करैत सांप को बताया गया ‘साइलेंट किलर’

इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार यह सांप करैत प्रजाति का था, जिसे बेहद खतरनाक माना जाता है। सेड़वा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक ने बताया कि करैत के काटने पर अक्सर तुरंत दर्द, सूजन या खून निकलने जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे लोग भ्रम में रहते हैं। लेकिन इसका जहर धीरे-धीरे शरीर के तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और कुछ घंटों में स्थिति गंभीर हो जाती है।

डॉक्टरों के अनुसार अगर समय पर इलाज मिल जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है, लेकिन देरी होने पर स्थिति जानलेवा साबित होती है।

4 घंटे का ‘गोल्डन टाइम’ बना जीवन और मृत्यु की सीमा

चिकित्सकों ने बताया कि करैत सांप के काटने के बाद शुरुआती 4 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर इस समय के भीतर सही इलाज और एंटी-वेनम मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। लेकिन यदि इलाज में देरी हो जाए तो जहर शरीर में फैलकर हार्ट और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर देता है। इस मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां इलाज में देरी के कारण दो लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में सांप काटने की घटनाओं के लिए त्वरित उपचार व्यवस्था और एंटी-वेनम की उपलब्धता जरूरी है। कई लोगों ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों के लिए विशेष मेडिकल यूनिट बनाई जाए ताकि समय पर इलाज मिल सके।

वन्यजीव विशेषज्ञों की राय और सावधानी की जरूरत

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि करैत जैसे सांप अक्सर रात में सक्रिय होते हैं और अंधेरे में खुले में सोने वाले लोगों के लिए अधिक खतरा पैदा करते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ग्रामीण इलाकों में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग किया जाए और घर के आसपास साफ-सफाई रखी जाए ताकि सांपों का खतरा कम हो सके।

गांव में शोक और भय का माहौल

इस दर्दनाक घटना के बाद फागलिया गांव में शोक का माहौल है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत और मासूम बच्चे की गंभीर हालत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। ग्रामीणों ने मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना जताई है और प्रशासन से मदद की मांग की है।

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