भोपाल में मई में 14,974 बार गुल हुई बिजली, हर तीन मिनट में झेलना पड़ा पावर कट

भोपाल में मई 2026 के दौरान 14,974 बार बिजली कटौती दर्ज हुई। डिस्कॉम रिपोर्ट के अनुसार शहर में औसतन हर तीन मिनट में पावर कट से लोग परेशान रहे।

भोपाल में मई 2026 के दौरान 14,974 बार बिजली कटौती दर्ज की गई। डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार शहर में औसतन हर तीन मिनट में पावर कट हुआ, जबकि हजारों मामलों में कटौती पांच मिनट से अधिक समय तक जारी रही।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भीषण गर्मी के बीच मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली कटौती दर्ज की गई, जिससे शहर के हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने मेंटेनेंस और बिजली आपूर्ति व्यवस्था की प्रभावशीलता पर नई बहस छेड़ दी है।

मई में रिकॉर्ड स्तर पर हुई बिजली कटौती

भोपाल में मई 2026 के दौरान बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित होने के मामले सामने आए। बिजली वितरण कंपनी की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार पूरे महीने में कुल 14,974 बार पावर कट दर्ज किए गए। आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो शहर में औसतन हर तीन मिनट में एक बार बिजली गुल हुई।

भोपाल में मई में 14,974 बार गुल हुई बिजली, हर तीन मिनट में झेलना पड़ा पावर कट

गर्मी के मौसम में लगातार हो रही ट्रिपिंग और बिजली कटौती ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी। कई इलाकों में लोगों को दिन और रात दोनों समय बिजली आपूर्ति में बाधा का सामना करना पड़ा।

हजारों मामलों में पांच मिनट से अधिक रही कटौती

रिपोर्ट के मुताबिक कुल बिजली कटौतियों में से 6,896 घटनाएं ऐसी थीं, जिनमें बिजली पांच मिनट से अधिक समय तक बाधित रही। इसका अर्थ है कि शहर के विभिन्न हिस्सों में लगभग हर छह से सात मिनट के अंतराल पर लंबी अवधि की कटौती दर्ज की गई।

हालांकि पिछले वर्ष मई माह में दर्ज बिजली कटौती के आंकड़े इससे अधिक बताए गए थे, लेकिन उस समय मौसम संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियां भी मौजूद थीं। इस वर्ष अपेक्षाकृत सामान्य मौसम के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में ट्रिपिंग दर्ज होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

कुछ इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी

फीडर-वार आंकड़ों के अनुसार शहर के कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या अधिक गंभीर रही। नबी बाग फीडर में सबसे अधिक ट्रिपिंग दर्ज की गई। इसके अलावा मालीखेड़ी, विश्वकर्मा नगर, सीटीओ और आदमपुर क्षेत्रों में भी बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आईं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से घरेलू कार्यों के साथ-साथ व्यवसाय और दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ।

वीआईपी क्षेत्रों में नहीं हुई ट्रिपिंग

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहर के कुछ फीडरों पर पूरे महीने एक भी ट्रिपिंग दर्ज नहीं हुई। इनमें प्रशासनिक और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों को बिजली आपूर्ति करने वाले फीडर भी शामिल बताए गए हैं।

इस स्थिति ने आम उपभोक्ताओं और विशेष क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों ने बिजली वितरण व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता की मांग की है।

क्या है बिजली कंपनी का पक्ष?

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति और हरियाली भी ट्रिपिंग की एक प्रमुख वजह है। उनके अनुसार कई बार पेड़ों की शाखाएं ओवरहेड बिजली लाइनों से टकरा जाती हैं, जिससे सुरक्षा कारणों से बिजली आपूर्ति बाधित करनी पड़ती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रखरखाव, आधुनिक तकनीक और बेहतर वितरण प्रणाली के जरिए ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल बढ़ती बिजली कटौती को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बनी हुई है और लोग बेहतर आपूर्ति व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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