भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को आतंकवादी हमले के जवाब में रद्द कर दिया। पाकिस्तान में सिंधु और सहायक नदियों का पानी कम होने से कृषि प्रभावित हुई। डिप्टी पीएम इशाक डार ने लोगों की जान और आजीविका पर गंभीर असर बताया।
Pakistan: भारत द्वारा सिंधु जल संधि रद्द किए जाने के छह महीने के भीतर पाकिस्तान में स्थिति गंभीर हो गई है। सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी पर नियंत्रण के अभाव में पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र प्रभावित हुए हैं और लोग पानी की कमी और फसल नुकसान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि इस कदम से पाकिस्तान का कृषि चक्र टूट गया है और लोगों का जीवन खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति ऐसे ही रही, तो देश के लोग भूख और प्यास से मरने को मजबूर हो जाएंगे।
इशाक डार का बयान
इशाक डार ने शुक्रवार को बयान देते हुए कहा कि भारत लगातार सिंधु जल संधि को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के इस कदम से पाकिस्तान में लोगों का जीवन सीधे खतरे में है। डार ने कहा, “हमारे लोग भूखों-प्यासों मर जाएंगे। यह केवल पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।”
उन्होंने आगे कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत की एकतरफा कार्रवाई ने पाकिस्तान को बाढ़ और सूखे के प्रति असुरक्षित कर दिया है। सिंधु बेसिन में जल की कमी ने कृषि चक्र को प्रभावित किया है और स्थानीय लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।
भारत ने क्यों रद्द की सिंधु जल संधि
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भारत ने यह कदम पाकिस्तान में आतंकवाद की घटनाओं के जवाब में उठाया। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 भारतीय नागरिकों की हत्या हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती रही है।
भारत ने इसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत 9 आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। इन कार्रवाइयों के बाद सिंधु जल संधि पर अस्थायी रोक का निर्णय लिया गया, जिसे पाकिस्तान ने कड़ा विरोध किया।
पाकिस्तान में हालात भयावह
इशाक डार ने कहा कि पानी की हेराफेरी से पाकिस्तान में भयावह हालात उत्पन्न हो गए हैं। सिंधु बेसिन में जल की कमी के कारण किसानों को फसल नष्ट होने का खतरा है और जल संकट ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन और आजीविका पर गंभीर प्रभाव डाला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत ने इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं की, तो यह युद्ध की स्थिति के समान माना जाएगा।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, सिंधु और उसकी सहायक नदियों के जल स्रोतों में गिरावट ने पाकिस्तान के कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में जल की कमी और सूखे की स्थिति ने स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है।












