भारत के मोबाइल निर्यात पर संकट का खतरा, ईरान युद्ध बढ़ा सकता है नुकसान

ईरान युद्ध के चलते भारत के मोबाइल फोन निर्यात पर संकट। खाड़ी क्षेत्र में व्यापार बाधित, $2-3 अरब का संभावित नुकसान, नए बाजारों की जरूरत।

भारत के मोबाइल फोन निर्यात को ईरान युद्ध से गंभीर खतरा है। वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में $11 अरब (लगभग 1,01,651 करोड़ रुपये) का राजस्व मिलने के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में व्यापार बाधित होने से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $2-3 अरब (लगभग 18,494–27,723 करोड़) का संभावित नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन सबसे प्रभावित उत्पादों में शामिल हैं, और कंपनियों को नए बाजारों पर ध्यान देने की जरूरत है।

Mobile Phone Export Crisis: भारत के मोबाइल फोन निर्यात को ईरान युद्ध के चलते खाड़ी और पश्चिम एशिया के बाजारों में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में $11 अरब का राजस्व कमाने के बावजूद विशेषज्ञों का अनुमान है कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $2-3 अरब का नुकसान हो सकता है। इस संकट का सबसे ज्यादा असर मोबाइल फोन पर पड़ा है, जिससे EMS कंपनियों और निर्यातकों को नए बाजारों में रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

भारत के मोबाइल फोन निर्यात पर संकट

भारत के मोबाइल फोन निर्यात को ईरान युद्ध से गंभीर खतरा मंडरा रहा है। वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में देश ने $11 अरब (लगभग 1,01,651 करोड़ रुपये) का राजस्व कमाया था, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में व्यापार बाधित होने से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $2-3 अरब (लगभग 18,494–27,723 करोड़ रुपये) का संभावित नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन उन टॉप वस्तुओं में शामिल हैं जिन पर इस संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

भारत के मोबाइल निर्यात पर संकट का खतरा, ईरान युद्ध बढ़ा सकता है नुकसान

मोबाइल फोन पर सबसे ज्यादा असर

ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ के विश्लेषकों ने बताया कि इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध की वजह से खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों में मोबाइल फोन निर्यात प्रभावित हुआ है। FY25 में खाड़ी और पश्चिम एशिया को $3.1 बिलियन (लगभग 28,647 करोड़) के मोबाइल फोन निर्यात से कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का 12 फीसदी हिस्सा आता है। EMS कंपनियां इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं, इसलिए मौजूदा और अगले क्वार्टर में उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

कंपनियों के लिए विकल्प और रणनीति

विश्लेषकों ने सुझाया है कि अगर यह टकराव जारी रहा, तो अगले वित्त वर्ष में $3 अरब की कमाई पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इस नुकसान से बचने के लिए, कंपनियां अपने निर्यात को अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान, नीदरलैंड, जर्मनी और मेक्सिको जैसे नए बाजारों में बढ़ा सकती हैं। भारत सरकार के मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगातार बढ़ रहा है और यह देश की तीसरी सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तु बन चुका है।

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