भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र पर वास्तविक बजट लगातार घट रहा है। 2018 में लागू स्वास्थ्य और शिक्षा सेस के बावजूद 2026-27 में स्वास्थ्य पर खर्च जीडीपी का केवल 0.26 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेस का पैसा पारदर्शी तरीके से उपयोग नहीं हो रहा और बीपीएल व ग्रामीण परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतें अभी भी अधूरी हैं।
स्वास्थ्य बजट स्थिति 2026: भारत सरकार का स्वास्थ्य बजट 2026-27 में चिंताजनक रूप से घटकर जीडीपी का केवल 0.26 प्रतिशत रह गया है। 2018 में लागू स्वास्थ्य और शिक्षा सेस के बावजूद वास्तविक खर्च सीमित है और कुल सरकारी खर्च का केवल 30 प्रतिशत ही स्वास्थ्य क्षेत्र तक जाता है। देशभर में बीपीएल और ग्रामीण परिवारों की प्राथमिक स्वास्थ्य जरूरतें अभी भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में पारदर्शिता और बढ़ोतरी की तत्काल आवश्यकता है ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य हासिल किए जा सकें।
स्वास्थ्य खर्च में गिरावट और सेस का असर
सरकार ने 2018 में स्वास्थ्य और शिक्षा सेस लागू किया था ताकि बीपीएल और ग्रामीण परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए अधिक फंड उपलब्ध हो सके। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 2026-27 में स्वास्थ्य सेस का योगदान कुल बजट का लगभग 30 प्रतिशत ही है। यदि सेस न होता, तो स्वास्थ्य पर खर्च जीडीपी का केवल 0.18 प्रतिशत होता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सेस सिर्फ खर्च बढ़ाने का भ्रम पैदा करता है।
सेस का पैसा मुख्य बजट के बाहर रिजर्व फंड में जाता है और इस पर पारदर्शिता या परिणाम मापने की कोई व्यवस्था नहीं है। 2018-19 और 2019-20 में वसूला गया लगभग 20,600 करोड़ रुपये स्वास्थ्य क्षेत्र के सामान्य राजस्व में चला गया और इसका खास इस्तेमाल नहीं हुआ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और वास्तविक स्थिति
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अनुसार 2025 तक स्वास्थ्य पर खर्च को जीडीपी का 2.5 प्रतिशत करना था, जिसमें केंद्रीय सरकार का हिस्सा लगभग 0.9 प्रतिशत होना चाहिए था। वर्तमान में यह केवल 0.26 प्रतिशत है। अगर 2017-18 की तरह कुल बजट का 2.4 प्रतिशत खर्च होता, तो 2026-27 में लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलते। लेकिन वास्तविक खर्च, सेस सहित भी, केवल 1 लाख करोड़ रुपये है।
स्वास्थ्य पर वास्तविक बजट में गिरावट और सेस के उपयोग में पारदर्शिता की कमी सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीपीएल और ग्रामीण परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतें पूरा करने के लिए बजट में तत्काल सुधार की जरूरत है।






