भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स के मानद ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पदभार संभाला

भारतीय सेना प्रमुख General Upendra Dwivedi ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स के मानद ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पदभार ग्रहण किया। यह नियुक्ति दोनों

भारतीय सेना प्रमुख Upendra Dwivedi ने Jammu and Kashmir Rifles और Ladakh Scouts के मानद 'कर्नल ऑफ द रेजिमेंट' का पदभार ग्रहण किया है। इस नियुक्ति के साथ उन्होंने अपनी मूल सैन्य परंपराओं और रेजिमेंटों के साथ जुड़े गौरवशाली संबंधों को और मजबूत किया है।

नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट के मानद ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पदभार औपचारिक रूप से ग्रहण कर लिया है। यह कदम उनकी मूल सैन्य विरासत और उन प्रतिष्ठित रेजिमेंटों के साथ उनके लंबे संबंधों को और मजबूत करता है, जिनसे उनका सैन्य करियर गहराई से जुड़ा रहा है।

एक विशेष सैन्य समारोह के दौरान उन्हें परंपरागत रूप से ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ की बैटन प्रदान की गई। यह सम्मान भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं, नेतृत्व मूल्यों और रेजिमेंटल भावना का प्रतीक माना जाता है।

सेना प्रमुख बनने के बाद छोड़ा था पद

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की कमान संभालने के बाद जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स के ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पद छोड़ दिया था। उस समय उन्होंने सेना प्रमुख के रूप में किसी भी विशेष रेजिमेंट के मानद प्रमुख का पद न रखने का निर्णय लिया था। यह फैसला भारतीय सेना की सर्वोच्च नेतृत्व परंपराओं के अनुरूप माना गया था, क्योंकि सेना प्रमुख पूरे संगठन का नेतृत्व करता है और सभी रेजिमेंटों के प्रति समान उत्तरदायित्व रखता है। अब पुनः यह मानद जिम्मेदारी स्वीकार करना उनके और इन रेजिमेंटों के बीच गहरे ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है।

क्या होता है ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पद?

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स के मानद ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ का पदभार संभाला

भारतीय सेना में ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ एक अत्यंत सम्मानित और मानद पद होता है। यह नियमित सैन्य रैंक ‘कर्नल’ से अलग होता है और आमतौर पर किसी वरिष्ठ अधिकारी को प्रदान किया जाता है, जिसका उस रेजिमेंट के साथ विशेष जुड़ाव रहा हो। इस पद पर नियुक्त अधिकारी रेजिमेंट के संरक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। वे सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के बीच एकता और रेजिमेंटल परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

कई अवसरों पर सेना प्रमुख भी अपनी मूल रेजिमेंट या किसी अन्य प्रतिष्ठित रेजिमेंट के मानद ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ के रूप में सेवा देते हैं, जिससे संगठनात्मक मूल्यों और सैन्य परंपराओं को बल मिलता है।

सैन्य समारोह में प्रदान की गई परंपरागत बैटन

इस अवसर पर आयोजित समारोह में वर्तमान ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ लेफ्टिनेंट जनरल एम. पी. सिंह ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी को मानद बैटन भेंट की। सैन्य परंपराओं में बैटन केवल एक प्रतीकात्मक वस्तु नहीं होती, बल्कि यह नेतृत्व, विश्वास और रेजिमेंट के साथ स्थायी संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। समारोह में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और रेजिमेंट के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस अवसर को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। यह आयोजन भारतीय सेना की उन परंपराओं को भी रेखांकित करता है, जिनमें नेतृत्व और रेजिमेंटल गौरव को विशेष महत्व दिया जाता है।

जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स का गौरवशाली इतिहास

जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित रेजिमेंटों में गिनी जाती हैं। दोनों इकाइयों ने विभिन्न सैन्य अभियानों, सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से लद्दाख स्काउट्स को कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन क्षमता और उच्च हिमालयी इलाकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। वहीं जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने दशकों से देश की सुरक्षा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है और अनेक वीरता पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

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