बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब शिक्षक स्कूल परिसर में अपनी मर्जी से रील नहीं बना सकेंगे और न ही बिना अनुमति वीडियो शूट करके इंस्टाग्राम, फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक करने से पहले सक्षम नियंत्रक पदाधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। हालांकि, विभाग ने कुछ विशेष अवसरों पर वीडियो और रील बनाने की छूट भी दी है। इसके लिए भी पहले से लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी। इस फैसले के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में सोशल मीडिया के व्यक्तिगत इस्तेमाल को लेकर नई व्यवस्था लागू हो गई है।
शिक्षा विभाग की ओर से यह निर्देश 4 नवंबर 2026 को जारी किया गया है। विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडेय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों द्वारा रील बनाने, वीडियो शूट करने और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का प्राथमिक काम बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। लेकिन पिछले कुछ समय से कई शिक्षक विद्यालय परिसर में पढ़ाई के दौरान वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। कुछ मामलों में शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय भी मोबाइल कैमरे से वीडियो रिकॉर्ड करते हैं और बच्चों को भी उसमें शामिल करते हैं। विभाग ने इस प्रवृत्ति पर गंभीर आपत्ति जताई है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है और विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण भी खराब हो सकता है।
विभाग ने विशेष रूप से बच्चों की निजता और उनके मौलिक अधिकारों का मुद्दा उठाया है। स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे नाबालिग होते हैं। ऐसे में उनकी तस्वीरें और वीडियो बिना उचित अनुमति के सोशल मीडिया पर साझा करना उनकी गोपनीयता के लिए खतरा बन सकता है। शिक्षा विभाग के अनुसार बच्चों के साथ रील बनाकर उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करना उनके निजता के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को अपनी व्यक्तिगत सोशल मीडिया गतिविधियों का हिस्सा न बनाएं।
विभाग ने महिला शिक्षकों सहित सभी शिक्षकों को पढ़ाई के दौरान रील बनाने से बचने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि कक्षा में पढ़ाने के समय वीडियो रिकॉर्ड करने से शिक्षक का ध्यान पढ़ाई से हटता है। इससे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। सरकारी स्कूलों को सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का स्थान नहीं बनाया जा सकता। शिक्षक विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने की कोशिश करने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दें।
हालांकि शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर हर परिस्थिति में पूरी तरह रोक नहीं लगाई है। विभाग ने कुछ विशेष अवसरों पर वीडियो बनाने और रील शूट करने की अनुमति देने का प्रावधान रखा है। इसके तहत 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग की जा सकती है। इन कार्यक्रमों में बच्चों की प्रस्तुतियों और विद्यालय की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन इसके लिए संबंधित नियंत्रक पदाधिकारी से पहले लिखित स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
इसके अलावा विद्यालयों में आयोजित सामाजिक और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों की भी रिकॉर्डिंग की जा सकती है। इनमें पौधरोपण अभियान, रक्तदान शिविर, अन्नदान और स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देने और लोगों को जागरूक करने में मददगार हो सकते हैं। लेकिन इनकी रील या वीडियो बनाने के लिए भी शिक्षक और कर्मचारी अपनी ओर से फैसला नहीं ले सकेंगे। उन्हें पहले संबंधित अधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
विभाग ने गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों के औचक निरीक्षण से संबंधित कार्यक्रमों की वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी विद्यालय में कोई वरिष्ठ अधिकारी या गणमान्य व्यक्ति निरीक्षण के लिए पहुंचता है तो उस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग भी पूर्व अनुमति के बाद ही की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालय में होने वाली आधिकारिक गतिविधियों को नियमों के दायरे में रखना है।
शिक्षा विभाग ने बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 और बिहार सरकारी सेवक आचरण संशोधन नियमावली, 2026 का भी हवाला दिया है। इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को अपने पद की गरिमा और सेवा संबंधी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना होता है। सरकारी सेवक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय भी निर्धारित आचरण नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
नए निर्देशों में राजनीतिक, धार्मिक और जाति आधारित प्रचार को लेकर भी सख्ती दिखाई गई है। सरकारी शिक्षक और कर्मचारी सोशल मीडिया के माध्यम से किसी राजनीतिक दल, धार्मिक समूह, जाति या उपजाति के पक्ष में अभियान नहीं चला सकेंगे। विभाग ने ऐसी गतिविधियों को सरकारी सेवक आचरण नियमावली के विपरीत बताया है। सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट करने से भी मना किया गया है जो किसी समुदाय के बीच विवाद या तनाव पैदा कर सकती हैं।
इसके अलावा अश्लील, अभद्र, अपमानजनक, धमकी भरी और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था की बौद्धिक संपदा का उल्लंघन करने वाली सामग्री भी साझा नहीं की जा सकेगी। विभाग ने शिक्षकों को राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ जाने वाली किसी भी सामग्री को सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने की हिदायत दी है। इन निर्देशों का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के ऑनलाइन व्यवहार को भी सेवा नियमों के अनुरूप रखना है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दौरान बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भी शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब शिक्षण कार्य के समय कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। कई बार सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वाले लोग या अन्य बाहरी व्यक्ति स्कूल पहुंचकर वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं। इससे पढ़ाई और विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लोगों को बिना अधिकृत अनुमति स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
इस आदेश के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारियों और क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराना होगा। स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और संबंधित अधिकारियों को भी शिक्षकों तथा कर्मचारियों को नए नियमों की जानकारी देनी होगी। यदि किसी विद्यालय में बिना अनुमति रील बनाने या वीडियो प्रसारित करने का मामला सामने आता है तो संबंधित शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार शिक्षा विभाग का यह फैसला ऐसे समय आया है जब सरकारी स्कूलों में अनुशासन और शिक्षकों के आचरण को लेकर लगातार सख्ती की जा रही है। इससे पहले भी विभाग ने शिक्षकों और कर्मचारियों के पहनावे को लेकर निर्देश जारी किए थे। सरकारी विद्यालयों में जींस और टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक कपड़ों के बजाय औपचारिक परिधान पहनकर आने पर जोर दिया गया था। अब सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर जारी नए निर्देशों से विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल परिसर में शिक्षकों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों और विद्यालय की गरिमा को प्राथमिकता देनी होगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षक समाज और विद्यार्थियों के लिए आदर्श होते हैं। उनका व्यवहार और कार्यशैली बच्चों के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालती है। इसलिए शिक्षकों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। विभाग ने अपने निर्देश में शिक्षक की भूमिका और उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी रेखांकित किया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को यह याद दिलाना है कि उनका मुख्य दायित्व विद्यार्थियों का भविष्य तैयार करना है।
नई गाइडलाइन के बाद सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने से पहले यह देखना होगा कि संबंधित गतिविधि किस उद्देश्य से की जा रही है और उसके लिए विभागीय अनुमति जरूरी है या नहीं। खास अवसरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, पौधरोपण, रक्तदान, अन्नदान और स्वच्छता अभियान की रिकॉर्डिंग की छूट जरूर दी गई है, लेकिन बिना लिखित अनुमति के ऐसा करना नियमों के खिलाफ होगा। वहीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान निजी रील बनाना और बच्चों को उसमें शामिल करना विभाग ने अनुचित माना है।
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चों की निजता और पढ़ाई की सुरक्षा है। शिक्षा विभाग चाहता है कि स्कूल का समय पूरी तरह शिक्षण और विद्यार्थियों के विकास के लिए इस्तेमाल हो। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए कक्षा को वीडियो शूटिंग का मंच बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। अब शिक्षकों को अपनी व्यक्तिगत सोशल मीडिया गतिविधियों और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट अंतर रखना होगा। विभाग ने सभी जिलों को निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकारी स्कूलों में सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी और बढ़ सकती है।








