पुलिस ने बस यात्रियों के मोबाइल चोरी कर UPI के जरिए बैंक खाते से पैसे निकालने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। 27 मोबाइल और ₹2.70 लाख बरामद हुए। District Police ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है।
खम्मम: देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बीच मोबाइल चोरी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बस यात्रियों को निशाना बनाकर मोबाइल चोरी करने और उनके बैंक खातों से UPI के जरिए पैसे निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी और चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह मामला सामने आने के बाद डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
जिले की पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाकर इस गिरोह को पकड़ा है। District Crime Control Station (CCS) और थुंगातुर्थी पुलिस की टीम ने मिलकर यह कार्रवाई की। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और ट्रांजैक्शन डेटा की मदद से आरोपियों का पता लगाया और उन्हें बस स्टैंड के पास एक नियमित जांच के दौरान गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, 2.70 लाख रुपये नकद और अपराध में इस्तेमाल की गई एक कार भी बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को अपना शिकार बना चुका था।
गिरोह का तरीका और अपराध की रणनीति
यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था और खासतौर पर बस में यात्रा करने वाले यात्रियों को निशाना बनाता था। आरोपी यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर उनका मोबाइल चोरी कर लेते थे। इसके बाद वे मोबाइल में मौजूद डिजिटल पेमेंट ऐप्स तक पहुंच बनाकर UPI PIN या अन्य जानकारी का उपयोग करते थे और बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे। चोरी किए गए पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके तुरंत निकाल लिया जाता था ताकि कोई ट्रेस न हो सके। इस तरह यह गिरोह तकनीक का दुरुपयोग करके डिजिटल फ्रॉड को अंजाम दे रहा था।
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मामले की शुरुआत कैसे हुई
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब थुंगातुर्थी मंडल के अन्नाराम गांव के किसान उप्पाला उप्पलैया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि सूरतपेट से बस यात्रा के दौरान उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया था। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उनके फोन से जुड़े बैंक अकाउंट से करीब 1.80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए गए हैं। इस शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी। यह वही मामला था जिसने पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई।
जांच और तकनीकी सुराग
पुलिस ने मामले की जांच में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, UPI ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी लगातार अलग-अलग जगहों पर जाकर इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने उनका रूट ट्रेस किया और अंततः बस स्टैंड के पास वाहन जांच के दौरान उन्हें पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी और उनका नेटवर्क
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी की पहचान पामुला रामु उर्फ एरुकला रामु के रूप में की है, जिसकी उम्र 23 वर्ष है और वह आंध्र प्रदेश के नांदयाल जिले के डोन गांव का रहने वाला है। इसके अलावा उसके दो नाबालिग साथी भी इस गिरोह में शामिल थे, जिन्हें हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम करता था, जिसमें हर सदस्य की अलग भूमिका होती थी। कुछ लोग चोरी करते थे, जबकि अन्य लोग डिजिटल ट्रांजैक्शन और पैसे निकालने का काम संभालते थे।
बरामदगी में मिले अहम सबूत
पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया है, जिसमें 27 चोरी किए गए मोबाइल फोन, 2.70 लाख रुपये नकद और एक कार शामिल है जिसका इस्तेमाल अपराध के दौरान किया जाता था। बरामद मोबाइल फोन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कितने अन्य मामलों से जुड़े हुए हैं। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने कई राज्यों में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया हो सकता है।
पुलिस का बयान और चेतावनी
पुलिस अधीक्षक नरसिम्हा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि यह गिरोह खासतौर पर बस यात्रियों को निशाना बनाता था और मोबाइल चोरी के बाद UPI के जरिए पैसे निकाल लेता था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल और डिजिटल भुगतान ऐप्स को सुरक्षित रखें और किसी भी स्थिति में आसान पासवर्ड या अनुमान लगाने योग्य UPI PIN का उपयोग न करें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मोबाइल चोरी हो जाए तो तुरंत बैंक और संबंधित ऐप्स को सूचित किया जाए ताकि नुकसान से बचा जा सके।
डिजिटल युग में बढ़ता साइबर खतरा
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में अपराध के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब अपराधी केवल भौतिक चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग करके आर्थिक अपराध कर रहे हैं। मोबाइल फोन अब सिर्फ एक डिवाइस नहीं बल्कि बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन का मुख्य साधन बन चुका है, जिससे इसकी सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है।










