चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विश्व AI सम्मेलन में ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समर्थन करते हुए कहा कि AI पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने वैश्विक सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों को तकनीकी सहायता देने की भी बात कही।
Tech: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने China AI Policy को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया के साझा विकास का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने ओपन-सोर्स AI को बढ़ावा देने, तकनीक साझा करने और वैश्विक सहयोग मजबूत करने की वकालत की।
ओपन-सोर्स AI को बताया वैश्विक विकास का आधार
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शंघाई में आयोजित वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्रेंस (WAIC) को संबोधित करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी एक देश या कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार AI का विकास खुली साझेदारी, सहयोग और तकनीक साझा करने की भावना के साथ होना चाहिए, ताकि दुनिया के सभी देशों को इसका समान लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि AI के क्षेत्र में खुलापन और साझा नवाचार भविष्य की तकनीकी प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
अमेरिकी मॉडल से अलग दिखा चीन का रुख
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को अमेरिका की क्लोज्ड-सोर्स AI रणनीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान में OpenAI, Google और Anthropic जैसी कई अमेरिकी कंपनियां अपने प्रमुख AI मॉडल पूरी तरह सार्वजनिक नहीं करती हैं, जबकि चीन लगातार ओपन-सोर्स AI मॉडल विकसित करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। इसी सम्मेलन में चीन की AI कंपनियों ने Kimi K3, GLM 5.2 और अन्य नए मॉडल भी पेश किए, जिन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अहम कदम माना जा रहा है।
WAICO के जरिए बढ़ाएगा वैश्विक सहयोग
सम्मेलन के दौरान चीन ने World AI Cooperation Organization (WAICO) नामक नए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंच की भी घोषणा की। इस पहल में 29 देशों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। चीन का कहना है कि इस मंच का उद्देश्य AI से जुड़े मानकों, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही विकासशील देशों के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 AI प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया है, ताकि वे भी AI विकास की दौड़ में पीछे न रहें।
खुलेपन के दावे पर उठ रहे सवाल
हालांकि चीन खुद को ओपन-सोर्स AI का समर्थक बता रहा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक तकनीकों के मामले में चीन भी कई स्तरों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। ऐसे में एक ओर वह वैश्विक स्तर पर AI सहयोग और तकनीक साझा करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील AI तकनीकों के उपयोग और निर्यात को लेकर कड़े नियम भी तैयार किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन अपने खुले AI मॉडल की नीति को किस स्तर तक व्यवहार में लागू करता है और वैश्विक AI गवर्नेंस में उसकी भूमिका कितनी प्रभावी रहती है।










