जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन से तबाही, 11 की मौत; उत्तराखंड में भी लैंडस्लाइड से यात्रा प्रभावित

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ में बादल फटने व भूस्खलन से 11 लोगों की मौत हुई। उत्तराखंड में भी लैंडस्लाइड से केदारनाथ और कैलाश-मानसरोवर यात्रा प्रभावित हुई।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ में बादल फटने और भूस्खलन से कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि उत्तराखंड में लगातार बारिश से केदारनाथ और कैलाश-मानसरोवर यात्रा प्रभावित हुई। कई राज्यों में भारी बारिश के कारण बाढ़, सड़कें बंद और राहत-बचाव अभियान जारी हैं।

जम्मू कश्मीर: उत्तर भारत में मानसून ने एक बार फिर गंभीर तबाही मचाई है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ जिलों में शनिवार रात बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। कई घर मलबे में दब गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और दर्जनों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रशासन, पुलिस, सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। भारी वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ और मलबे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

पुंछ में मलबे में दबा परिवार, मासूम समेत पांच लोगों की मौत

सबसे दर्दनाक घटना पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में सामने आई, जहां लगातार बारिश के बाद हुए भूस्खलन में एक मकान पूरी तरह मलबे में दब गया। हादसे के समय घर में आठ लोग मौजूद थे। राहत दल ने मलबे से दो साल के मासूम सहित पांच लोगों के शव बरामद किए, जबकि अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चलाया गया।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार भारी बारिश के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई आ रही है।

किश्तवाड़ में बादल फटने से खेत और घर तबाह

किश्तवाड़ जिले के सुर्नू क्षेत्र में बादल फटने के बाद तेज बहाव ने खेतों, मकानों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं।

राजौरी जिले में भी भारी बारिश के कारण धारहाल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। तेज बहाव में लगभग 200 से 250 वाहन बह जाने की खबर है। कई पुलों और संपर्क मार्गों पर यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

उत्तराखंड में भूस्खलन से धार्मिक यात्राएं प्रभावित

लगातार बारिश का असर उत्तराखंड में भी देखने को मिला। पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग समेत कई पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। सुरक्षा कारणों से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकला चौथा जत्था भी धारचूला बेस कैंप में रोक दिया गया, क्योंकि गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन से सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। प्रशासन लगातार मार्ग साफ करने का प्रयास कर रहा है।

अमरनाथ यात्रा भी अस्थायी रूप से रोकी गई

जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए अमरनाथ यात्रा भी एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से रोक दी गई। इसके चलते विभिन्न मार्गों पर हजारों श्रद्धालु फंस गए और कई स्थानों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम में सुधार और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी। श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

पूर्वोत्तर भारत में भी बाढ़ का संकट

अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का संकट गहराता जा रहा है। राज्य के 26 जिले प्रभावित हुए हैं और लगभग डेढ़ लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और राहत सामग्री हेलीकॉप्टर तथा विशेष वाहनों के जरिए पहुंचाई जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन से तबाही, 11 की मौत; उत्तराखंड में भी लैंडस्लाइड से यात्रा प्रभावित

नगालैंड के मोन जिले में भी भूस्खलन के कारण कई घर मलबे में दब गए। राहत और बचाव अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ NDRF और असम राइफल्स की टीमें लगी हुई हैं।

देश के कई राज्यों में भारी बारिश का असर

उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में भी भारी बारिश दर्ज की गई। प्रयागराज में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई घाट जलमग्न हो गए। गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है, जबकि देहरादून, ऋषिकेश और बेंगलुरु में भी तेज बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है तथा लोगों को नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

बादल फटना क्या होता है?

बादल फटना एक मौसम संबंधी घटना है, जिसमें बहुत छोटे क्षेत्र में बेहद कम समय के भीतर अत्यधिक वर्षा होती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार यदि लगभग 20 से 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो, तो उसे बादल फटना कहा जाता है।

हिमालयी क्षेत्रों में यह घटना अधिक देखने को मिलती है क्योंकि नमी से भरी हवाएं ऊंचे पहाड़ों से टकराकर तेजी से ऊपर उठती हैं और अचानक अत्यधिक वर्षा का कारण बनती हैं। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में इस प्रकार की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और नालों के आसपास जाने से बचें, अनावश्यक यात्रा न करें तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य लगातार जारी है और स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।

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