CJI Surya Kant ने कहा- "भारत में मीडिएशन बन रहा है न्यायिक सुधार का अहम स्तंभ

CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत में मीडिएशन न्यायिक सुधार का अहम स्तंभ बनता जा रहा है। जानें उनके बयान का महत्व और न्याय व्यवस्था में मीडिएशन की बढ़ती भूमिका।

Surya Kant ने लंदन में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने मध्यस्थता (mediation) को केवल एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत और प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित किया है।

नई दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश Surya Kant ने लंदन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में कहा कि मीडिएशन (मध्यस्थता) अब भारतीय न्याय व्यवस्था में केवल एक वैकल्पिक विवाद समाधान तरीका नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक प्रभावी और संस्थागत समाधान मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अदालतें और न्यायिक संस्थाएं अब मीडिएशन को न्याय वितरण प्रणाली का एक मजबूत हिस्सा बना रही हैं, जिससे न केवल मामलों का बोझ कम हो रहा है, बल्कि लोगों को तेज और कम खर्चीला न्याय भी मिल रहा है।

“मीडिएशन अब भारत में व्यापक रूप से स्वीकार्य”

लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित “प्रौद्योगिकी और मध्यस्थता का भविष्य” विषय पर चर्चा के दौरान Surya Kant ने कहा कि भारत में मीडिएशन को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अब देश के हर शहर और क्षेत्र में लोग इस प्रक्रिया को समझने और अपनाने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC) द्वारा प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है, जो मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

CJI ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में मीडिएशन की यात्रा को दो चरणों में समझा जा सकता है—मीडिएशन अधिनियम 2023 से पहले और उसके बाद।उन्होंने कहा कि 2023 में लागू हुआ मीडिएशन कानून इस बात का परिणाम है कि वर्षों से न्यायपालिका इस प्रक्रिया को बढ़ावा देती रही है। अदालतों में पहले से ही मीडिएशन सेंटर स्थापित किए गए थे, जो लोगों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने के लिए प्रेरित करते थे।

Surya Kant ने यह भी याद दिलाया कि जब वह 2004 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे, तब भी निचली अदालतों से लेकर उच्चतम न्यायालय तक मीडिएशन केंद्रों की शुरुआत हो चुकी थी।

CJI Surya Kant ने कहा- "भारत में मीडिएशन बन रहा है न्यायिक सुधार का अहम स्तंभ

“कम खर्चीला, तेज और रिश्ते बनाए रखने वाला समाधान”

CJI ने मीडिएशन की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और प्रभावशीलता को बताया। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया पारंपरिक मुकदमेबाजी की तुलना में अधिक तेज, कम खर्चीली और संबंधों को बनाए रखने में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए यह एक बेहद उपयोगी माध्यम है, क्योंकि इसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकाला जाता है।

कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या मीडिएशन को आर्बिट्रेशन (पंचाट) से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए, तो Surya Kant ने स्पष्ट किया कि दोनों प्रणालियों की अपनी-अपनी भूमिका है। उन्होंने कहा कि वे आर्बिट्रेशन को हतोत्साहित नहीं करते, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय और वाणिज्यिक विवादों में इसकी अहम भूमिका है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, पक्षकारों को पहले मीडिएशन का रास्ता अपनाना चाहिए।

“आर्बिट्रेशन आगे मुकदमेबाजी का कारण बन सकता है”

CJI ने दोनों प्रक्रियाओं के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि आर्बिट्रेशन में कई बार निर्णय के बाद भी आगे कानूनी लड़ाई जारी रहती है, जबकि मीडिएशन में यदि समाधान हो जाए तो विवाद पूरी तरह समाप्त हो जाता है। उनके अनुसार, यही मीडिएशन की सबसे बड़ी ताकत है—यह अंतिम समाधान प्रदान करता है, न कि नए विवादों की शुरुआत।

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