CSMCL में 115 करोड़ का कथित ओवरटाइम घोटाला: कागजों में एक्स्ट्रा शिफ्ट, कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा पैसा

छत्तीसगढ़ CSMCL में 115 करोड़ के ओवरटाइम घोटाले का खुलासा। कागजों में एक्स्ट्रा शिफ्ट दिखाकर पैसा हड़पा गया। ACB-EOW ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जांच जारी।

छत्तीसगढ़ के CSMCL में 115 करोड़ के ओवरटाइम घोटाले का खुलासा हुआ है। कागजों में एक्स्ट्रा शिफ्ट दिखाकर कर्मचारियों का पैसा हड़पा गया। ACB-EOW ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़ी सरकारी एजेंसी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) एक बार फिर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB-EOW ने 115 करोड़ रुपए के कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर कागजों में अतिरिक्त शिफ्ट दिखाकर करोड़ों रुपए निकाले गए, लेकिन यह रकम असल कर्मचारियों तक पहुंची ही नहीं।

मैनपावर एजेंसी के अधिकारी गिरफ्तार

इस मामले में मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनी ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के फील्ड ऑफिसर अभिषेक कुमार सिंह और अकाउंटेंट तिजऊ राम निर्मलकर को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को विशेष अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है, ताकि पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों की भूमिका कंपनी के बैंक खातों से नकदी निकालकर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में अहम थी।

ED की कार्रवाई से खुला मामला

इस पूरे घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 नवंबर 2023 को रायपुर में छापेमारी के दौरान 28.80 लाख रुपए नकद बरामद किए।

शुरुआती जांच में यह रकम संदिग्ध पाई गई। जब एजेंसियों ने इसकी कड़ियां जोड़ीं, तो सामने आया कि यह पैसा कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान से जुड़ा हुआ था, जिसे कथित तौर पर हड़प लिया गया था।

ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB-EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं (IPC 420 और 120-बी) के तहत मामला दर्ज किया।

2019 से 2024 के बीच हुआ घोटाला

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच CSMCL के तहत संचालित शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सरकार ने ओवरटाइम भुगतान के रूप में करीब 115 करोड़ रुपए मंजूर किए थे।

नियमों के अनुसार, यह राशि सीधे उन कर्मचारियों को दी जानी थी, जिन्होंने अतिरिक्त शिफ्ट में काम किया था। लेकिन आरोप है कि मैनपावर एजेंसियों ने फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर कागजों में ओवरटाइम दिखाया और भुगतान की राशि निकाल ली।

असल में काम करने वाले कर्मचारियों को इस पैसे का कोई लाभ नहीं मिला, जबकि रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बांट दिया गया।

पेपरवर्क’ में गड़बड़ी से बना फर्जी सिस्टम

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र तैयार किया गया था। शराब दुकानों में कर्मचारियों की अतिरिक्त ड्यूटी को रिकॉर्ड करने के लिए बनाए गए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।

फर्जी उपस्थिति, ओवरटाइम के रिकॉर्ड और भुगतान के कागजात तैयार किए गए, जिससे यह दिखाया जा सके कि कर्मचारियों ने अतिरिक्त काम किया है। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक से भुगतान जारी किया गया, लेकिन वास्तविक लाभार्थियों तक राशि नहीं पहुंचाई गई।

यह पूरा मामला दर्शाता है कि कैसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में खामियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की जा सकती हैं।

CSMCL में 115 करोड़ का कथित ओवरटाइम घोटाला: कागजों में एक्स्ट्रा शिफ्ट, कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा पैसा

बड़े नामों के जुड़ने की संभावना

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और कारोबारियों से भी जुड़े हो सकते हैं। प्रारंभिक जांच में एक कारोबारी के नाम का भी जिक्र सामने आया है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

ACB-EOW अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि पूछताछ के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिनमें वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों के नाम सामने आ सकते हैं।

कर्मचारियों के अधिकारों पर सवाल

यह मामला केवल वित्तीय घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के अधिकारों और उनकी मेहनत की कमाई से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

जिन कर्मचारियों ने वास्तव में अतिरिक्त काम किया, उन्हें उनका हक नहीं मिला। इससे न केवल उनके आर्थिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पारदर्शी भुगतान प्रणाली और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करना आवश्यक है।

प्रशासन के लिए चुनौती

इस घोटाले ने राज्य प्रशासन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक ओर जहां दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम में सुधार भी आवश्यक है।

सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों को उनका भुगतान सीधे और पारदर्शी तरीके से मिले। साथ ही, मैनपावर एजेंसियों की निगरानी को भी सख्त बनाना होगा।

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