दरभंगा जिले में शराबबंदी कानून के तहत कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम को उस समय विरोध और हमले का सामना करना पड़ा, जब कथित तौर पर शराब कारोबारी को छुड़ाने की कोशिश की गई। रैयाम थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के कई थानों से पुलिस बल बुलाना पड़ा। हालात बिगड़ने पर जिले से भी अतिरिक्त फोर्स भेजी गई। पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे लोगों के हमले में रैयाम थाना की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किए जाने की बात सामने आई है। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थिति को संभालने के लिए एक-दो थानों की पुलिस ही नहीं, बल्कि करीब सात थानों की पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। इसके अलावा जिला स्तर से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस समय पैदा हुई, जब शराब कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति को छुड़ाने के लिए भीड़ या उसके समर्थकों की ओर से पुलिस कार्रवाई का विरोध किया गया। इसी दौरान पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई।
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और पुलिस तथा मद्यनिषेध विभाग की टीमें लगातार अवैध शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के खिलाफ अभियान चला रही हैं। दरभंगा जिले में भी हाल के दिनों में अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है। 5 सितंबर की एक कार्रवाई में मद्यनिषेध विभाग ने फेकला थाना क्षेत्र के अंदामा में करीब 553 लीटर विदेशी शराब बरामद की थी, जिसकी कीमत लगभग 6.50 लाख रुपये बताई गई थी। इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ फरार मामला दर्ज किया गया था।
इसी तरह जिले के जाले थाना क्षेत्र में भी सितंबर की शुरुआत में पुलिस ने शराब लदी पिकअप को जब्त किया था। पुलिस के अनुसार वाहन से 1683 बोतल नेपाली शराब बरामद हुई थी और चालक मौके से फरार हो गया था। इस तरह की लगातार कार्रवाई से साफ है कि दरभंगा में अवैध शराब के कारोबार पर पुलिस और मद्यनिषेध विभाग की निगरानी लगातार बनी हुई है।
रैयाम की ताजा घटना इसी अभियान के दौरान पुलिस के सामने आई चुनौती को दिखाती है। शराब कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई के बाद उसे छुड़ाने की कोशिश और पुलिस टीम पर हमला कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला माना जा रहा है। पुलिस की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाना भी सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने के तौर पर देखा जा सकता है। मामले में पुलिस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
घटना के बाद सबसे पहले आसपास के थानों को सूचना दी गई। स्थिति को देखते हुए कई थानों से पुलिस बल रैयाम क्षेत्र में भेजा गया। करीब सात थानों की पुलिस के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। इसके साथ ही जिला मुख्यालय से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया। बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी का उद्देश्य स्थिति को नियंत्रण में रखना और दोबारा किसी तरह की हिंसा या उपद्रव की स्थिति पैदा नहीं होने देना था।
दरभंगा जिले में कुल 37 पुलिस थाने और ओपी हैं, जिनमें रैयाम थाना भी शामिल है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिले के पुलिस थानों की सूची में रैयाम थाना दर्ज है। ऐसे में किसी स्थानीय थाने की कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत पड़ने पर आसपास के थानों से जवानों को मौके पर भेजना पुलिस की सामान्य व्यवस्था का हिस्सा है।
इस घटना ने शराबबंदी कानून को लागू कराने के दौरान पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने ला दिया है। अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बार स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति पैदा हो जाती है। पुलिस को एक तरफ आरोपित को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ानी होती है, वहीं दूसरी तरफ भीड़ को नियंत्रित करने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।
रैयाम थाना क्षेत्र में पुलिस वाहनों को क्षति पहुंचने की घटना के बाद अब पुलिस इस बात की भी जांच कर सकती है कि हमले में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। यदि सरकारी वाहनों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है तो ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों की पहचान के लिए प्रत्यक्षदर्शियों, उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद ले सकती है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही आरोपितों की संख्या और उन पर लगी धाराओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ना भी महत्वपूर्ण है। किसी शराब कारोबारी को छुड़ाने के लिए पुलिस टीम पर हमला जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी जा सकती है। पुलिस यह भी देखेगी कि घटना के पीछे केवल तत्काल विरोध था या इसके पीछे संगठित तरीके से पुलिस कार्रवाई को रोकने की कोशिश की गई थी।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद पुलिस और मद्यनिषेध विभाग की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। शराब की तस्करी रोकने के लिए सड़क मार्ग, ग्रामीण इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाए जाते हैं। दरभंगा में भी हाल के दिनों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई है। सितंबर की शुरुआत में फेकला क्षेत्र से बरामद शराब और जाले में पकड़ी गई नेपाली शराब की खेप इसी अभियान का हिस्सा थीं।
रैयाम क्षेत्र की घटना में पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई केवल शराब जब्त करने तक सीमित नहीं है। पुलिस को कई बार स्थानीय स्तर पर विरोध और दबाव का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पुलिस टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी हो जाता है।
घटना के बाद पुलिस की प्राथमिकता यह होगी कि शराब कारोबारी को कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में रखा जाए और पुलिस पर हमला करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त वाहनों का भी आकलन किया जाएगा। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में नुकसान की भरपाई और कानूनी कार्रवाई दोनों की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पुलिस कार्रवाई को रोकने के लिए यदि भीड़ हिंसक होती है तो इससे इलाके के आम लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कोशिश रहती है कि किसी विवाद को समय रहते नियंत्रित किया जाए, ताकि स्थिति बड़े संघर्ष में न बदले। रैयाम में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाओं के बाद अफवाहों का दौर भी शुरू हो सकता है। इसलिए पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। आरोपितों की पहचान, गिरफ्तारी, पुलिसकर्मियों को लगी चोट, वाहनों को हुए नुकसान और मामले में दर्ज धाराओं जैसी जानकारी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इतना सामने आया है कि शराब कारोबारी को छुड़ाने के प्रयास के दौरान पुलिस टीम को विरोध और हमले का सामना करना पड़ा तथा रैयाम थाना की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
दरभंगा में अवैध शराब के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। हाल की कार्रवाई से भी यह संकेत मिलता है कि पुलिस और मद्यनिषेध विभाग शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। ऐसे में रैयाम की घटना के बाद पुलिस और अधिक सतर्कता के साथ कार्रवाई कर सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां अवैध शराब कारोबार की शिकायतें मिलती रही हैं।
कुल मिलाकर रैयाम थाना क्षेत्र में शराब कारोबारी को छुड़ाने के लिए पुलिस पर हमला और थाना की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सात थानों की पुलिस के साथ जिला स्तर से भी फोर्स बुलानी पड़ी। अब पुलिस के सामने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की चुनौती है। साथ ही यह मामला बिहार में शराबबंदी कानून को लागू कराने के दौरान पुलिस के सामने आने वाले जमीनी विरोध की एक और गंभीर तस्वीर के रूप में सामने आया है।









