दिल्ली SIR पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, बेला एस्टेट में 727 वोटर नाम हटने का दावा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR के बाद 728 निवासियों में से 727 के नाम वोटर लिस्ट से हटने का दावा किया। उन्होंने SDM से सवाल किए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR के बाद 728 निवासियों में से 727 के नाम वोटर लिस्ट से हटने का दावा किया। उन्होंने SDM से सवाल किए। चुनाव आयोग के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को जारी होगी।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली के यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती का दौरा किया। उन्होंने यहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि बस्ती में रहने वाले 728 लोगों में से SIR के बाद केवल एक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में रह गया, जबकि 727 नाम सूची से हट गए।

राहुल गांधी ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह स्थानीय लोगों से बातचीत करते और एक SDM से फोन पर बात करते दिखाई देते हैं। उनके मुताबिक, बस्ती के कई निवासी लंबे समय से वहां रह रहे हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान किया था।

बेला एस्टेट में 728 में से 727 नाम हटने का दावा

राहुल गांधी के अनुसार, बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं और SIR के बाद मतदाता सूची में केवल एक नाम दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोग इलाके में मौजूद हैं और पहले चुनावों में मतदान कर चुके हैं, तो इतने बड़े पैमाने पर नाम सूची से बाहर कैसे हो गए।

उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में बस्ती के घरों को तोड़ा गया था, लेकिन वहां रहने वाले लोग क्षेत्र छोड़कर नहीं गए। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में इसी आधार पर मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल किया।

इन दावों को फिलहाल राहुल गांधी के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी मतदाता का ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अपने आप में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार समाप्त होने के बराबर नहीं है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का अर्थ स्वतः नाम हट जाना नहीं है और पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।

SDM से फोन पर हुई बातचीत

बस्ती में लोगों के बीच बैठकर राहुल गांधी ने संबंधित SDM को फोन किया। बातचीत के दौरान उन्होंने अधिकारियों से यह सवाल किया कि आवास की स्थिति और मतदाता के अधिकार के बीच क्या संबंध है।

राहुल गांधी ने ‘हाउस नंबर 0’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार बेघर लोगों के लिए इस तरह की व्यवस्था मौजूद है और इसलिए केवल मकान या नियमित आवास की स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए।

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने अधिकारी से उनका नाम और पद बताने को भी कहा। उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो में इस बातचीत का एक हिस्सा रिकॉर्ड हुआ है।

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47 लाख से अधिक नाम कम

दिल्ली में SIR के तहत 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पिछली सूची की तुलना में करीब 47.5 लाख नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हुए। करीब 97 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में मौजूद हैं। इसके अलावा लगभग 33.1 लाख मतदाताओं को उनकी पात्रता या रिकॉर्ड से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं।

इन आंकड़ों को अंतिम मतदाता सूची का आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि SIR की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं या जिन्हें नोटिस मिला है, उन्हें दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि नोटिस जारी होना अपने आप में मतदाता का नाम अंतिम रूप से हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। पात्र मतदाताओं को दस्तावेज और अन्य आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।

दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ी

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। चुनाव आयोग ने समय-सीमा में एक महीने की वृद्धि की है।

नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई गई है। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

यह बदलाव उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय देता है जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं या जिनके रिकॉर्ड को लेकर चुनाव अधिकारियों ने स्पष्टीकरण मांगा है।

नोटिस मिलने पर घर जाकर दस्तावेज जुटाए जाएंगे

दिल्ली में चुनाव अधिकारियों ने SIR के दौरान एक और प्रक्रिया शुरू की है। जिन मतदाताओं को रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं, उनके घर जाकर बूथ-लेवल अधिकारी दस्तावेज एकत्र करेंगे।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता की पात्रता और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी का सत्यापन करना है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान करना है।

नाम छूटने पर दोबारा जुड़ने का रास्ता मौजूद

चुनाव आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के अनुसार, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने वाले पात्र मतदाता Form-6 के जरिए नाम शामिल करने का दावा कर सकते हैं। मतदाता अपना नाम EPIC नंबर, नाम या मोबाइल नंबर के माध्यम से भी खोज सकते हैं।

युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिक भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

SIR का दायरा देश के कई राज्यों तक

SIR केवल दिल्ली तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। चुनाव आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है।

आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों का सत्यापन और उनका अद्यतन करना है। देश में 2024 के आम चुनाव से पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 96.88 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे।

वर्तमान SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को अपना दावा प्रस्तुत करने और आवश्यक दस्तावेज देने का अवसर दिया जा रहा है। इस विवाद के बीच अंतिम सूचियों और दावे-आपत्ति प्रक्रिया के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।

4 दिसंबर को स्पष्ट होगी दिल्ली की अंतिम स्थिति

बेला एस्टेट का मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है। राहुल गांधी ने 727 नाम हटने के दावे के जरिए चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट सूची को अंतिम सूची नहीं माना है और दावे तथा आपत्तियों के लिए समय बढ़ाया है।

अब 30 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं और 30 नवंबर तक उनके निपटारे की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसलिए बेला एस्टेट समेत दिल्ली के उन मतदाताओं की स्थिति भी अंतिम सूची में स्पष्ट होगी, जिनके नाम मौजूदा ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं।

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