Diamond Price: 20 साल के निचले स्तर पर हीरों के दाम, फिर भी क्यों महंगी है ज्वेलरी?

Diamond Price: प्राकृतिक हीरों के दाम 20 साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और 2021 के शिखर से 30-40% तक गिरे हैं। फिर भी ज्वेलरी की कीमत कम क्यों नहीं हुई?

हीरों की कीमतों में इतनी गिरावट आ चुकी है कि अब डायमंड रिंग और नेकलेस खरीदना पहले के मुकाबले बजट में नजर आ सकता है। हालांकि, जब ग्राहक ज्वेलरी स्टोर पर पहुंचते हैं तो बिल देखकर तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है।

बिजनेस न्यूज़: हीरों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। प्राकृतिक हीरों की थोक कीमतें 2021 के उच्च स्तर से करीब 30 से 40 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी हैं। इसके बावजूद अगर कोई ग्राहक डायमंड रिंग, नेकलेस या दूसरी ज्वेलरी खरीदने बाजार पहुंचता है, तो उसे बिल में कीमतों में उतनी बड़ी गिरावट नजर नहीं आती। इसकी वजह यह है कि डायमंड ज्वेलरी की अंतिम कीमत सिर्फ हीरे के दाम से तय नहीं होती। इसमें सोना या प्लैटिनम, डिजाइन, मेकिंग चार्ज, रिटेल मार्जिन और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं।

हीरों की कीमतों में कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। वैश्विक स्तर पर मांग में नरमी, इन्वेंट्री का बढ़ना और लैब-ग्रोन डायमंड की बढ़ती उपलब्धता ने प्राकृतिक हीरों की कीमतों पर दबाव बनाया है। ऐसे माहौल में कच्चे और पॉलिश किए गए हीरों के बाजार में कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है।

हीरों की कीमत में कितनी आई गिरावट?

हीरा उद्योग की प्रमुख कंपनियों के आंकड़े भी बाजार में जारी दबाव की तस्वीर दिखाते हैं। 2026 की शुरुआत में डी बीयर्स की औसत रफ डायमंड बिक्री कीमत सालाना आधार पर करीब 32 प्रतिशत घटकर लगभग 105 डॉलर प्रति कैरेट रह गई। कंपनी का औसत रफ डायमंड प्राइस इंडेक्स भी करीब 16 प्रतिशत नीचे आया।

यह गिरावट बताती है कि प्राकृतिक हीरों के कच्चे बाजार में कीमतों पर दबाव काफी बढ़ा है। हालांकि, इसका सीधा असर ग्राहक को मिलने वाली तैयार ज्वेलरी की कीमत पर उसी अनुपात में दिखाई देना जरूरी नहीं है।

फिर डायमंड ज्वेलरी सस्ती क्यों नहीं हुई?

डायमंड रिंग या नेकलेस की कीमत को समझने के लिए पूरे बिल को देखना जरूरी है। ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले हीरे के अलावा सोना या प्लैटिनम, डिजाइन, मेकिंग चार्ज, सेटिंग, ब्रांड और रिटेल से जुड़े खर्च भी कीमत का हिस्सा होते हैं। भारत में सोने की ऊंची कीमत इस अंतर को और बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में सोने की कीमत सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,58,854 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई थी। 

सितंबर में कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई, लेकिन सोने की ऊंची कीमतों का असर ज्वेलरी के कुल बिल पर बना हुआ है। इसलिए अगर ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले डायमंड की कीमत कम भी हो जाए, तो पूरी ज्वेलरी की कीमत उसी अनुपात में कम होना जरूरी नहीं है।

हर डायमंड की कीमत में नहीं आई समान गिरावट

डायमंड मार्केट में कीमतों का ट्रेंड सभी तरह के पत्थरों के लिए एक जैसा नहीं है। हीरे की कीमत उसके कट, कलर, क्लैरिटी और कैरेट जैसे मानकों पर निर्भर करती है। बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों की मांग छोटे और कम गुणवत्ता वाले हीरों की तुलना में अलग रह सकती है। इसलिए बाजार में औसत कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि हर ग्रेड और आकार के हीरे की कीमत समान प्रतिशत से कम हुई है। ग्राहक को मिलने वाला वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार और किस ग्रेड का डायमंड खरीद रहा है।

Lab-Grown Diamond ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

लैब-ग्रोन डायमंड ने भी प्राकृतिक हीरों के बाजार को प्रभावित किया है। तकनीक के जरिए तैयार किए जाने वाले इन हीरों ने खास तौर पर छोटे और अपेक्षाकृत कम कीमत वाले प्राकृतिक हीरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाई है। इससे उपभोक्ताओं के सामने विकल्प बढ़े हैं और प्राकृतिक हीरों के कुछ सेगमेंट में कीमतों पर दबाव बढ़ा है। उद्योग स्तर पर भी लो-वैल्यू नेचुरल डायमंड्स पर लैब-ग्रोन डायमंड की प्रतिस्पर्धा को एक महत्वपूर्ण बाजार बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

भारत दुनिया के प्रमुख डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग केंद्रों में शामिल है। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कट और पॉलिश किए गए डायमंड का निर्यात करीब 12.16 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.52 प्रतिशत कम था। वैश्विक मांग में कमजोरी, इन्वेंट्री में बदलाव और अन्य लग्जरी उत्पादों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने इस कारोबार को प्रभावित किया है।

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