दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश Prathiba M. Singh को बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) कानून के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है।
नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह को अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्हें बौद्धिक संपदा (Intellectual Property - IP) कानून के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिष्ठित IP हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है।
यह पहली बार है जब किसी भारतीय न्यायाधीश को इस वैश्विक मंच पर IP कानून और न्यायशास्त्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती कानूनी विशेषज्ञता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
सैन डिएगो में हुआ सम्मान समारोह
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह को यह सम्मान 16 जून 2026 को अमेरिका के सैन डिएगो में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। इस अवसर पर वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा कानून से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञ, न्यायविद और नीति निर्माता मौजूद थे। उन्हें यह सम्मान भारत में IP कानून के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान, आधुनिक बौद्धिक संपदा ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका, और न्यायिक प्रणाली के भीतर तथा बाहर उनके प्रभावशाली कार्य के लिए दिया गया।
साथ ही, उन्हें वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा मामलों की प्रतिष्ठित पत्रिका IAM (Intellectual Asset Management) द्वारा भी ‘IP हॉल ऑफ फेम’ में स्थान दिया गया है।
![]()
भारतीय IP कानून में अहम भूमिका
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने भारत में बौद्धिक संपदा कानून को मजबूत बनाने और इसके न्यायिक ढांचे को आधुनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके निर्णयों और न्यायिक दृष्टिकोण ने ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और पेटेंट विवादों के समाधान में नई दिशा प्रदान की है। भारत में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीकी नवाचार के बीच IP अधिकारों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरा है। इस संदर्भ में उनके कार्य को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
वर्तमान में जस्टिस सिंह विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के न्यायाधीशों के सलाहकार बोर्ड की चेयरपर्सन के रूप में भी कार्य कर रही हैं। यह भूमिका उन्हें वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा कानूनों के विकास और न्यायिक सर्वोत्तम प्रथाओं को आकार देने में एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। उनकी यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और IP विवादों के समाधान के लिए वैश्विक मानकों को मजबूत करने में मदद करती है।
भारत में बढ़ता बौद्धिक संपदा ढांचा
अपने संबोधन में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि भारत अब बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन चुका है। उन्होंने बताया कि देश में नवाचार और अनुसंधान गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष भारत में 1,50,000 से अधिक पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए, जो देश में बढ़ते नवाचार और तकनीकी विकास का स्पष्ट संकेत है। यह आंकड़ा भारत को वैश्विक नवाचार केंद्रों की श्रेणी में मजबूत स्थिति में स्थापित करता है।
जस्टिस सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों, विशेषकर दिल्ली हाईकोर्ट में बौद्धिक संपदा मामलों के निपटारे के लिए विशेष IP बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों ने मामलों के त्वरित और विशेषज्ञ समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, भारत अब वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा मामलों के लिए एक प्रमुख और विश्वसनीय न्यायिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।










