India–US Trade Deal: अंतिम चरण में पहुंचा व्यापार समझौता, अमेरिकी अधिकारी ने जताई प्रगति पर सहमति

India–US Trade Deal अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने वार्ता में हुई प्रगति पर सहमति जताई है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापार, निवेश और

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी उप सहायक सचिव Bethany Poulos Morrison ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। इस विकास को वैश्विक व्यापार संबंधों और इंडो-पैसिफिक आर्थिक साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की अमेरिकी उप सहायक सचिव बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

व्यापार समझौते का उद्देश्य क्या है?

प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और निवेश के नए अवसर पैदा करना है। इस समझौते के तहत दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा और इससे व्यापारिक बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अमेरिका के उत्पादों के लिए भारत के विशाल बाजार—जिसमें 1.4 अरब से अधिक उपभोक्ता शामिल हैं—तक पहुंच और अधिक सरल हो जाएगी।

‘मिशन 500’ पर दोनों देशों की नजर

India–US Trade Deal: अंतिम चरण में पहुंचा व्यापार समझौता, अमेरिकी अधिकारी ने जताई प्रगति पर सहमति

अमेरिका और भारत दोनों ही ‘मिशन 500’ के लक्ष्य को लेकर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लक्ष्य न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में दोनों देशों की भूमिका को भी मजबूत करेगा। वर्तमान में वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच यह साझेदारी स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 149 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में भी लगभग 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और मांग में स्थिरता बनी हुई है।

निवेश के क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी

व्यापार के साथ-साथ निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। अमेरिकी ‘Select USA’ कार्यक्रम के दौरान भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में लगभग 20 अरब डॉलर तक निवेश की संभावना व्यक्त की। इनमें से लगभग 1.1 अरब डॉलर का निवेश पहले ही प्रारंभिक चरण में किया जा चुका है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में तेजी से विस्तार कर रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।

नई दिल्ली में हाल ही में भारत और अमेरिका के वरिष्ठ व्यापारिक अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए। बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी चर्चा की गई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में अमेरिकी राजदूत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को और अधिक संतुलित, पारदर्शी और दीर्घकालिक बनाने पर जोर दिया। अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य एक निष्पक्ष व्यापार समझौता करना है, जिससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को समान अवसर मिल सके।

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