गया जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में सड़क किनारे पैदल जा रहे किसान को कार ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में किसान की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। नाराज लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया और करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर दी। इस दौरान मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि किसान सड़क किनारे पैदल अपने काम से जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आई एक कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि किसान सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत बेहद गंभीर थी। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।
हादसे के बाद कार चालक मौके पर रुका या नहीं, इस संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
किसान की मौत की खबर जैसे ही गांव और आसपास के इलाके में पहुंची, बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। परिवार और स्थानीय लोगों ने हादसे पर नाराजगी जताते हुए सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की वजह से लगातार खतरा बना रहता है और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर यातायात रोक दिया। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए। करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई।
ग्रामीणों का कहना था कि हादसे में किसान की जान जाने के बाद केवल शव उठाकर मामला खत्म नहीं होना चाहिए। वे मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने, हादसे की जांच कराने और सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे थे।
स्थानीय लोगों ने सड़क पर वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि गांव के आसपास सड़क से बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, लेकिन गति नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पैदल चलने वाले लोगों और किसानों को अक्सर सड़क के किनारे ही चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने लोगों से सड़क खाली करने और यातायात सामान्य करने की अपील की। काफी देर तक बातचीत के बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया। इसके बाद सड़क पर वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू हो सका।
दुर्घटना के कारण करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहने से कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई थी। पुलिस को यातायात सामान्य कराने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घटना के बाद पुलिस ने कार और उसके चालक की जानकारी जुटाने का प्रयास शुरू कर दिया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर हादसे की जांच की जा सकती है। यदि वाहन की पहचान होती है तो उसके चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवार के लिए यह हादसा बेहद दुखद है। खेती-किसानी से जुड़े परिवार में कमाने वाले सदस्य की अचानक मौत होने से परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट आ जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को सरकारी स्तर पर मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
सड़क हादसों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता भी सामने आई है। ग्रामीण इलाकों में कई जगह सड़क के किनारे पैदल चलने के लिए अलग रास्ता नहीं होता। किसान, मजदूर, बच्चे और बुजुर्ग इसी सड़क के किनारे आवागमन करते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के कारण ऐसे स्थानों पर दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि हादसे वाली जगह पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। जरूरत के अनुसार स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड और सड़क किनारे सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। मृतक किसान के शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। हादसे के कारणों और कार की गति समेत अन्य पहलुओं की जांच पुलिस की ओर से की जाएगी।
कुल मिलाकर, गया में सड़क किनारे पैदल जा रहे किसान को कार ने रौंद दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर विरोध जताया। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद जाम हटाया गया। अब पुलिस हादसे की जांच कर वाहन और चालक की पहचान करने में जुटी है।










