वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कतर के वित्त मंत्री अली बिन अहमद अल कुवारी से मुलाकात की। यह बैठक एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की वार्षिक बैठक से इतर हुई।
बिजनेस न्यूज़: भारत और कतर के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के वित्त मंत्री अली बिन अहमद अल कुवारी से मुलाकात की। बैठक में भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI, कतर की भारत में 10 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता और द्विपक्षीय निवेश समझौते सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह बैठक एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की वार्षिक बैठक से इतर हुई। बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को और मजबूत करना रहा। भारत और कतर पहले से ही ऊर्जा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार हैं और दोनों पक्ष आर्थिक रिश्तों को नए क्षेत्रों तक विस्तार देने पर जोर दे रहे हैं।
कतर में UPI के विस्तार पर चर्चा
बैठक के दौरान कतर में Unified Payments Interface (UPI) के विस्तार का मुद्दा प्रमुख रहा। UPI भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसने देश में मोबाइल और बैंकिंग आधारित तत्काल भुगतान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया है। कतर में UPI की पहुंच बढ़ने से वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों और भारत आने वाले यात्रियों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ सकती है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच डिजिटल वित्तीय संपर्क को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
10 अरब डॉलर के निवेश पर क्या हुई बात?

बैठक में भारत में कतर की 10 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता को लागू करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस निवेश को आगे बढ़ाने के लिए संभावित क्षेत्रों और संस्थागत सहयोग पर बातचीत की। कतर का निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकता है। भारत सरकार विदेशी निवेश को देश के विकास और पूंजी निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मानती है।
इस दौरान National Investment and Infrastructure Fund (NIIF) के साथ कतर के जुड़ाव की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। NIIF भारत में दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने से जुड़ा प्रमुख निवेश मंच है।
Bilateral Investment Treaty को अंतिम रूप देने पर जोर
निर्मला सीतारमण ने भारत और कतर के बीच Bilateral Investment Treaty (BIT) को अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। द्विपक्षीय निवेश समझौता दोनों देशों के निवेशकों के लिए नियमों और सुरक्षा से जुड़ा एक औपचारिक ढांचा तैयार कर सकता है। ऐसे समझौते निवेशकों के लिए कानूनी और नीतिगत स्पष्टता बढ़ाने में मदद करते हैं। भारत और कतर के बीच निवेश बढ़ाने के लिहाज से BIT को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) का मुद्दा भी शामिल रहा। दोहरे कराधान से बचाव से संबंधित समझौते का उद्देश्य पात्र आय पर दो अलग-अलग देशों में दो बार कर लगने की स्थिति को कम करना है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ऐसा ढांचा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ कर संबंधी निश्चितता बढ़ाने में मदद कर सकता है।













