गृहलक्ष्मी की ₹2,000 सहायता से नहीं काटी जाएगी लोन की किस्त, कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने दिए निर्देश

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने बैंकों को गृहलक्ष्मी की ₹2,000 सहायता से लोन किस्त या ब्याज न काटने के निर्देश देने को कहा। शिकायतों के बाद फैसला लिया गया।

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को गृहलक्ष्मी योजना की ₹2,000 मासिक सहायता राशि से लोन की किस्त या ब्याज न काटने के निर्देश देने को कहा है। यह कदम महिला लाभार्थियों की शिकायतों के बाद उठाया गया।

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कहा है कि राज्य की गृहलक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं के खातों में जमा होने वाली ₹2,000 की मासिक सहायता राशि को लोन की किस्त या ब्याज की वसूली में समायोजित न किया जाए। यह निर्देश महिला लाभार्थियों की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद दिया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को बैंक प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश भेजने के लिए कहा है, ताकि गृहलक्ष्मी योजना की राशि को बकाया ऋण या ब्याज की वसूली में स्वतः काटे जाने से रोका जा सके। यह कदम कर्नाटक गारंटी कार्यान्वयन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य दिनेश गूलीगौड़ा की ओर से दिए गए ज्ञापन के बाद उठाया गया।

क्या है पूरा मामला?

गृहलक्ष्मी योजना के तहत पात्र परिवारों की महिला मुखियाओं के बैंक खातों में हर महीने ₹2,000 की सहायता राशि जमा की जाती है। उपलब्ध सरकारी योजना संबंधी आंकड़ों के अनुसार, करीब 1.24 करोड़ महिलाएं इस योजना से जुड़ी हैं। जून 2026 में गूलीगौड़ा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1.24 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने लगभग ₹2,480 करोड़ और सालाना करीब ₹29,760 करोड़ की राशि मिलती है। यह सहायता घरेलू जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता जैसे उद्देश्यों के लिए दी जाती है।

हालांकि, गूलीगौड़ा ने मुख्यमंत्री को दिए अपने प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया कि कुछ वाणिज्यिक बैंक, निजी वित्त कंपनियां और माइक्रोफाइनेंस संस्थान लाभार्थियों के खातों में गृहलक्ष्मी की राशि पहुंचने के तुरंत बाद पुराने लोन की किस्त या ब्याज की बकाया राशि के नाम पर पैसा काट रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को क्या निर्देश दिया?

शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को बैंक प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश भेजने के लिए कहा है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गृहलक्ष्मी योजना के तहत मिलने वाली ₹2,000 की सहायता राशि को लाभार्थियों के पुराने ऋण, लोन की किस्त या ब्याज की वसूली के लिए समायोजित न किया जाए।

मुख्यमंत्री का निर्देश गूलीगौड़ा की उस मांग के बाद आया, जिसमें उन्होंने योजना की राशि को ऋण वसूली से सुरक्षित रखने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।

लाभार्थियों की शिकायतों में क्या कहा गया?

गूलीगौड़ा के प्रतिनिधित्व के अनुसार, कुछ लाभार्थियों ने शिकायत की कि गृहलक्ष्मी की राशि उनके खातों में जमा होने के तुरंत बाद काट ली गई। शिकायतों में वाणिज्यिक बैंकों के साथ-साथ निजी वित्त कंपनियों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है।

प्रतिनिधित्व में कहा गया कि यदि योजना की राशि लाभार्थी को जानकारी दिए बिना बकाया ऋण या ब्याज में समायोजित कर ली जाती है, तो इससे योजना के मूल उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।

गूलीगौड़ा ने इस मुद्दे को जिला स्तरीय बैंकर्स समीक्षा समिति की बैठकों में भी उठाए जाने का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन बैठकों में गृहलक्ष्मी की राशि का इस्तेमाल लोन रिकवरी के लिए नहीं करने से संबंधित निर्देशों पर चर्चा हुई थी।

पुराने और नए दोनों तरह के कर्ज पर लागू करने की मांग

गूलीगौड़ा ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के माध्यम से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए स्पष्ट परिपत्र जारी करने की मांग की है।

उनकी मांग है कि गृहलक्ष्मी की ₹2,000 की सहायता राशि को पुराने कर्ज, कृषि ऋण, गैर-कृषि ऋण या ब्याज की बकाया राशि में समायोजित न किया जाए।

इसके साथ ही निजी वित्त कंपनियों या उनके एजेंटों द्वारा कथित तौर पर की जाने वाली जबरन वसूली पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। प्रतिनिधित्व में उन मामलों की निगरानी बढ़ाने का आग्रह किया गया है, जहां लाभार्थियों के खाते में सहायता राशि पहुंचने के बाद कथित तौर पर दबाव बनाकर राशि वसूलने की कोशिश की जाती है।

पहले काटी गई राशि लौटाने की भी मांग

प्रतिनिधित्व में उन मामलों में पहले से काटी जा चुकी राशि वापस करने की मांग भी की गई है, जहां लाभार्थी की लिखित सहमति के बिना गृहलक्ष्मी की सहायता राशि काटे जाने का आरोप है।

इसके अलावा जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है, ताकि ऐसी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि योजना की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। इसलिए खाते में राशि जमा होने के बाद उसके इस्तेमाल और किसी संभावित कटौती को लेकर लाभार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत बताई गई है।

गृहलक्ष्मी योजना के तहत कितनी राशि दी जाती है?

गृहलक्ष्मी कर्नाटक सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र परिवारों की महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 की सहायता दी जाती है।

जून 2026 में गूलीगौड़ा द्वारा विधानसभा परिषद से जुड़े एक बयान में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना में करीब 1.24 करोड़ लाभार्थी थे। तब तक योजना के तहत सरकार द्वारा ₹72,253 करोड़ का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई थी।

सितंबर 2026 में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में गूलीगौड़ा ने बताया कि योजना के तहत राज्य की 1.24 करोड़ महिलाओं को कुल ₹76,951.13 करोड़ दिए जा चुके हैं और 33वीं किस्त के बाद प्रति लाभार्थी कुल भुगतान ₹66,000 तक पहुंचने की बात कही गई।

सरकार के सामने अब निगरानी लागू करने की चुनौती

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण बैंक और वित्तीय संस्थानों तक स्पष्ट दिशा-निर्देश पहुंचाना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गृहलक्ष्मी की सहायता राशि को बकाया ऋण की वसूली के लिए स्वतः समायोजित न किया जाए।

हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कुछ संस्थानों द्वारा राशि काटे जाने के आरोप मुख्य रूप से लाभार्थियों की शिकायतों और गूलीगौड़ा के प्रतिनिधित्व में सामने आए हैं। इन आरोपों की संस्थान-वार स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

कर्नाटक सरकार के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

गृहलक्ष्मी योजना राज्य की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक है और बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों तक सीधे नकद सहायता पहुंचाती है। इसलिए योजना की राशि के इस्तेमाल और बैंक खातों से होने वाली संभावित कटौती को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री का निर्देश बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए राज्य सरकार की अपेक्षा स्पष्ट करने की दिशा में एक कदम है। अब मुख्य सचिव कार्यालय और संबंधित बैंक प्रबंधन के बीच जारी होने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि गृहलक्ष्मी के तहत मिलने वाली ₹2,000 की मासिक सहायता राशि लाभार्थियों के खाते में पहुंचने के बाद पुराने लोन की किस्त या ब्याज की वसूली में स्वतः न चली जाए।

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