गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गया पहुंच रहे हैं। पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए प्रमुख वेदियों और धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिल रही हैं। पिछले चार दिनों में ही करीब 3.80 लाख श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही पितृपक्ष मेले में अब तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 12.65 लाख तक पहुंच गई है।
पितृपक्ष मेले के दौरान गया में आने वाले श्रद्धालु अलग-अलग पिंडवेदी पर अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। विष्णुपद मंदिर, देवघाट, प्रेतशिला, रामशिला, धर्मारण्य, मतंगवापी, सरस्वती वेदी समेत कई प्रमुख स्थानों पर लगातार भीड़ बनी हुई है। सुबह से लेकर शाम तक इन स्थानों पर पिंडदान और तर्पण का सिलसिला जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से निर्धारित कर्मकांड पूरा करने के लिए परिवार के साथ गयाजी पहुंचे हैं।
पितृपक्ष मेले में भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को बनाए रखना है। बड़ी संख्या में लोग एक साथ धार्मिक स्थलों की ओर पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रमुख पिंडवेदी, घाट, मंदिर और संपर्क मार्गों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें तैनात हैं। अधिकारियों की ओर से लगातार व्यवस्था की निगरानी की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मेले में आने वाली भारी भीड़ के बीच लोगों के बिछड़ने की समस्या भी सामने आती है। अलग-अलग राज्यों और शहरों से आने वाले परिवारों में कई बार बुजुर्ग, बच्चे या अन्य सदस्य भीड़ के कारण अपने साथियों से अलग हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में खोया-पाया केंद्र बड़ी भूमिका निभा रहा है। अब तक 95 बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को खोया-पाया केंद्र की मदद से उनके परिवार और अपनों से मिलाया जा चुका है। भीड़ के बीच यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जिनका कोई सदस्य अचानक उनसे अलग हो जाता है।
गयाजी में इस बार श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड आधारित रिस्टबैंड की व्यवस्था की गई है। रिस्टबैंड में परिवार के सदस्यों के मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी दर्ज की जा सकती है। किसी श्रद्धालु के परिवार से अलग होने की स्थिति में क्यूआर कोड स्कैन कर उसकी पहचान और परिजनों तक पहुंचने में मदद ली जा सकती है।
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल सहायता की व्यवस्था भी की गई है। मेले के अलग-अलग हिस्सों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां बुजुर्ग और बीमार लोगों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे लंबी दूरी से आने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल रही है। पिछले दिनों हजारों श्रद्धालुओं ने इन मेडिकल कैंपों का लाभ लिया है।
बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था भी की गई है। कई श्रद्धालुओं के लिए एक पिंडवेदी से दूसरी जगह तक पैदल जाना मुश्किल होता है। ऐसे में व्हीलचेयर और स्वयंसेवकों की सहायता से उन्हें धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही इन सुविधाओं का उद्देश्य यह है कि उम्रदराज और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालु भी बिना ज्यादा परेशानी के अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान कर सकें।
पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के कारण गया शहर के प्रमुख इलाकों में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुबह के समय पिंडदान स्थलों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है। इसके बाद दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है। अलग-अलग राज्यों से आए परिवार अपने पुरोहितों और पंडों के साथ निर्धारित विधि से पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं।
गयाजी में पिंडदान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग वेदियों का धार्मिक महत्व है। कई परिवार अपने पूर्वजों के नाम से निर्धारित कर्मकांड पूरा करने के लिए एक से अधिक स्थानों पर जाते हैं। इस वजह से पूरे मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहती है। विष्णुपद क्षेत्र से लेकर बोधगया और अन्य पिंडवेदी स्थलों तक प्रशासन को यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी करनी पड़ रही है।
बोधगया क्षेत्र में भी पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंच रही है। धर्मारण्य और मतंगवापी जैसे स्थानों पर पिंडदान के लिए लोगों की कतारें देखी जा रही हैं। श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के साथ बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में भी दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इससे बोधगया क्षेत्र में भी यातायात और भीड़ का दबाव बढ़ रहा है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सूचना केंद्र और सहायता डेस्क भी सक्रिय रखे हैं। अलग-अलग भाषाओं से आने वाले श्रद्धालुओं को जानकारी देने के लिए बहुभाषी सहायता की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य बाहर से आने वाले लोगों को पिंडवेदी, घाट, चिकित्सा केंद्र, ठहरने की जगह और अन्य जरूरी सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।
मेले में बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता भीड़ में परिवार से अलग होने की होती है। इसी को देखते हुए प्रशासन की ओर से रिस्टबैंड, खोया-पाया केंद्र और निगरानी कैमरों जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक तकनीक की मदद से भीड़ के बीच बिछड़े लोगों को उनके परिवार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
गया जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नि:शुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था भी की गई है। इससे बुजुर्ग और दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों को मेला क्षेत्र में आवाजाही में मदद मिल रही है। प्रशासनिक अधिकारी खुद भी अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। भीड़ प्रबंधन, पेयजल, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
पितृपक्ष मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। लंबी दूरी से आने वाले परिवारों को कई बार कई दिनों तक गयाजी में रुकना पड़ता है। ऐसे में टेंट सिटी और अन्य ठहरने की व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।
मेले के दौरान गंगाजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए गंगाजल का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए मेला क्षेत्र में इसके वितरण की व्यवस्था की गई है। पिछले दिनों हजारों पैकेट गंगाजल वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय है। प्रमुख घाटों, मंदिरों और पिंडवेदी स्थलों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में रास्तों को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहते हैं।
पितृपक्ष मेला कई दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन है और आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की संभावना बनी हुई है। इसलिए प्रशासन के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा व्यवस्था को लगातार बनाए रखना है। जैसे-जैसे मेला आगे बढ़ेगा, पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले लोगों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भीड़ के बीच किसी व्यक्ति के बिछड़ने की स्थिति में परिजनों से अपील की जाती है कि वे तुरंत संबंधित खोया-पाया केंद्र या सहायता डेस्क से संपर्क करें। बच्चे और बुजुर्ग अकेले मिलें तो उनके बारे में जानकारी दर्ज कर उन्हें परिजनों से मिलाने का प्रयास किया जाता है। अब तक 95 लोगों का अपने परिवार से दोबारा मिलना इस व्यवस्था के सक्रिय रहने का संकेत है।
गयाजी में पितृपक्ष मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं की भी बड़ी परीक्षा है। लाखों लोगों के एक साथ पहुंचने के बावजूद भोजन, पेयजल, चिकित्सा, परिवहन, सुरक्षा और खोया-पाया जैसी व्यवस्थाओं को लगातार संचालित रखना चुनौतीपूर्ण है। जिला प्रशासन की टीमें अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं और श्रद्धालुओं की जरूरत के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल चार दिनों में 3.80 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने और पूरे मेले में अब तक 12.65 लाख लोगों के गयाजी आने की जानकारी से साफ है कि पितृपक्ष मेला अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। पिंडदान और तर्पण के लिए लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। दूसरी ओर, 95 बिछड़े लोगों को खोया-पाया केंद्र के माध्यम से उनके परिवार से मिलाया जाना भीड़ प्रबंधन के बीच चल रही मानवीय सहायता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की निगरानी और सुविधाओं पर दबाव बना रहेगा।










