तमिलनाडु में ₹220 करोड़ की शहरी परियोजनाएं PPP मॉडल पर, तंजावुर और तूतीकोरिन में विकास की तैयारी

तमिलनाडु में तंजावुर और तूतीकोरिन की ₹220 करोड़ की शहरी परियोजनाओं के लिए निजी भागीदारी का आकलन होगा। सलाहकार नियुक्ति के लिए 15 अक्टूबर तक बोली मांगी गई है।

तमिलनाडु सरकार तंजावुर और तूतीकोरिन में ₹220 करोड़ की दो शहरी परियोजनाओं को PPP मॉडल पर विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही है। तंजावुर में ₹130 करोड़ का वाणिज्यिक परिसर और तूतीकोरिन में ₹90 करोड़ का पुराना बस स्टैंड पुनर्विकसित होगा।

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने तंजावुर और तूतीकोरिन में प्रस्तावित दो शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के तहत विकसित करने की संभावनाओं का आकलन शुरू किया है। दोनों परियोजनाओं की अनुमानित संयुक्त लागत ₹220 करोड़ है। इनमें तंजावुर में बहुउद्देश्यीय वाणिज्यिक परिसर और तूतीकोरिन के पोलपेट्टई क्षेत्र में पुराने बस स्टैंड का पुनर्विकास शामिल है।

राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और लेन-देन संबंधी सलाह देने के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए तमिलनाडु सरकार के Project Development Grant Fund के तहत निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।

तंजावुर में ₹130 करोड़ का बहुउद्देश्यीय वाणिज्यिक परिसर

तंजावुर कॉरपोरेशन में प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय शॉपिंग और वाणिज्यिक परिसर की अनुमानित लागत ₹130 करोड़ है। परियोजना का उद्देश्य एक ऐसे व्यावसायिक परिसर का विकास करना है, जिसे निजी भागीदारी के जरिए तैयार और संचालित करने की संभावना का अध्ययन किया जाएगा।

फिलहाल यह परियोजना तैयारी और व्यवहार्यता आकलन के चरण में है। सरकार पहले यह देखना चाहती है कि परियोजना को PPP मॉडल के तहत लागू करना व्यावहारिक होगा या नहीं।

सलाहकार विस्तृत अध्ययन के जरिए परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता, संभावित साझेदारी संरचना और निजी क्षेत्र की भागीदारी की संभावनाओं का आकलन करेगा।

तमिलनाडु के सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर तंजावुर में वाणिज्यिक परिसर और पार्किंग क्षेत्र से संबंधित पूर्व निविदा भी दर्ज है, जिससे इस क्षेत्र में वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे के विकास की प्रक्रिया का संकेत मिलता है।

तूतीकोरिन में ₹90 करोड़ से पुराने बस स्टैंड का पुनर्विकास

दूसरी परियोजना तूतीकोरिन कॉरपोरेशन के पोलपेट्टई क्षेत्र में स्थित पुराने बस स्टैंड के पुनर्विकास से जुड़ी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹90 करोड़ है।

प्रस्ताव के तहत मौजूदा बस स्टैंड क्षेत्र के पुनर्विकास की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसका आकलन भी PPP मॉडल के तहत किया जाना है।

सरकार द्वारा नियुक्त किया जाने वाला सलाहकार यह जांच करेगा कि परियोजना को निजी भागीदारी के जरिए लागू किया जा सकता है या नहीं। इसके साथ ही परियोजना की वित्तीय संरचना और संभावित निवेश मॉडल का भी अध्ययन किया जाएगा।

पहले व्यवहार्यता रिपोर्ट, फिर निजी कंपनी का चयन

दोनों परियोजनाओं के लिए सरकार ने सीधे निजी डेवलपर चुनने के बजाय पहले विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन कराने की प्रक्रिया अपनाई है। सलाहकार का काम यह पता लगाना होगा कि प्रस्तावित परियोजनाएं तकनीकी और वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं या नहीं।

अध्ययन के आधार पर यह तय करने में मदद मिलेगी कि प्रत्येक परियोजना के लिए किस तरह की PPP संरचना उपयुक्त होगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी कंपनी या कंपनियों के चयन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

इसका मतलब है कि अभी ₹130 करोड़ के वाणिज्यिक परिसर या ₹90 करोड़ के बस स्टैंड पुनर्विकास के लिए अंतिम निजी भागीदार का चयन नहीं हुआ है। निजी डेवलपर का चयन व्यवहार्यता अध्ययन और निर्धारित PPP प्रक्रिया के बाद होगा।

सलाहकार की नियुक्ति पर ₹50 लाख का खर्च

दोनों परियोजनाओं की विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी सेवाएं देने के लिए प्रस्तावित कंसल्टेंसी अनुबंध का मूल्य ₹50 लाख रखा गया है।

निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले बोलीदाताओं को ₹50,000 की जमा राशि जमा करनी होगी।

सलाहकार केवल परियोजनाओं की व्यवहार्यता की जांच तक सीमित नहीं रहेगा। उसे दोनों नगर निगमों को PPP मॉडल के तहत परियोजनाओं को लागू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं पर सलाह भी देनी होगी।

निजी भागीदारी के लिए वित्तीय मॉडल का अध्ययन

परियोजनाओं के अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय व्यवहार्यता का होगा। सलाहकार को यह देखना होगा कि प्रस्तावित विकास कार्यों में निजी निवेश आकर्षित करने की पर्याप्त संभावना है या नहीं।

इसके अलावा यह भी निर्धारित करने में मदद की जाएगी कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच जिम्मेदारियों तथा जोखिमों का बंटवारा किस तरह किया जा सकता है।

PPP मॉडल में आम तौर पर सार्वजनिक प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के बीच परियोजना के विकास, वित्तपोषण, संचालन या अन्य जिम्मेदारियों को निर्धारित व्यवस्था के तहत बांटा जाता है। इस मामले में सलाहकार दोनों नगर निगमों को परियोजना की प्रकृति के अनुरूप प्रक्रिया तैयार करने में मदद करेगा।

निजी डेवलपर के चयन में भी मिलेगी सलाह

सलाहकार की जिम्मेदारी में संभावित निजी कंपनी या कंपनियों के चयन की प्रक्रिया में सहायता करना भी शामिल होगा। यह सहायता ट्रांजैक्शन एडवाइजरी सेवाओं का हिस्सा होगी।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजनाओं को लागू करने के लिए आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो।

तंजावुर और तूतीकोरिन की परियोजनाओं के लिए अलग-अलग विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं, लेकिन दोनों में निजी भागीदारी की संभावना का मूल्यांकन एक समान प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

15 अक्टूबर को बोली जमा करने की अंतिम तारीख

कंसल्टेंसी के लिए निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है। निविदाएं उसी दिन दोपहर 12:30 बजे खोली जाएंगी।

इस चरण में सरकार का मुख्य उद्देश्य दोनों परियोजनाओं के लिए जरूरी प्रारंभिक अध्ययन और सलाहकार सेवाएं हासिल करना है। निजी कंपनियों का चयन बाद के चरण में होगा।

तमिलनाडु का आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल राज्य की निविदा प्रक्रियाओं के लिए ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराता है और निविदा दस्तावेजों तथा समयसीमा की जानकारी प्रकाशित करता है।

शहरी बुनियादी ढांचे में निजी निवेश की संभावना

तंजावुर और तूतीकोरिन की इन परियोजनाओं को PPP मॉडल के तहत विकसित करने की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब शहरी निकायों के सामने आधुनिक वाणिज्यिक और परिवहन बुनियादी ढांचे की जरूरत बढ़ रही है।

तंजावुर में प्रस्तावित वाणिज्यिक परिसर का फोकस बहुउद्देश्यीय शॉपिंग और व्यावसायिक उपयोग पर है, जबकि तूतीकोरिन में पुराने बस स्टैंड के पुनर्विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, दोनों परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति व्यवहार्यता अध्ययन, वित्तीय मॉडल, PPP संरचना और बाद में निजी भागीदार के चयन पर निर्भर करेगी।

अभी परियोजनाएं तैयारी के चरण में

सरकार की मौजूदा पहल को परियोजनाओं के क्रियान्वयन की शुरुआत के बजाय प्रोजेक्ट-प्रिपरेशन चरण के रूप में देखा जा रहा है। पहले सलाहकार विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेगा और यह आकलन करेगा कि निजी भागीदारी के जरिए दोनों परियोजनाओं को आगे बढ़ाना आर्थिक तथा व्यावहारिक रूप से उचित है या नहीं।

इसके बाद संबंधित नगर निगम निर्धारित PPP प्रक्रियाओं के अनुसार निजी भागीदारों के चयन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

इस तरह तंजावुर की ₹130 करोड़ की वाणिज्यिक परियोजना और तूतीकोरिन की ₹90 करोड़ की बस स्टैंड पुनर्विकास परियोजना के लिए फिलहाल मुख्य फोकस व्यवहार्यता अध्ययन और निजी निवेश की संभावनाओं को स्पष्ट करने पर है।

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