उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कोचिंग के लिए घर से निकले 17 वर्षीय छात्र प्रिंस निषाद का शव पांच दिन बाद चिलुआताल नदी में मिला। छात्र 23 सितंबर की सुबह घर से बेतियाहाता स्थित कोचिंग संस्थान जाने के लिए निकला था, लेकिन वहां पहुंचा ही नहीं। देर शाम तक जब वह वापस घर नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ के साथ कई संभावित स्थानों पर उसकी खोज की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। सोमवार शाम शेषपुरवा गांव के पास चिलुआताल नदी में शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कपड़ों के आधार पर परिवार ने उसकी पहचान प्रिंस के रूप में की।
प्रिंस के शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी। पुलिस के अनुसार शव कई दिन पुराना होने के कारण सड़-गल गया था। नदी में शव मिलने की सूचना के बाद चिलुआताल थाना पुलिस और पीआरवी मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकालकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। जैसे ही परिवार को शव मिलने की जानकारी हुई, परिजन और ग्रामीण पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि उनका बेटा सामान्य तरीके से घर से निकला था और उसके बाद अचानक गायब हो गया, इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच की जानी चाहिए।
प्रिंस के पिता नंदकिशोर ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनका बेटा 23 सितंबर की सुबह करीब आठ बजे बेतियाहाता स्थित मोमेंटम इंस्टीट्यूट में कोचिंग के लिए निकला था। उस दिन संस्थान में उसकी परीक्षा भी थी। लेकिन जब परिवार ने कोचिंग सेंटर से संपर्क किया तो पता चला कि प्रिंस उस दिन संस्थान पहुंचा ही नहीं था और उसने परीक्षा भी नहीं दी थी। यह जानकारी परिवार के लिए और ज्यादा चिंता का कारण बनी, क्योंकि प्रिंस नियमित रूप से पढ़ाई करता था और अपने भविष्य को लेकर गंभीर था।
परिवार ने अपने स्तर से उसकी तलाश शुरू की। आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई और रिश्तेदारों तथा परिचितों से भी जानकारी ली गई। जब कई घंटों तक उसका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। चिलुआताल पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने के बाद छात्र के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच शुरू की। जांच में मोबाइल की अंतिम लोकेशन पीपीगंज क्षेत्र में मिली। इसके बाद मोबाइल फोन बंद हो गया। मोबाइल बंद होने के बाद पुलिस के लिए छात्र की आगे की गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो गया।
पुलिस ने छात्र की तलाश के लिए संभावित रास्तों और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालनी शुरू की थी। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि कोचिंग के लिए निकलने के बाद प्रिंस किस रास्ते से गया और किन लोगों के संपर्क में आया। इसी बीच सोमवार शाम चिलुआताल नदी में शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने शव को बाहर निकाला और कपड़ों के आधार पर परिवार से पहचान कराई गई। पहचान होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और परिजनों ने हत्या की आशंका जताई।
प्रिंस के पिता का कहना है कि उनका बेटा पढ़ाई में काफी होनहार था। वह हाईस्कूल टॉपर था और आगे चलकर आइआइटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहता था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह कोचिंग कर रहा था। पिता ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि उनका बेटा बिना बताए कोचिंग छोड़कर कहीं चला गया होगा। उनके मुताबिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि उन्हें अपने बेटे की हत्या किए जाने की आशंका है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। पिता नंदकिशोर ने आरोप लगाया कि उनके बेटे का शव महेसरा पुल के नीचे दोपहर करीब तीन बजे ही मिल गया था, लेकिन पुलिस शाम करीब छह बजे मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि यदि छात्र के लापता होने के बाद उसकी तलाश को और गंभीरता से किया जाता तो शायद उसके बारे में पहले जानकारी मिल सकती थी। हालांकि पुलिस की ओर से मामले में जांच जारी होने की बात कही गई है और फिलहाल परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रिंस आखिर चिलुआताल नदी तक कैसे पहुंचा। वह घर से कोचिंग के लिए निकला था, लेकिन कोचिंग संस्थान तक पहुंचा ही नहीं। उसके मोबाइल की अंतिम लोकेशन पीपीगंज क्षेत्र में मिली और उसके बाद फोन बंद हो गया। पांच दिन बाद उसका शव नदी में मिला। इन घटनाक्रमों के बीच की कड़ियों को जोड़ना जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल गतिविधियों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र के साथ आखिरी समय में क्या हुआ था।
घटना में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अहम होगी। शव कई दिन पुराना होने के कारण उसकी स्थिति खराब बताई गई है। ऐसे में चिकित्सकीय जांच से मृत्यु की परिस्थितियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाएगी। यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की चोट या अन्य संदिग्ध परिस्थिति सामने आती है तो जांच की दिशा उसी आधार पर आगे बढ़ सकती है।
परिवार की ओर से हत्या की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। अभी तक पुलिस ने किसी व्यक्ति को हत्या का आरोपी घोषित नहीं किया है और न ही उपलब्ध रिपोर्ट में किसी छात्रा के साथ प्रेम संबंध को हत्या की वजह बताया गया है। इसलिए सोशल मीडिया या स्थानीय स्तर पर चल रही किसी भी चर्चा को पुलिस की आधिकारिक जांच से पहले अंतिम कारण मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि प्रिंस कोचिंग तक क्यों नहीं पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रिंस के मोबाइल की आखिरी लोकेशन पीपीगंज में मिली थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि उस समय छात्र किसके संपर्क में था और उसके साथ कौन लोग थे। कॉल डिटेल, लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज को एक साथ जोड़ने से उसके आखिरी सफर की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। इसके अलावा परिवार, दोस्तों, सहपाठियों और कोचिंग से जुड़े लोगों से पूछताछ भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
पांच दिन तक छात्र के लापता रहने और फिर नदी में शव मिलने से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन लगातार इस बात का जवाब चाहते हैं कि उनका बेटा घर से निकलने के बाद कहां गया और उसकी मौत कैसे हुई। पोस्टमार्टम हाउस पर हुए हंगामे के बाद पुलिस ने परिवार को निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है। थानाध्यक्ष के अनुसार रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल गोरखपुर का यह मामला कई सवाल छोड़ गया है। एक होनहार छात्र जो अपने भविष्य के लिए कोचिंग करने घर से निकला था, वह संस्थान तक नहीं पहुंचा और पांच दिन बाद उसका शव नदी में मिला। परिवार इसे हत्या मान रहा है, जबकि पुलिस अभी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रिंस की मौत हादसा थी या उसके पीछे कोई आपराधिक घटना थी। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।










