उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इन दिनों एक विशालकाय मेगा ट्रक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बेल्जियम से होते हुए ओडिशा के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा करीब 200 टन वजनी बॉयलर लदा यह ट्रक मंगलवार को डाफी टोल प्लाजा के पास बनाए गए वैकल्पिक रास्ते पर फंस गया। भारी-भरकम ट्रक को आगे निकालने के लिए गिट्टी, बालू और लोहे की प्लेटों का सहारा लिया गया, लेकिन जमीन धंसने के कारण ट्रक का एक पहिया फंस गया। इसके बाद इसे निकालने की कोशिशें शुरू कर दी गईं, लेकिन वजन और आकार इतना अधिक है कि काम आसान नहीं हो रहा है।
यह सामान्य ट्रक नहीं है। इस मेगा ट्रक में कुल 308 पहिए लगे हैं और इसके ऊपर एक विशाल वेसल यानी वैक्यूम बॉयलर लदा हुआ है। यह भारी उपकरण बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह तक पहुंचा था। वहां से इसे सड़क मार्ग के जरिए उत्तर प्रदेश के बलरामपुर क्षेत्र में स्थित चीनी मिल के लिए ले जाया जा रहा है। रास्ते में कई राज्यों और जिलों से गुजरते हुए यह ट्रक अब वाराणसी पहुंचा है, लेकिन यहां डाफी टोल प्लाजा के पास जमीन धंसने से इसकी रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया।
जानकारी के अनुसार यह विशाल ट्रक सोमवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे डाफी टोल प्लाजा पहुंचा था। वहां इसे करीब 20 घंटे से ज्यादा समय तक रोककर रखा गया। इतने बड़े और भारी वाहन को आगे निकालने के लिए सामान्य सड़क का इस्तेमाल करना आसान नहीं है। इसलिए टोल प्लाजा के उत्तर दिशा में एक वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे ट्रक को इसी वैकल्पिक मार्ग से आगे ले जाने की कोशिश शुरू हुई, लेकिन कुछ दूरी तय करने के बाद ही रास्ते ने चुनौती खड़ी कर दी।
ट्रक के वजन को देखते हुए पहले जमीन को मजबूत करने के लिए गिट्टी और बालू डाली गई। इसके ऊपर लोहे की बड़ी प्लेटें भी रखी गईं, ताकि भारी पहियों का दबाव सीधे कमजोर जमीन पर न पड़े। इसके बावजूद जब 200 टन से ज्यादा वजन वाले वाहन ने रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश की तो जमीन दब गई और ट्रक का पहिया उसमें फंस गया। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इतने बड़े वाहन को बिना किसी नुकसान के उस जगह से बाहर निकाला जाए।
ट्रक को निकालने के लिए उसके साथ चल रही भारी मशीनरी की मदद ली जा रही है। मौके पर टोल प्लाजा के कर्मचारी और एनएचएआई की टीम भी मौजूद है। तकनीकी टीम लगातार स्थिति का आकलन कर रही है कि किस दिशा से ट्रक को खींचने पर जमीन पर दबाव कम पड़ेगा और पहिया सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सकेगा। भारी वाहन को जबरन खींचने के बजाय पूरी प्रक्रिया सावधानी से करनी पड़ रही है, क्योंकि बॉयलर का वजन और ट्रेलर का आकार दोनों ही काफी अधिक हैं।
ट्रक के रास्ते में बिजली के तार भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं। इसकी ऊंचाई और आकार को देखते हुए बिजली विभाग ने शटडाउन लेकर दो खंभों के तार हटाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य यह है कि ट्रक को आगे निकालते समय बिजली के तारों से किसी तरह का खतरा पैदा न हो। इस पूरी प्रक्रिया में बिजली विभाग, एनएचएआई और टोल प्लाजा की टीमों के बीच समन्वय किया जा रहा है।
मेगा ट्रक के फंसने की सूचना फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ भी मौके पर जुटने लगी। राहगीर और आसपास के गांवों के लोग इस विशालकाय वाहन को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। कई लोग मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं। 308 पहियों वाला यह ट्रक अपने आकार के कारण पहले से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वाराणसी पहुंचने के बाद इसे देखने के लिए अलग-अलग जगहों पर लोगों की भीड़ देखी गई थी।
दरअसल, इस मेगा ट्रक को सामान्य ट्रेलर की तरह चलाना संभव नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ट्रेलर करीब 100 फीट लंबा और लगभग सात मीटर चौड़ा है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई के कारण रास्ते में आने वाले फुट ओवरब्रिज, बिजली के खंभे, तार, स्ट्रीट लाइट और सड़क किनारे लगे बोर्ड तक हटाने या बदलने पड़ रहे हैं। जहां सड़क संकरी पड़ती है, वहां पहले रास्ता तैयार किया जाता है और उसके बाद ही ट्रक को आगे बढ़ाया जाता है।
वाराणसी से पहले भी इस मेगा ट्रक की यात्रा में कई तरह की दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। रास्ते में कई स्थानों पर पुल और फुट ओवरब्रिज इसकी ऊंचाई और चौड़ाई के कारण बाधा बने। कुछ जगह सड़क को चौड़ा करना पड़ा तो कहीं वैकल्पिक मार्ग तैयार करना पड़ा। बिजली के तार और दूसरे ढांचागत अवरोध भी हटाने पड़े। इस कारण ट्रक की औसत गति बेहद कम बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक सामान्य परिस्थितियों में भी एक दिन में करीब 10 से 12 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पा रहा है। रास्ता पूरी तरह साफ और अनुकूल होने पर इसकी दैनिक दूरी करीब 20 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। इतनी धीमी गति का मुख्य कारण ट्रक का विशाल आकार, भारी वजन और रास्ते में आने वाली बाधाएं हैं। यही वजह है कि ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक इसकी यात्रा सामान्य मालवाहक ट्रकों की तुलना में कई गुना लंबी हो गई है।
इस मेगा ट्रक के संचालन के लिए एक बड़ी तकनीकी टीम भी साथ चल रही है। रिपोर्ट के अनुसार इसके साथ करीब 14 वाहन और विभिन्न प्रकार की मशीनें चल रही हैं। इनमें जेसीबी, हाइड्रा, क्रेन, ट्रेलर और तकनीकी तथा मैकेनिकल टीम के वाहन शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर रास्ते में सड़क की स्थिति सुधारने, ऊंचाई वाले अवरोध हटाने और ट्रेलर को आगे खींचने के लिए इन मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
ट्रक के चालक के अनुसार इस पूरे अभियान में रोजाना करीब 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। इतने बड़े वाहन को धीमी गति से लगातार चलाने और साथ में कई सहायक वाहनों को संचालित करने में भारी ईंधन खर्च हो रहा है। यात्रा के दौरान अब तक ईंधन पर होने वाला खर्च भी काफी अधिक बताया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने बड़े औद्योगिक उपकरण को सड़क के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना कितना जटिल और महंगा अभियान है।
वाराणसी में ट्रक के फंसने का असर स्थानीय यातायात पर भी पड़ा है। डाफी टोल प्लाजा के आसपास ट्रक की मौजूदगी और उसे निकालने के लिए चल रहे काम के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। इतने बड़े वाहन को रास्ते से निकालने के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत पड़ रही है और आसपास की गतिविधियों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि मेगा ट्रक को सुरक्षित तरीके से निकालने के साथ-साथ आम वाहनों की आवाजाही को भी यथासंभव नियंत्रित रखा जाए।
इस ट्रक का अंतिम गंतव्य उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित बलरामपुर चीनी मिल से जुड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट है। वहां एक बड़े औद्योगिक संयंत्र के लिए यह उपकरण ले जाया जा रहा है। वाराणसी से आगे भी इसे कई महत्वपूर्ण मार्गों से गुजरना है। इसके लिए रास्ते में आने वाले संभावित अवरोधों की पहचान पहले से की जा रही है, ताकि ट्रक को दोबारा ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
वाराणसी में प्रस्तावित रूट के तहत डाफी टोल प्लाजा से आगे ट्रक को मोहनसराय की ओर ले जाने की योजना है। इसके बाद विपरीत दिशा से कुछ हिस्सों में चलाकर इसे रिंग रोड तक पहुंचाया जाएगा। आगे हरहुआ, संदहा और फिर गाजीपुर की ओर जाने का मार्ग तैयार किया गया है। इस दौरान जहां-जहां फुट ओवरब्रिज, बिजली के तार या अन्य निर्माण बाधा बन रहे हैं, वहां संबंधित विभाग उन्हें हटाने या आवश्यक बदलाव करने में जुटे हैं।
ट्रक के गुजर जाने के बाद हटाए गए या बदले गए कुछ ढांचों को दोबारा बनाया जाना है। इसका मतलब यह है कि इस एक औद्योगिक उपकरण को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट कंपनी ही नहीं, बल्कि सड़क, बिजली, यातायात और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई विभागों को भी लगातार काम करना पड़ रहा है। इतनी बड़ी मशीन की आवाजाही अपने आप में एक विशेष लॉजिस्टिक ऑपरेशन बन गई है।
फिलहाल डाफी टोल प्लाजा के पास फंसे मेगा ट्रक को निकालना प्राथमिक चुनौती है। जमीन धंसने के कारण पहिया फंसने के बाद इसे बाहर निकालने के लिए मौके पर उपलब्ध भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। बिजली विभाग भी तार हटाने की तैयारी कर रहा है। जब तक ट्रक सुरक्षित तरीके से आगे नहीं बढ़ता, तब तक लखीमपुर खीरी तक इसकी यात्रा और लंबी हो सकती है।
इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया है कि 200 टन के आसपास के औद्योगिक उपकरण को सड़क मार्ग से ले जाने में कितनी सावधानी और पूर्व तैयारी की आवश्यकता होती है। सामान्य सड़कें और पुल इस तरह के अत्यधिक भारी और बड़े आकार के ट्रेलर के लिए पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में मार्ग का सर्वे, सड़क की क्षमता, पुलों की ऊंचाई, बिजली लाइनों की स्थिति और यातायात प्रबंधन पहले से सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है। वाराणसी में जमीन धंसने से ट्रक के फंसने के बाद अब सभी संबंधित टीमें इसे सुरक्षित तरीके से निकालने में जुटी हैं।
फिलहाल 308 पहियों वाला यह विशाल ट्रक डाफी टोल प्लाजा के पास अटक गया है और इसे निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रक के साथ मौजूद भारी मशीनरी और एनएचएआई तथा टोल कर्मचारियों की टीम मौके पर काम कर रही है। बिजली के तार हटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रक निकलने के बाद ही यह अपनी आगे की यात्रा शुरू कर सकेगा और लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ पाएगा।












