गुजरात के समुद्री तट पर हालिया सर्वे में 680 से अधिक डॉल्फिन दर्ज की गई हैं। सबसे ज्यादा डॉल्फिन ओखा से नवलखी के बीच स्थित मरीन नेशनल पार्क क्षेत्र में पाई गईं, जिससे राज्य का समुद्री संरक्षण मॉडल और मजबूत हुआ है।
Ahmedabad: गुजरात ने समुद्री जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हालिया सर्वेक्षण में राज्य के 4,087 किलोमीटर लंबे समुद्री तट पर 680 से अधिक डॉल्फिन दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर स्थिति और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
ओखा से नवलखी के बीच मिला सबसे बड़ा डॉल्फिन आवास
ताजा सर्वेक्षण के अनुसार कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से में ओखा से नवलखी तक फैले मरीन नेशनल पार्क और मरीन सैंक्चुअरी क्षेत्र में सबसे अधिक 498 डॉल्फिन दर्ज की गई हैं। लगभग 1,384 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह इलाका डॉल्फिन के प्रमुख आवास के रूप में उभरा है।
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इसके अलावा उत्तरी कच्छ की खाड़ी में 168 डॉल्फिन दर्ज की गईं। वहीं भावनगर तट पर 10 और मोरबी क्षेत्र में चार डॉल्फिन देखी गईं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कच्छ की खाड़ी स्थित भारत का पहला मरीन नेशनल पार्क डॉल्फिन संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम हैं डॉल्फिन
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री Arjun Modhwadia ने कहा कि डॉल्फिन समुद्री खाद्य श्रृंखला में शीर्ष शिकारियों में शामिल हैं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार डॉल्फिन की अच्छी आबादी किसी भी समुद्री क्षेत्र के स्वस्थ इकोसिस्टम का संकेत मानी जाती है। उनकी मौजूदगी समुद्र में जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाती है।
मछुआरों और संरक्षण प्रयासों का मिला लाभ
सरकार ने कच्छ से भावनगर तक के मछुआरा समुदायों के योगदान की भी सराहना की है। स्थानीय मछुआरों और वन विभाग के सहयोग से डॉल्फिन संरक्षण अभियान को मजबूती मिली है।
संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। डॉल्फिन की बढ़ती संख्या न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे समुद्री पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिला है।
पर्यटन का नया आकर्षण बने शिवराजपुर और पोशित्रा
डॉल्फिन की बढ़ती मौजूदगी के कारण गुजरात के कई समुद्री पर्यटन स्थल पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। Shivrajpur और Poshitra डॉल्फिन देखने के लिए प्रमुख स्थलों के रूप में उभरे हैं।
साफ समुद्री पानी और अनुकूल वातावरण के कारण यहां डॉल्फिन को आसानी से देखा जा सकता है। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है।
अरब सागर में पाई जाती हैं प्रमुख प्रजातियां
गुजरात के समुद्री क्षेत्रों में मुख्य रूप से इंडो-पैसिफिक हम्पबैक डॉल्फिन और बॉटलनोज डॉल्फिन पाई जाती हैं। हम्पबैक डॉल्फिन अपनी पीठ पर मौजूद विशिष्ट कूबड़ और लंबे डॉर्सल फिन के कारण आसानी से पहचानी जाती हैं।
इनकी लंबाई सामान्यतः 2.5 से 3.2 मीटर तक होती है और वजन 150 से 250 किलोग्राम के बीच हो सकता है। यह प्रजाति अरब सागर के तटीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में देखी जाती है।
डॉल्फिन संरक्षण को मिला नया बल
वन विभाग के अनुसार डॉल्फिन संरक्षित प्रजातियों की श्रेणी में आती हैं और उनका शिकार करना या नुकसान पहुंचाना गैर-जमानती अपराध है। बढ़ती आबादी यह संकेत देती है कि संरक्षण कार्यक्रम प्रभावी साबित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण और जागरूकता अभियान जारी रहे तो गुजरात आने वाले वर्षों में देश का सबसे महत्वपूर्ण डॉल्फिन संरक्षण क्षेत्र बन सकता है। इससे समुद्री जैव विविधता के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।










