उत्तराखंड के बाद गुजरात भी यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी है।
नई दिल्ली: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में राज्य सरकार की ओर से बनाई गई विशेषज्ञ समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी है। इससे पहले, सरकार ने 4 फरवरी 2025 को एक 5 सदस्यीय समिति बनाई थी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई कर रही थीं।
समिति ने राज्यभर में अलग-अलग समाज, धर्म और राजनीतिक लोगों से बातचीत की और उनकी राय लेने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की। समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर अब सरकार यह तय करेगी कि यूसीसी को लागू करने के लिए किन कदमों की जरूरत है और इसे किस समय सीमा में लागू किया जा सकता है।
समिति की प्रक्रिया और रिपोर्ट
गुजरात सरकार ने 4 फरवरी 2025 को एक पांच सदस्यीय समिति बनाई थी। इस समिति ने राज्य के जिलों का दौरा किया और अलग-अलग समाज, धर्म और राजनीतिक वर्ग के लोगों से चर्चा की। समिति ने विवाह, तलाक, गोद लेना, विरासत और महिलाओं के अधिकार जैसे मामलों पर गहन अध्ययन किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट रिपोर्ट महिलाओं के समान अधिकार और सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। साथ ही, यह गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
सूत्रों के अनुसार, 23 मार्च को यह रिपोर्ट विधानसभा में रखी जा सकती है। इसके अगले दिन, 24 मार्च को बजट सत्र के आखिरी दिन यूसीसी बिल पेश करने की संभावना है। यदि बिल पारित हो जाता है, तो गुजरात उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन जाएगा, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी।
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यूसीसी के ड्राफ्ट में प्रमुख बदलाव
ड्राफ्ट रिपोर्ट में जिन बदलावों का सुझाव दिया गया है, उनमें शामिल हैं:
- शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
- बहुविवाह पर प्रतिबंध: एक से अधिक शादी करने पर रोक होगी।
- संपत्ति में समान अधिकार: महिलाओं को संपत्ति में बराबर हक मिलेगा।
- सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा।
- हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक: महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे कड़े नियम प्रस्तावित हैं।
- शादी की न्यूनतम उम्र: महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष ही रहेगी।
उत्तराखंड में पहले ही लागू
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। वहां शादी और लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। साथ ही, बहुविवाह और बाल विवाह पर रोक है। बेटा-बेटी दोनों को संपत्ति में बराबर अधिकार दिए गए हैं। यदि गुजरात में यूसीसी लागू होता है, तो यह राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी ढांचा सुनिश्चित करेगा। इससे महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय में सुधार होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे धार्मिक भेदभाव के मामलों में भी कमी आएगी और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सभी धर्मों के लिए समान कानून लागू करना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।








