हिमाचल में भारी बारिश से हालात बिगड़े, 145 सड़कें बंद; भूस्खलन से कई हाईवे प्रभावित

हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन से 145 सड़कें बंद हैं। कई हाईवे प्रभावित, ब्यास-पार्वती नदियां उफान पर, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट।

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हो गया है। प्रदेशभर में 145 सड़कें बंद हैं, जबकि ब्यास और पार्वती नदियां उफान पर हैं। कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सक्रिय मानसून ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश के कई जिलों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। 145 सड़कें बंद होने के साथ ही ब्यास और पार्वती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जबकि कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित हो गया है।

भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, चंबा और अन्य जिलों में मूसलधार बारिश के चलते कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। पहाड़ों से लगातार मलबा और चट्टानें गिरने के कारण सड़क संपर्क बाधित हो गया है और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हिमाचल में भारी बारिश से हालात बिगड़े, 145 सड़कें बंद; भूस्खलन से कई हाईवे प्रभावित

राज्य सरकार और संबंधित विभाग बंद सड़कों को दोबारा खोलने में जुटे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है।

कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात प्रभावित

मंडी जिले में जालंधर-मंडी-अटारी राष्ट्रीय राजमार्ग धर्मपुर और कोटली के बीच तीन स्थानों पर भूस्खलन के कारण बाधित हो गया। वहीं मनाली-कीरतपुर फोरलेन पर लगातार पत्थर गिरने से यातायात प्रभावित रहा। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिजनी और नारला के बीच भी मलबा और चट्टानें गिरने का सिलसिला जारी रहा, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

किन्नौर जिले में शलखर के पास बाढ़ के कारण बंद पड़ा शिमला-किन्नौर राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 20 घंटे बाद यातायात के लिए बहाल कर दिया गया।

ब्यास और पार्वती नदियां उफान पर

लगातार बारिश के कारण कुल्लू जिले में ब्यास और पार्वती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। ब्यास नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद पंडोह बांध से करीब 9,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, जिसके बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मंडी जिले के जोगेंद्रनगर क्षेत्र में कृत्रिम झील बनने से आसपास के गांवों के लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

लाहौल-स्पीति और चंबा में भी हालात गंभीर

लाहौल-स्पीति जिले में बाढ़ के कारण तांदी-संसारी मार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने लोगों की आवाजाही के लिए नाले पर लोहे की प्लेट बिछाकर अस्थायी व्यवस्था की। इसी दौरान उदयपुर से कुल्लू रेफर किए गए निमोनिया से पीड़ित ढाई साल के बच्चे को 108 एंबुलेंस टीम ने सुरक्षित नाला पार करवाकर आगे पहुंचाया।

चंबा जिले में चुवाड़ी-नूरपुर मार्ग पर टिक्कर घार के पास पहाड़ी दरकने से सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। अधिकारियों के अनुसार इस मार्ग को दोबारा चालू करने में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। फिलहाल यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग का उपयोग किया जा रहा है।

145 सड़कें बंद, बिजली और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित

राज्य आपदा प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में 145 सड़कें अभी भी बंद हैं और उन्हें खोलने का काम जारी है। इसके अलावा 508 बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर (DTR) प्रभावित हुए हैं, जिनकी मरम्मत की जा रही है। भारी बारिश के कारण 43 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित हुई है।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और बिना जरूरी कारण यात्रा से बचने की अपील की है।

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