हिमाचल में 1,000 रोगी मित्रों की आउटसोर्स भर्ती पर हाई कोर्ट की रोक, ₹15,000 वेतन पर होनी थी नियुक्ति

हिमाचल हाई कोर्ट ने 1,000 रोगी मित्रों की आउटसोर्स भर्ती पर रोक लगाई। ₹15,000 मासिक वेतन प्रस्तावित था। कोर्ट ने स्टाफ नर्स के 1,535 पद खाली होने पर चिंता जताई।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में 1,000 रोगी मित्रों की आउटसोर्स भर्ती पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इन पदों पर ₹15,000 मासिक वेतन पर नियुक्ति प्रस्तावित थी। कोर्ट ने 1,535 स्टाफ नर्स पद खाली होने पर चिंता जताई।

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स आधार पर 1,000 रोगी मित्रों की भर्ती और तैनाती पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने बाल कृष्ण की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इन पदों पर स्टाफ नर्स के बराबर शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को ₹15,000 मासिक निश्चित वेतन पर नियुक्त करने की योजना थी।

1,000 रोगी मित्रों की भर्ती योजना पर रोक

याचिकाकर्ता बाल कृष्ण ने सरकार की उस नीति को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत अस्पतालों में 1,000 रोगी मित्रों को आउटसोर्स आधार पर तैनात किया जाना था। प्रस्तावित व्यवस्था में स्टाफ नर्स के बराबर शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोगों को ₹15,000 प्रतिमाह के निश्चित वेतन पर नियुक्त किया जाना था।

याचिका में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में 290 पदों को भरने के लिए 1 अगस्त 2026 को जारी मांग को भी चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वास्थ्य विभाग में नियमित कर्मचारियों की स्थिति और प्रस्तावित आउटसोर्स नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया।

स्टाफ नर्सों के 1,535 पद खाली

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों में स्टाफ नर्सों के कुल 1,535 पद खाली पड़े हैं। अदालत ने कहा कि अस्पतालों में नियमित स्वास्थ्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार नियमित कर्मचारियों की तरह काम लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण कर रही है। अदालत ने ऐसी व्यवस्था को लंबित अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने का एक शर्मनाक प्रयास बताया।

नियमित पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियों के बीच आउटसोर्स आधार पर समान प्रकृति का काम कराने की प्रस्तावित नीति पर अदालत की टिप्पणियां इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

सरकार ने नीति लागू नहीं करने का दिया आश्वासन

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया कि मुकदमा लंबित रहने के दौरान इस नीति को लागू नहीं किया जाएगा। सरकार के वकील ने यह भी बताया कि नीति की समीक्षा की जा रही है।

सरकार की ओर से दिए गए इस बयान को हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया। अदालत ने इसके बाद स्पष्ट आदेश दिया कि अगले आदेश तक ‘रोगी मित्रों’ की कोई नई भर्ती या तैनाती नहीं की जाएगी।

इस तरह फिलहाल 1,000 रोगी मित्रों की प्रस्तावित आउटसोर्स भर्ती पर रोक रहेगी। मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान सरकार की नीति की समीक्षा और स्वास्थ्य विभाग में खाली नियमित पदों को भरने से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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