हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) के CEO-cum-Secretary की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में संबंधित अधिकारी की नियुक्ति को नियमों के अनुरूप नहीं माना और नियुक्ति से जुड़ी 27 मई 2025 की अधिसूचना को निरस्त कर दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि HIMUDA के CEO-cum-Secretary पद को निर्धारित नियमों के अनुसार भरा जाए और केवल पात्र अधिकारियों को ही चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। यह पूरी प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब HIMUDA प्रदेश में आवासीय योजनाओं, भूमि विकास और संबंधित बुनियादी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करता है। HIMUDA का गठन 2004 में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी एक्ट के तहत किया गया था। संस्था का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग आय वर्ग के लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भूमि और बुनियादी ढांचे का विकास करना तथा योजनाबद्ध आवासीय कॉलोनियों को बढ़ावा देना है।
अदालत के सामने उठे विवाद का मुख्य मुद्दा CEO-cum-Secretary पद पर नियुक्त किए गए अधिकारी की पात्रता से जुड़ा था। याचिका में नियुक्ति को चुनौती देते हुए यह सवाल उठाया गया था कि क्या संबंधित अधिकारी को उस पद पर नियुक्त किया जा सकता था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद नियुक्ति को निरस्त कर दिया और सरकार को नियमों के अनुसार पात्र अधिकारी का चयन करने के निर्देश दिए।
फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को व्यक्तिगत स्तर पर पदोन्नति या वेतन संबंधी लाभ मिल जाने मात्र से उसे उच्च पद पर नियुक्ति के लिए स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता। संबंधित मामले में अदालत ने माना कि व्यक्तिगत अपग्रेडेशन से नियमित कैडर का पद नहीं बनाया जा सकता और इससे किसी अधिकारी को उच्च पद पर नियुक्ति की पात्रता भी नहीं मिल जाती।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी की CEO-cum-Secretary के रूप में नियुक्ति को रद्द करते हुए 27 मई 2025 को जारी अधिसूचना को भी सेट aside कर दिया। हालांकि अदालत ने पहले से उस पद पर रहते हुए अधिकारी को मिले वित्तीय लाभ की वसूली का आदेश नहीं दिया है। यानी नियुक्ति को रद्द करने के बावजूद अब तक प्राप्त वेतन या अन्य वित्तीय लाभों की रिकवरी नहीं की जाएगी।
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि CEO-cum-Secretary के पद पर नियुक्ति के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के वर्ष 2012 के लागू नियमों और उनमें किए गए संशोधनों का पालन किया जाए। चयन प्रक्रिया में केवल उन अधिकारियों को शामिल किया जाए जो निर्धारित योग्यता और पात्रता पूरी करते हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पात्र उम्मीदवारों के दायरे में शामिल करते हुए उसके मामले पर भी विचार किया जाए।
कोर्ट ने इस पूरी कवायद के लिए सरकार को दो सप्ताह की समय सीमा दी है। इसका मतलब है कि अब राज्य सरकार को निर्धारित नियमों के तहत पात्र अधिकारियों की स्थिति की समीक्षा करनी होगी और तय समय के भीतर नए सिरे से चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अदालत के निर्देश के बाद विभागीय स्तर पर इस पद को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।
यह फैसला सरकार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि HIMUDA प्रदेश में आवास और शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं को लागू करने वाली प्रमुख संस्था है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार HIMUDA के मौजूदा कार्यक्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं, निर्माणाधीन योजनाओं और आगामी परियोजनाओं के साथ नागरिक सुविधाओं से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं। संस्था की विभिन्न परियोजनाएं सोलन, शिमला, बद्दी और धर्मशाला सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में हैं।
HIMUDA में CEO-cum-Secretary का पद प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। संस्था की योजनाओं और विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी, विभागीय समन्वय तथा प्रशासनिक निर्णयों में इस पद की अहम भूमिका होती है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार के सामने अब पात्र अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
अदालत के फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नियुक्ति प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक सुविधा या किसी अधिकारी के व्यक्तिगत पदोन्नति लाभ के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। पद की निर्धारित पात्रता और संबंधित सेवा नियमों का पालन करना जरूरी है। हाईकोर्ट ने इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति को निरस्त किया और सरकार को नियमों के तहत दोबारा प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
इस मामले में याचिकाकर्ता को भी नए चयन या विचार प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। इसका अर्थ है कि सरकार को नए सिरे से पात्र अधिकारियों की सूची तैयार करते समय सभी योग्य दावेदारों पर नियमों के अनुसार विचार करना होगा। इससे चयन प्रक्रिया में निर्धारित पात्रता और नियमों की भूमिका और स्पष्ट हो गई है।
हाईकोर्ट का फैसला प्रशासनिक नियुक्तियों में सेवा नियमों के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया है कि किसी अधिकारी को पहले मिले व्यक्तिगत लाभ या पद संबंधी उन्नयन को आधार बनाकर उसे किसी दूसरे उच्च पद के लिए स्वतः योग्य नहीं माना जा सकता। उच्च पद पर नियुक्ति के लिए उस पद के लिए निर्धारित नियम और पात्रता शर्तें पूरी करना आवश्यक है।
अब सरकार के सामने दो सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने की चुनौती है। विभाग को पात्र अधिकारियों की पहचान करनी होगी, नियमों के अनुसार उनके दावों की जांच करनी होगी और इसके बाद CEO-cum-Secretary पद पर नियुक्ति को अंतिम रूप देना होगा। अदालत के आदेश के बाद होने वाली यह प्रक्रिया HIMUDA के प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से 27 मई 2025 की नियुक्ति अधिसूचना प्रभावी नहीं रहेगी। सरकार को अब नए सिरे से पात्र अधिकारी का चयन करना होगा। अदालत ने अपने फैसले में नियुक्ति को रद्द करने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नई नियुक्ति निर्धारित नियमों के तहत ही की जानी चाहिए।
इस फैसले के बाद हिमाचल सरकार और HIMUDA प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। दो सप्ताह की समय सीमा के भीतर पात्र अधिकारी के चयन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे यह भी तय होगा कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार नए चयन को किस तरह और किन नियमों के आधार पर अंतिम रूप देती है।









