हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव नियमों में संशोधन किया है। अब सरकारी या शामलात जमीन पर कब्जे से जुड़े परिवार की पुत्र-वधू भी चुनाव नहीं लड़ सकेगी। अतिक्रमणकारियों पर छह साल तक प्रतिबंध रहेगा।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने पंचायती राज नियमों में बदलाव किया है। विधानसभा में पेश संशोधन विधेयक के तहत सरकारी या शामलात जमीन पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति के परिवार की पुत्र-वधू भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य मानी जाएगी। नए प्रावधान में कब्जा छोड़ने या बेदखली की तारीख से छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान किया गया है।
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर बदले पंचायत चुनाव नियम
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार ने अतिक्रमण से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। नए संशोधन के बाद सरकारी या शामलात जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति के परिवार के सदस्यों पर भी चुनाव लड़ने को लेकर कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है।
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अब परिवार की पुत्र-वधू यानी बहू को भी अतिक्रमण से जुड़े प्रावधानों में शामिल किया गया है। सरकार का यह कदम उस स्थिति को रोकने के लिए उठाया गया है, जिसमें अयोग्य घोषित व्यक्ति अपने परिवार की बहू को उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतार देते थे।
विधानसभा में पेश किया गया संशोधन विधेयक
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। यह विधेयक पहले जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा।
पुराने कानून में अतिक्रमणकारी के परिवार की परिभाषा में दादा-दादी, माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा और अविवाहित बेटी शामिल थे। हालांकि, इसमें पुत्र-वधू का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। सरकार ने इसी प्रावधान में बदलाव करते हुए बहू को भी परिवार की परिभाषा में शामिल किया है।
सरकार ने इस संबंध में 6 मई 2026 को अध्यादेश जारी किया था। अब विधानसभा में पेश विधेयक उसी अध्यादेश का स्थान लेगा और नया प्रावधान 6 मई 2026 से लागू माना जाएगा।
अतिक्रमण के बाद छह साल तक चुनाव पर रोक
संशोधित प्रावधानों के तहत अतिक्रमणकारी की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है। यदि उम्मीदवार या उसके परिवार के किसी सदस्य, जिसमें पुत्र-वधू भी शामिल है, को भूमि अतिक्रमण का दोषी पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा।
यह अयोग्यता कब्जा हटाने या संबंधित व्यक्ति को जमीन से बेदखल किए जाने की तारीख से छह साल तक लागू रहेगी। इससे पंचायत चुनाव में अतिक्रमण से जुड़े मामलों को लेकर उम्मीदवारों की पात्रता पर सीधा असर पड़ेगा।
इन स्थितियों में भी उम्मीदवार हो सकता है अयोग्य
संशोधित नियमों के तहत केवल जमीन पर कब्जा ही चुनावी अयोग्यता का आधार नहीं होगा। अन्य निर्धारित परिस्थितियों में भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ NDPS Act के तहत नशे से जुड़े मामले में सक्षम अदालत में आरोप विचाराधीन हैं, तो भी अयोग्यता लागू हो सकती है। इसके अलावा पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद का कोई टैक्स, शुल्क या अन्य बकाया लंबित होने पर भी उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
पंचायत या सरकारी उपक्रम में रेगुलर, पार्ट-टाइम, दिहाड़ी या ठेके पर नौकरी करने वाले व्यक्ति के लिए भी अयोग्यता का प्रावधान है। नामांकन पत्र में गलत जानकारी या झूठी घोषणा देने, चुनावी अपराध, भ्रष्ट आचरण या नैतिक पतन के मामलों में दोषी ठहराए जाने पर भी नियमों के तहत कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में सजा पूरी होने के बाद छह साल तक अयोग्यता का प्रावधान है।
अयोग्यता पर अधिकारी करेंगे फैसला
यदि किसी उम्मीदवार की पात्रता को लेकर शिकायत या आपत्ति सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद मामले पर फैसला लिया जाएगा।
नए विधेयक के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग की सलाह के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी उम्मीदवार की अयोग्यता से जुड़े मामले में निर्णय लेगा। इससे पंचायत चुनाव में नामांकन के दौरान सामने आने वाली आपत्तियों और अयोग्यता के मामलों के निपटारे की प्रक्रिया निर्धारित होगी।










