IAS बनने के लिए रोज कितने घंटे पढ़ें? नूपुर गोयल ने बताया सफलता का मंत्र

IAS नूपुर गोयल ने मेरठ की छात्राओं को बताया कि सिविल सेवा की तैयारी में रोज 6-8 घंटे पढ़ाई जरूरी है। जानिए UPSC सफलता का उनका खास मंत्र।
IAS बनने के लिए रोज कितने घंटे पढ़ें? नूपुर गोयल ने बताया सफलता का मंत्र
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मेरठ: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल किया जाता है। हर साल लाखों अभ्यर्थी IAS, IPS और दूसरी प्रतिष्ठित सेवाओं में जाने के सपने के साथ परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता हासिल करने के लिए कितने घंटे पढ़ाई करनी चाहिए, यह सवाल लगभग हर उम्मीदवार के मन में रहता है। इसी सवाल का जवाब मेरठ की मुख्य विकास अधिकारी और IAS अधिकारी नूपुर गोयल ने छात्राओं से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा की तैयारी के लिए रोजाना करीब छह से आठ घंटे पढ़ाई करना जरूरी है।

नूपुर गोयल सोमवार को मेरठ के आरजी गर्ल्स इंटर कॉलेज पहुंचीं, जहां उन्होंने छात्राओं के साथ संवाद किया और उन्हें UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्राओं ने उनसे IAS, IPS और भारतीय वन सेवा सहित विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में जाने की तैयारी को लेकर सवाल पूछे। इसी दौरान पढ़ाई के समय को लेकर भी सवाल किया गया। नूपुर गोयल ने बताया कि यदि कोई विद्यार्थी गंभीरता से सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है तो उसे रोजाना छह से आठ घंटे पढ़ाई के लिए देना चाहिए।

उन्होंने छात्राओं को केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने के बजाय तैयारी को व्यवस्थित तरीके से करने की सलाह दी। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी लंबी प्रक्रिया है और इसमें प्रारंभिक परीक्षा यानी Prelims, मुख्य परीक्षा यानी Mains और इसके बाद Interview का चरण आता है। इसलिए उम्मीदवार को शुरुआत से ही पूरी परीक्षा प्रक्रिया को समझकर अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए। नूपुर गोयल ने छात्राओं को परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक की पूरी प्रक्रिया भी समझाई और बताया कि किस तरह लगातार तैयारी करते हुए इस परीक्षा के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

छात्राओं ने उनसे यह भी पूछा कि क्या IAS बनने के लिए कोचिंग करना जरूरी है। इस पर नूपुर गोयल ने बताया कि मौजूदा समय में तैयारी के लिए ऑनलाइन संसाधनों की उपलब्धता काफी बढ़ गई है। मोबाइल फोन के माध्यम से भी ऑनलाइन कोचिंग और अध्ययन सामग्री तक पहुंच बनाई जा सकती है। यानी तैयारी के लिए संसाधनों की कमी अब पहले जैसी बड़ी समस्या नहीं है। उम्मीदवार अपनी जरूरत के हिसाब से ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करके पढ़ाई कर सकते हैं।

नूपुर गोयल का यह संवाद ऐसे समय में हुआ जब शासन की ओर से जिलों में तैनात IAS अधिकारियों को सप्ताह में एक बार स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करने और UPSC परीक्षा के बारे में उन्हें जागरूक करने के लिए कहा गया है। इसी अभियान के तहत वह आरजी गर्ल्स इंटर कॉलेज पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया और उनके सवालों का जवाब दिया।

नूपुर गोयल खुद भी UPSC की तैयारी के दौरान लंबे संघर्ष से गुजर चुकी हैं। उपलब्ध पूर्व प्रकाशित प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने UPSC परीक्षा में लगातार कई प्रयास किए और पांच बार असफलता के बाद अपने छठे प्रयास में सफलता हासिल की। वर्ष 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 11 हासिल की थी। उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है जो एक-दो प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बाद निराश हो जाते हैं।

नूपुर गोयल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी रही है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में पढ़ाई की और इसके बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की। UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए प्रयास जारी रखा। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा में लगातार प्रयास और गलतियों से सीखना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

UPSC की तैयारी करने वाले उम्मीदवार अक्सर यह सोचते हैं कि सफल होने वाले अभ्यर्थी 12 से 15 घंटे तक पढ़ाई करते होंगे। हालांकि नूपुर गोयल की बताई छह से आठ घंटे की अवधि यह संकेत देती है कि पढ़ाई का समय अकेला सफलता का पैमाना नहीं है। छह से आठ घंटे की पढ़ाई तभी प्रभावी होगी जब उस दौरान उम्मीदवार का पूरा ध्यान पढ़ाई पर हो, विषयों को समझने की कोशिश की जाए और नियमित रूप से रिवीजन किया जाए। लंबी अवधि तक लगातार बैठने के बजाय योजनाबद्ध और केंद्रित अध्ययन अधिक उपयोगी हो सकता है।

सिविल सेवा की तैयारी में सबसे पहले उम्मीदवार को परीक्षा के पूरे सिलेबस को समझना चाहिए। इसके बाद विषयों को प्राथमिकता के आधार पर बांटना और रोजाना पढ़ाई का लक्ष्य निर्धारित करना उपयोगी रहता है। सामान्य अध्ययन के साथ-साथ करंट अफेयर्स, वैकल्पिक विषय, लेखन अभ्यास और टेस्ट सीरीज जैसी जरूरतों को भी समय देना पड़ता है। Prelims की तैयारी के दौरान वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अभ्यास जरूरी होता है, जबकि Mains के लिए उत्तर लेखन की लगातार प्रैक्टिस महत्वपूर्ण होती है। नूपुर गोयल पहले भी UPSC उम्मीदवारों को सीमित और भरोसेमंद स्रोतों से तैयारी करने तथा नियमित रूप से अखबार पढ़ने की सलाह दे चुकी हैं।

उनकी सफलता की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने असफलताओं को अपनी तैयारी का अंत नहीं माना। शुरुआती प्रयासों में कभी वह इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन अंतिम सफलता नहीं मिली और कभी प्रारंभिक परीक्षा में ही आगे नहीं बढ़ सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हर प्रयास से सीख लेकर अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार छठे प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की और IAS बनने का सपना पूरा किया।

मेरठ में छात्राओं से बातचीत के दौरान नूपुर गोयल ने इसी तरह के सवालों के जवाब देकर उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। छात्राओं के लिए इस तरह के संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले परीक्षा की प्रकृति और उसके अलग-अलग चरणों को समझना जरूरी होता है। कई विद्यार्थी केवल यह सोचकर तैयारी शुरू कर देते हैं कि उन्हें IAS बनना है, लेकिन परीक्षा का विस्तृत सिलेबस, Prelims और Mains की अलग रणनीति, इंटरव्यू की भूमिका और लंबे समय तक चलने वाली तैयारी के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं होती।

IAS बनने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए रोजाना छह से आठ घंटे पढ़ाई का लक्ष्य बनाया जा सकता है, लेकिन इसे अपनी शैक्षणिक स्थिति और तैयारी के स्तर के हिसाब से व्यवस्थित करना जरूरी है। जो विद्यार्थी अभी कॉलेज या स्कूल में हैं, उनके लिए पढ़ाई का समय अलग तरीके से तय हो सकता है, जबकि पूर्णकालिक UPSC अभ्यर्थी अपना अधिक समय परीक्षा की तैयारी में दे सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि रोजाना पढ़ाई का एक निश्चित रूटीन बनाया जाए और उसे लंबे समय तक कायम रखा जाए।

तैयारी के दौरान केवल नई किताबें और नई अध्ययन सामग्री जुटाते रहना भी उपयोगी नहीं होता। उम्मीदवारों को सीमित स्रोत चुनकर बार-बार रिवीजन करने पर ध्यान देना चाहिए। किसी विषय को एक बार पढ़ लेने के बाद उसे दोबारा पढ़ना, उससे संबंधित प्रश्न हल करना और अपनी गलतियों को पहचानना तैयारी का अहम हिस्सा है। इसी तरह करंट अफेयर्स के लिए रोजाना समाचारों से अपडेट रहना और महत्वपूर्ण मुद्दों के नोट्स बनाना Mains की तैयारी में मदद कर सकता है।

Prelims के लिए मॉक टेस्ट और प्रश्नों का अभ्यास भी महत्वपूर्ण है। नूपुर गोयल ने पहले UPSC अभ्यर्थियों को Prelims के लिए मॉक टेस्ट को जरूरी बताया था। वहीं Mains के लिए उत्तर लेखन का अभ्यास करने की सलाह दी थी। इसका उद्देश्य केवल जानकारी याद करना नहीं, बल्कि कम समय में सवाल को समझकर व्यवस्थित और तथ्यपूर्ण उत्तर लिखने की क्षमता विकसित करना है।

UPSC की तैयारी में मानसिक मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कई उम्मीदवार लगातार कई महीनों या वर्षों तक तैयारी करते हैं और एक परीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर निराश हो जाते हैं। नूपुर गोयल की अपनी यात्रा बताती है कि असफलता के बाद तैयारी छोड़ने के बजाय यह देखना जरूरी है कि गलती कहां हुई। यदि Prelims में समस्या आई है तो रणनीति में बदलाव करना होगा, अगर Mains में कमी रह गई है तो उत्तर लेखन और विषय की समझ पर काम करना होगा और अगर Interview में सफलता नहीं मिली तो व्यक्तित्व परीक्षण के लिए अलग तरीके से तैयारी करनी होगी।

मेरठ में छात्राओं के साथ नूपुर गोयल का संवाद इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा था कि विद्यार्थी प्रशासनिक सेवाओं को केवल एक कठिन परीक्षा के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक करियर विकल्प के तौर पर समझें। IAS, IPS और भारतीय वन सेवा जैसी सेवाओं में जाने के लिए अलग-अलग रुचि और क्षमता वाले विद्यार्थी तैयारी कर सकते हैं। सही जानकारी, नियमित अध्ययन और लंबे समय तक अनुशासन बनाए रखना इसकी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नूपुर गोयल वर्तमान में मेरठ में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उपलब्ध सार्वजनिक प्रशासनिक रिकॉर्ड में भी उन्हें मेरठ की मुख्य विकास अधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।

उनकी ओर से छात्राओं को दिया गया छह से आठ घंटे का पढ़ाई का मंत्र उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है जो UPSC की तैयारी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर विद्यार्थी के लिए बिल्कुल छह या आठ घंटे पढ़ना ही सफलता की अनिवार्य शर्त है। असल लक्ष्य पढ़ाई की गुणवत्ता, निरंतरता, सही दिशा और परीक्षा की जरूरत के अनुसार तैयारी करना होना चाहिए। कोई विद्यार्थी छह घंटे में जितना प्रभावी अध्ययन करता है, जरूरी नहीं कि वही परिणाम 10-12 घंटे तक किताब के सामने बैठने से मिले।

कुल मिलाकर नूपुर गोयल की सलाह का सार यही है कि UPSC की तैयारी में नियमितता और सही रणनीति सबसे महत्वपूर्ण हैं। रोजाना छह से आठ घंटे केंद्रित पढ़ाई, सीमित और भरोसेमंद अध्ययन स्रोत, अखबार और करंट अफेयर्स पर नजर, Prelims के लिए मॉक टेस्ट, Mains के लिए उत्तर लेखन और असफलताओं से सीखकर लगातार आगे बढ़ना अभ्यर्थियों की तैयारी को मजबूत कर सकता है। नूपुर गोयल की अपनी सफलता की कहानी भी यही बताती है कि कई असफल प्रयासों के बाद भी यदि उम्मीदवार लक्ष्य पर कायम रहे और अपनी रणनीति में सुधार करता रहे तो सफलता हासिल की जा सकती है।

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