भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत ट्रेड डील की अंतिम शर्तों का ऐलान तभी करेगा, जब अमेरिका प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर और रियायती टैरिफ व्यवस्था पर सहमत होगा।
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर नई स्थिति सामने आई है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते को अंतिम रूप देने से पहले अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धी और बेहतर टैरिफ व्यवस्था चाहता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अनुकूल शुल्क व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के बाद ही ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पीयूष गोयल ने गुरुवार को ‘लीवरेजिंग एफटीए आउटरीच प्रोग्राम’ के तहत आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका भारतीय निर्यातकों को उनके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर टैरिफ उपलब्ध कराने की स्थिति में होगा, तब भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देगा और इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
टैरिफ को लेकर भारत की अहम मांग
भारत की मुख्य चिंता अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को लेकर है। वैश्विक व्यापार में टैरिफ सीधे तौर पर किसी देश के उत्पाद की कीमत और प्रतिस्पर्धा पर असर डालते हैं। ऐसे में भारत चाहता है कि प्रस्तावित समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को दूसरे प्रमुख व्यापारिक देशों की तुलना में नुकसान न उठाना पड़े।
सरकार का जोर इस बात पर है कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापार समझौते से भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को वास्तविक बाजार लाभ मिलना चाहिए। खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारतीय उत्पादों को दूसरे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
क्या है भारत-अमेरिका BTA?
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भारत और अमेरिका लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस प्रस्तावित डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, बाजार तक पहुंच आसान करना और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं को कम करना है। समझौते के जरिए दोनों देश अपने-अपने बाजारों में उत्पादों की पहुंच बेहतर करने और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के लिए अमेरिका एक प्रमुख निर्यात बाजार है, जबकि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़ा उपभोक्ता बाजार है।
ऐसे में BTA को दोनों देशों के कारोबारी और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर अंतिम सहमति बनना अभी जरूरी है।
डील का ड्राफ्ट लगभग तैयार होने की बात
इससे पहले जुलाई में अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मसौदा काफी हद तक तैयार हो चुका है। अधिकारी के अनुसार, इसे आने वाले तीन से चार महीनों में औपचारिक रूप से साइन किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी ‘सेक्शन 301’ के तहत चल रही व्यापार जांच को इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
अमेरिकी पक्ष की ओर से यह भी कहा गया था कि समझौते में देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी है और इसे दोनों देशों के बीच किसी बड़े मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच भारत का रुख
अमेरिका की टैरिफ नीति भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बनी हुई है। भारत का प्रयास है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में ऐसी शुल्क व्यवस्था मिले, जिससे वे अन्य देशों के उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहें। भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन की व्यापार नीति में बदलाव का असर कई देशों के निर्यातकों पर पड़ सकता है।
नई दिल्ली का जोर इसलिए केवल समझौते को जल्द पूरा करने पर नहीं, बल्कि ऐसी शर्तों पर सहमति बनाने पर है जो भारतीय उद्योग और निर्यातकों के दीर्घकालिक हितों के अनुकूल हों।









