MHA: हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन का बढ़ता खतरा, गृह सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की

MHA: हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे को देखते हुए गृह सचिव गोविंद मोहन ने तैयारियों की समीक्षा की। अर्ली वॉर्निंग, निगरानी और निकासी व्यवस्था

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को नई दिल्ली में हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के खतरे से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।

नई दिल्ली: हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आपदा तैयारियों की समीक्षा की है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें हिमालयी राज्यों में आपदा जोखिम कम करने और समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, बर्फ से ढके इलाकों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही शुरुआती चेतावनी प्रणाली, जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, संभावित जल-प्रवाह मार्गों का आकलन और प्रभावित आबादी को समय पर अलर्ट करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

GLOF क्या है और क्यों बढ़ रही है चिंता?

Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) ऐसी स्थिति है, जब ग्लेशियर के पास बनी झील की प्राकृतिक या कृत्रिम बाधा अचानक टूट जाती है और भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बहने लगता है। इससे कुछ ही समय में नदियों और घाटियों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदलती भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण ग्लेशियल झीलों की निगरानी और जोखिम आकलन महत्वपूर्ण हो गया है। बैठक में इसी वजह से संवेदनशील झीलों और संभावित बाढ़ मार्गों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया।

राज्यों ने बताई अपनी तैयारी

बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी तैयारियों की जानकारी दी। इसमें ग्लेशियल झीलों की निगरानी, चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, स्थानीय स्तर तक अलर्ट पहुंचाने और जरूरी आपदा संसाधनों की तैनाती जैसे कदम शामिल रहे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं है। चेतावनी मिलने के बाद जिला प्रशासन, स्थानीय एजेंसियों और समुदायों के स्तर पर तेजी से कार्रवाई की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई पर जोर

MHA: हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन का बढ़ता खतरा, गृह सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की

केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि GLOF और हिमस्खलन से निपटने की रणनीति केवल घटना के बाद राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय जोखिम आधारित योजना, निवारक उपाय और सामुदायिक तैयारी को आपदा प्रबंधन का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है। राज्यों को अपनी आपदा योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और शुरुआती चेतावनी तथा निकासी व्यवस्था में मौजूद कमियों को पहले से दूर करने की सलाह दी गई। खासतौर पर जोखिम बढ़ने की स्थिति में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन संभावित इलाकों की सक्रिय निगरानी बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया गया।

वैज्ञानिक संस्थानों के साथ समन्वय जरूरी

बैठक में राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन और वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी संभावित खतरे की सूचना तेजी से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे और उसके आधार पर समय रहते निकासी या अन्य सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। इसका मकसद संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम को कम करने के लिए संरचनात्मक और तकनीकी उपायों को प्रभावी रूप से लागू करना है।

कौन-कौन अधिकारी बैठक में रहे मौजूद?

बैठक में संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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